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शहर के अस्तित्व को बचाने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू

मजदूर दिवस से सारनी शहर के अस्तित्व को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई शुरू हो गई। उद्योग बचाओ, नगर बचाओ समिति ने जय...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 05:00 AM IST

शहर के अस्तित्व को बचाने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू
मजदूर दिवस से सारनी शहर के अस्तित्व को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई शुरू हो गई। उद्योग बचाओ, नगर बचाओ समिति ने जय स्तंभ चौराहे पर डेरा डाल दिया। यहां क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की। जब तक शहर में नई इकाइयां लगाने, नई खदानें खोलने, उद्योग क्षेत्र का विकास और तहसील का दर्जा नहीं मिलता तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

नगर बचाओ, उद्योग बचाओ संघर्ष समिति क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की है। जिसमें सारनी में 660 मेगावाट की दो यूनिट लाने, पाथाखेड़ा में स्वीकृत तवा- 3, गांधी ग्राम, शक्तिगढ़ में कोयला खदानें खोलने, सूखाढाना चोरढोंगरी में शीघ्र उद्योग स्थापित करने और सारनी को तहसील का दर्जा देने की मांग को लेकर यहां समिति सदस्य हड़ताल पर डटे हैं। क्षेत्र में व्याप्त बेरोजगारी दूर कर पलायन को रोकने की मांग भी समिति सदस्यों ने की। इस सभी प्रमुख मांगे को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल के पहले दिन मध्यप्रदेश विद्युत ठेका श्रमिक संघ के अध्यक्ष गंगाधर चढोकर, सचिव बबलू नर्रे, राकेश विश्वकर्मा, प्रमोद सिंह, सुरेंद्र हरसुले हड़ताल पर बैठे। जय स्तंभ चौक पर धरना आंदोलन में सुबह 9 बजे से हड़ताल पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के जागरूक लोग उपस्थित हुए। संयोजक डॉ. कृष्णा मोदी, राकेश महाले, रामा वाईकर, लक्ष्मण झरवडे, रामू पवार, मो. इलियास, विनोद जगताप, दीपक पाटील, देवमन लाल डेहरिया, संतोष देशमुख, अशोक पचोरिया, हरीश पटेल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

आज आप के कार्यकर्ता बैठेंगे हड़ताल पर: क्रमिक भूख हड़ताल के दूसरे दिन सामजिक कार्यकर्ता विशाल फोफसे, आम आदमी पार्टी के मनोहर चौरिया सिराज खान, डॉ. सुरेश भुमरकर, गजेंद्र जगदेव साथी हड़ताल पर बैठेंगे।

शहर के अस्तित्व को बचाने उद्योग बचाओ, नगर बचाओ समिति की भूख हड़ताल शुरू की।

ग्रामीण मजदूरों का पहली बार हुआ सम्मान, युवाओं ने बांटी मिठाइयां

सारनी|
ग्राम पंचायत छतरपुर के युवाओं ने मजदूर दिवस पर मजदूरों का सम्मान किया। पंचायत के पूर्व उपसरपंच दिलीप वरकडे ने बताया मजदूर दिवस पर असंगठित मजदूरों का सम्मान कर मिठाई बांटी। इस अवसर पर सुनिल सरयाम ने कहा ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को संगठित होने की जरूरत है। आज भी जागरूकता के अभाव में उन्हें सही पारिश्रमिक व सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्हें मासिक वेतन, महंगाई भत्ता, पेंशन एवं अन्य सुविधाएं अप्राप्त हैं। संगठित मजदूरों की दशा बेहतर होती है। कार्य के दौरान मृत्यु होने पर उन्हें विभाग की ओर से सुरक्षा प्रदान की जाती है।

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