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छह दिन से शहर के सभी 18 एटीएम खाली बैंक से भी रुपए निकालने की लिमिट तय

शहर के राष्ट्रीकृत और प्राइवेट बैंकों में नोटों की कमी के कारण लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। छह दिनों से...

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2018, 04:45 AM IST
छह दिन से शहर के सभी 18 एटीएम खाली बैंक से भी रुपए निकालने की लिमिट तय
शहर के राष्ट्रीकृत और प्राइवेट बैंकों में नोटों की कमी के कारण लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। छह दिनों से एटीएम खाली पड़े हैं। बैंकों ने भी विड्राल की 10 हजार तक की लिमिट तय कर दी है। मार्केट में रुपए ही नहीं आ रहे हैं। व्यापारी, कर्मचारी और आम लोग परेशान हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। बड़े नोटों के नाम पर बैंक में 200 और 100 के नोट ही बचे हैं। दो हजार और 500 के नोट बाजार से पूरी तरह गायब हो गए हैं। जो समस्या का मुख्य कारण है।

पाथाखेड़ा, सारनी और शोभापुर में ज्यादातर कर्मचारियों के अकाउंट एसबीआई, यूबीआई और सीबीआई में हैं। मगर, इन बैंकों में रुपए नहीं आने के कारण परेशानी हो रही है। पिछले छह दिनों से हालत खराब है। एसबीआई, यूबीआई ही नहीं सारे निजी बैंकों के एटीएम भी खाली हैं। रविवार तो स्थिति यह थी कि लोगों के पास सब्जी खरीदने तक रुपए नहीं थे।

विड्राल का दूसरा साधन नहीं होने के कारण लोगों को ज्यादा परेशानी आ रही है। सारनी, शोभापुर की मदर ब्रांच पाथाखेड़ा है। यहां पर जिले से बड़े नोटों की सप्लाई नहीं हो रही तो सारे एटीएम खाली पड़े हैं। मंगलवार को यदि तय समय पर डब्ल्यूसीएल कर्मचारियों का वेतन हो जाता है तो बैंकों में और ज्यादा परेशानी खड़ी हो जाएगी। सारनी बैंक मैनेजर अनिल स्वामी ने बताया पूरे देश में करंसी की कमी है। जिले भर में स्थिति ठीक नहीं है। काउंटर पर भीड़ होने से बैंक को भी परेशानी होती है, लेकिन बड़े नोट नहीं होने के कारण एटीएम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

कोल कामगारों के 80 फीसदी अकाउंट एसबीआई में

पाथाखेड़ा में 6,300 से ज्यादा कोयला कामगार हैं। इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा के बैंक अकाउंट पुराना बाजार स्थित मुख्य शाखा में हैं। यहां भी पांच-छह दिनों से नोटों की कमी है। मदर ब्रांच होने के कारण यहां के खातेधारकों के लिए कार्ड से स्वैप कर बैंक काउंटर से रुपए विड्राल करने की लिमिट 20 हजार रखी है, लेकिन एटीएम पूरी तरह खाली है। शोभापुर कॉलोनी के बैंक में स्टाफ की कमी है। यहां भी रुपए नहीं मिल रहे। लिमिट 10 हजार की है। सारनी में भी तय लिमिट 10 हजार कर रखी है। ऐसे में लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं।

नया सत्र शुरू, किराना लेने काे भी रुपए नहीं, ब्याजखोरों के मजे

स्कूलों का नया सत्र शुरू हो गया है। बैंकों में रुपए नहीं होने के कारण पालकों के पास सामान खरीदने के लिए रुपए नहीं हैं। ऐसी स्थिति में दिक्कतें आ रही हैं। बाजार में हर जगह डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था नहीं है। शोभापुर, पाथाखेड़ा, बगडोना और सारनी में कुल मिलाकर 18 से 20 एटीएम हैं। मगर, किसी में भी रुपए नहीं है। ऐसे में परेशानी हो रही है। अब तो लोगों उधारी में सामान खरीदना पड़ रहा है। पाथाखेड़ा में तो बिचौलिए मजे मार रहे हैं। यहां ब्याजखोरों का धंधा चल रहा है। 2 से 8 फीसदी ब्याज पर लोग रुपए लेने को मजबूर हैं।

सारनी। रुपए खत्म होने के बाद बैंक के बाहर ऐसे तकनीकी समस्या का बोर्ड लग जाता है।

परेशान करने का नया तरीका


बैंक प्रबंधन नहीं दे सका भरोसा


केवल परेशान कर रहा बैंक


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