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वेदों के उपदेश संप्रदाय के लिए नहीं बल्कि जीवन उद्धार के लिए हंै: आचार्य कर्मवीर

सारनी। वार्ड 5 में वेदों के उपदेश और यज्ञ का आयोजन करते हुए। भास्कर संवाददाता| सारनी भारतीय संस्कृति की गरिमा...

Bhaskar News Network| Last Modified - Mar 12, 2018, 05:45 AM IST

वेदों के उपदेश संप्रदाय के लिए नहीं बल्कि जीवन उद्धार के लिए हंै: आचार्य कर्मवीर
वेदों के उपदेश संप्रदाय के लिए नहीं बल्कि जीवन उद्धार के लिए हंै: आचार्य कर्मवीर
सारनी। वार्ड 5 में वेदों के उपदेश और यज्ञ का आयोजन करते हुए।

भास्कर संवाददाता| सारनी

भारतीय संस्कृति की गरिमा की पहचान वेदों के कारण ही है। वार्ड क्रमांक 5 में सुनील बघेल के निवास पर चार दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ का शनिवार को समापन हुआ। अजमेर से आए आचार कर्मवीर ने कहा भौतिकवादी युग मे मनुष्य योग साधना से असाध्य रोगों से छुटकारा पा सकता है। यजुर्वेद परायण यज्ञ की शुरुआत 7 मार्च को हुई। चार दिन तक चले वैदिक यज्ञ में मानव कल्याण के लिए अचार कर्मवीर और आचार्य निरंजन ने कहा वेदों का उपदेश किसी एक जाति संप्रदाय व किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है। वेद परमात्मा की वाणी है, वेद के प्राचार्य प्रसार का मूल उद्देश्य मनुष्य जीवन में बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को ग्रहण करना है। वेदों का पुनरुत्थान कर प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए आर्य मानव कल्याण के लिए वेदों के माध्यम से अलख जगा रहा है। यजुर्वेद पारायण यज्ञ में नगर के सैकड़ों साधकों ने भाग लिया। आचार्य कर्मवीर व निरंजन ने कहा पारायण यज्ञ का प्राचीन काल से ही मानव जीवन में विशेष महत्व रहा है। शास्त्रों में मानव के लिए रोग मुक्ति से लेकर आत्म शुद्धि व दीर्घायु जीवन के लिए योग साधना को सबसे सशक्त माध्यम है।

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