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खदानों का निजीकरण इंटक करेगा आंदोलन

केंद्र सरकार कोयला उद्योग को निजी हाथों में देने के निर्णय का राष्ट्रीय कोयला खदान संघ (इंटक) ने विरोध किया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 22, 2018, 05:50 AM IST

केंद्र सरकार कोयला उद्योग को निजी हाथों में देने के निर्णय का राष्ट्रीय कोयला खदान संघ (इंटक) ने विरोध किया है। इंटक संगठन के केंद्रीय महामंत्री एसक्यू जमा ने सरकार के मजदूर विरोधी निर्णय को वापस लेने की मांग की। कोयला उद्योग को बचाने के लिए विरोध स्वरूप विस्तृत कार्य योजना तैयार कर जनांदोलन खड़ा करने के निर्णय में क्षेत्रीय अध्यक्ष आरके चिब तथा महामंत्री दामोदर मिश्र ने अपनी सहमति जताई और जनांदोलन की तैयारी शुरू कर दी।

क्षेत्रीय महामंत्री दामोदर मिश्र ने कोयला उद्योग के श्रमिकों, मजदूरों से सरकार के गलत निर्णय के विरोध में एकजुट होकर केंद्रीय महामंत्री श्री जमा के निर्णय में साथ देने का आह्वान किया है। क्षेत्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश पुरोहित, मो. आशिक खान एवं यासीन ने कहा अंग्रेजों के समय से चल रही कोयला खान देश की आजादी के बाद निजी हाथों में 20 वर्षों तक रही, इससे मजदूरों से बिना सुरक्षा उपकरणों, कम मेहनताना में गुलामों की तरह कार्य करवाया जाता था। फिर वही तैयारी की जा रही है। डब्ल्यूसीएल टीएससी सदस्य भारत सिंह ने कहा देश हित और श्रमिक हित में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार ने कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण करके लेबर एक्ट बनाया।

इससे कामगारों के लिए सोशल सिक्यूरिटी दी गई थी। इंटक मीडिया प्रभारी जीसी चौरे ने केंद्र सरकार के उद्योगपति विनिवेश प्रेम और कंपनियों को श्रमिकों का शोषण करने का लाइसेंस देने को देश मे बेरोजगारी और शोषण को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।

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