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कबीर के दोहे-चौपाई ग्रंथों के पन्ने भरने के लिए नहीं बल्कि जीवन में वैज्ञानिक सुधार के लिए हैं: असंग देव महाराज

राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने कहा कबीर जी ने इसलिए दोहे और चौपाई लिखे ताकि जीवन सुधरे, वे उस जमाने में भी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 05:00 AM IST

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    राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने कहा कबीर जी ने इसलिए दोहे और चौपाई लिखे ताकि जीवन सुधरे, वे उस जमाने में भी वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दोहे चौपाई के एक-एक अक्षर और मात्रा को लिखते थे। ग्रंथों के पन्ने भरना उनका उद्देश्य नहीं था। लोग पढ़ें और अनुसरण कर जीवन सुधारें इसलिए कबीरदास ने इन्हें लिखा। यही कारण है आज लोग इनका अनुसरण कर रहे हैं। वे रामरख्यानी स्टेडियम में सुखद सत्संग कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    रामरख्यानी स्टेडियम में दो दिवसीय सुखद सत्संग कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार दोपहर 3 बजे हुई। इससे पहले असंग देव महाराज का स्वागत किया। समिति के ओपी सरोज, सुरेश लौवंशी और मधुकर पाटिल ने बताया सतपुड़ा पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया और एडीशनल चीफ इंजीनियर एसएम सोलापुर के नेतृत्व में उनका स्वागत किया। हजारों की संख्या में बैठे लोगों को उन्होंने दृष्टांतों के माध्यम से संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन बुधवार को होगा। समिति ने श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में उपस्थित होने का आग्रह किया।

    रामरख्यानी में सुखद सत्संग कार्यक्रम हुआ शुरू, चीफ इंजीनियर ने की अगुवाई, आज होगा समापन

    सत्संग सुनते श्रद्धालु इनसेट सत्संग सुनाते हुए असंग देव महाराज।

    सिलेंडर फोड़ो नहीं सरेंडर हो

    शादी के ससुराल में नवविवाहिता जाती है तो रौब जमाती है। कुछ मामलों में वे सिलेंडर फोड़ने जैसा काम करती है। पिता के घर आकर पछताती है और सरेंडर कर पति के साथ रहने की बात कहती है। असंगदेव महाराज ने कहा ऐसा सरेंडर पति के घर ही कर लेती तो इतनी बात नहीं बढ़ती।

    इंसान से बेहतर तो जानवर है

    इंसान को कई बातें बार-बार समझानी पड़ती हैं, लेकिन जानवर इससे कहीं ज्यादा समझदार हैं। एक बार चलना सिखा दो तो बैल भी बगैर मालिक के घर पहुंच जाते हैं। कुत्ता भी मालिक को सूंघकर पहचान लेता है। इसलिए गुरु की शरण में रहकर सदमार्ग पर चलें और जीवन सुधारें।

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