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बाहर से कोयला मंगाने से बढ़ गई सतपुड़ा के बिजली उत्पादन की लागत

सारनी। सतपुड़ा पावर प्लांट की इकाइयाें की उत्पादन लागत बढ़ गई है। बाहर की खदानों से लेना पड़ रहा है कोयला भास्कर...

Dainik Bhaskar

Feb 22, 2018, 05:50 AM IST
बाहर से कोयला मंगाने से बढ़ गई सतपुड़ा के बिजली उत्पादन की लागत
सारनी। सतपुड़ा पावर प्लांट की इकाइयाें की उत्पादन लागत बढ़ गई है।

बाहर की खदानों से लेना पड़ रहा है कोयला

भास्कर संवाददाता | सारनी

सतपुड़ा पावर प्लांट की प्रति इकाई उत्पादन लागत में 9 से 15 पैसे तक का इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण बाहर से ज्यादा मात्रा में कोयला लेना है। कोयले की परिवहन लागत बढ़ने के कारण प्रति इकाई उत्पादन लागत में भी इजाफा हुआ है। नए मैरिट ओवर डिस्पैच में दरें आने के बाद सतपुड़ा प्रबंधन इसे लेकर चिंतित है।

थर्मल पावर हाउस की प्रति इकाई उत्पादन लागत कोयले की दरों पर निर्भर होती है। सतपुड़ा पावर प्लांट में स्थानीय स्तर पर कम कोयला मिलने के कारण इसकी लागत बढ़ रही है। पाथाखेड़ा की खदानों से औसतन 4 से 5 हजार मीट्रिक टन कोयला मिल रहा है।

जबकि पहले यह 6 से 7 हजार मीट्रिक टन होता था। इसके अलावा रैक से कोयला लिया जा रहा था। स्थानीय खदानों से कम कोयला मिलने के कारण स्टाक सीमित हो गया और इकाइयां बंद होने की नौबत आने लगी। इसे देखते हुए प्रबंधन ने पेंच, कन्हान क्षेत्र की मोहन कॉलरी से कोयला लेना शुरू किया। करीब 40 से 50 किमी दूरी तय कर कोयला यहां पहुंच रहा है। इससे परिवहन लागत बढ़ गई।

पिछले महीनों की मैरिट ओवर डिस्पैच में सतपुड़ा प्लांट की 6 से 9 नंबर तक की इकाइयों की प्रति यूनिट लागत 2.40 रुपए थी। इस महीने बढ़कर यह 2.55 हो गई। इसी तरह 10 और 11 नंबर इकाइयों की लागत 1.87 रुपए प्रति इकाई थी। यह बढ़कर 1.96 हो गई।

एमओडी के रेट आधार पर ही कंपनी लेती है बिजली

प्रदेश में पिछले सप्ताह में रबी सीजन के कारण सुबह के समय बिजली की अधिकतम डिमांड 11 हजार मेगावाट पहुंच गई थी। हालांकि उन घंटों में अब यह 9 हजार मेगावाट के करीब है। बिजली की जरूरत के मुताबिक पावर मैनेजमेंट कंपनी पावर प्लांटों से एमओडी के रेट के आधार पर बिजली खरीदता है। जिसकी दरें कम होती हैं। उसे पहले बिजली उत्पादन करने का मौका मिलता है। कोयला, आॅइल, आग्लरी, मैन पावर समेत अन्य खर्चों के आधार पर एमओडी तय होती हैं।

बंद दो इकाइयां हुईं शुरू, सतपुड़ा की स्थिति में सुधार

ट्यूब लीकेज की समस्या के कारण बंद हुई 8 और 10 नंबर इकाइयाें से फिर उत्पादन शुरू हो गया। दोनों इकाइयां दो दिनों पहले ट्यूब लीकेज से बंद हुई थीं। प्लांट की 210 मेगावाट क्षमता वाली 8 नंबर इकाई सुबह 4.45 तो 10 नंबर इकाई शाम 4.10 बजे शुरू की गई। इनसे उत्पादन के बाद सतपुड़ा प्लांट की स्थिति सुधर सकती है। बुधवार तक 250 मेगावाट क्षमता की 11 नंबर इकाई से ही उत्पादन हो रहा था। 6 और 7 नंबर इकाइयां रिजर्व बेकिंग डाउन के कारण बंद हैं।

कोयले की कीमत के कारण बढ़ी लागत


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