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6 कॉलोनियों को किया वैध, वार्डवासियों को देना होगा 30 से 50 फीसदी विकास शुल्क

शहरी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सुविधाएं देने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 05:20 AM IST

6 कॉलोनियों को किया वैध, वार्डवासियों को देना होगा 30 से 50 फीसदी विकास शुल्क
शहरी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सुविधाएं देने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। शहर की 6 कॉलोनियों को शासन ने वैध कर दिया है। अब इसके लिए वार्डवासियों को 30 से 50 फीसदी विकास शुल्क चुकाना होगा। वहीं नपा और प्रशासन के पास ग्रामीण क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों को वैध करने का कोई प्लान नहीं है। इस सर्वे में नपा के पूरे इंजीनियर जुटे हैं। शहरी कॉलोनियों के सर्वे और प्रबंधन की सारी तैयारियां नपा को इस महीने के आखिरी तक पूरी करनी है।

राज्य शासन ने शहरी क्षेत्रों की अवैध कॉलोनियों को प्रबंधन में लेने के लिए कॉलोनियों के नियमों में फेरबदल भी किए हैं। शासन हर हाल में कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहता है। इसे लेकर शासन सख्त है और सतत मॉनीटरिंग के कारण जमीनी स्तर पर भी तेजी से काम हो रहा है। दरअसल, 31 दिसंबर के पूर्व तक स्थापित हो चुकी ऐसी कॉलोनियां जिसमें 10 फीसदी से ज्यादा निर्माण हो चुके हैं। अब ऐसी कॉलोनियों की खोज की जा रही है। नगर पालिका ने एई प्रियांश दुबे के नेतृत्व में उपयंत्री राहुल शर्मा, दीपक चौहान और कमलेश पटेल की एक टीम कॉलोनियों में जाकर स्थल पंचनामा तैयार कर रही है। यहां शहरी क्षेत्र की करीब सभी कॉलोनियों को प्रबंधन में लिया जा चुका है। इस पर काम भी शुरू हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की कॉलोनियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इन कॉलोनियों में जहां 70 फीसदी मकान बन चुके हैं वहां विकास के लिए कॉलोनी वासियों से 20 फीसदी और निकाय 80 फीसदी राशि व्यय करेगी। जबकि जहां इससे कम निर्माण हुआ है वहां दोनों का प्रतिशत 50-50 होगा।

सारनी। शहर के पाटाखेड़ा क्षेत्र में स्थित कॉलोनी का नगर पालिका ने सर्वे किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में शहर से दोगुनी कॉलोनियां, सारी अवैध

सारनी में शहरी क्षेत्र में जितनी कॉलोनियां नहीं हैं उससे कहीं ज्यादा कॉलोनियां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। मोरडोंगरी, बगडोना, सलैया और सूखाढाना में करीब एक दर्जन कॉलोनियां बनी हैं। लोगों ने प्लाट काटकर बेच दिए हैं, लेकिन विकास के नाम पर आधे अधूरे काम हुए हैं। हालांकि बगडोना में बालाजी विहार और साईंलीला कॉलोनी में काफी सुविधाएं मुहैया हैं, लेकिन शेष में काम नहीं किए। इससे लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसी कॉलोनियों के लिए फिलहाल कोई प्लान नहीं है। परेशानी यह है बगडोना में जो कॉलोनियां हैं वे शहर से सटी और गांव से दूर हैं, लेकिन हिस्सा सलैया पंचायत में आता है। ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण नपा की जरूरी सुविधाएं उन्हें नहीं मिल पाती हैं।

ये कॉलोनियां वैध घोषित हुईं

नाम खसरा एवं रकबा

बलराम व. बेचनराम, जीवन मिर्धा 238/40-1.619 (हवाई पट्टी के पास बगडोना)

डाॅ. एमएबी अंसारी व. गुलाम अंसारी 57/1-0.029, 57/2-0762 (महाराष्ट्र बैंक के सामने बगडोना)

प्रशांत पांसे व. महादेव पांसे 73/1-0.807, 73/4-0.809, 73/5-0.203, 73/6-0.202, 73/7-0.303, 72/4-0.102(गुरुकृपा नगर बगडोना)

सुनील व. जयभगवान अग्रवाल 28/1-1.615 (गैस एजेंसी के पास पाटाखेड़ा)

अवधेश सिंह व. सीताराम सिंह 159/2-0.552 (कॉलेज के पास बगडोना)

बीना जौजे रघुनाथ 238/1-0.404 (कॉलेज के पास बगडोना)

कॉलोनाइजर शुल्क नहीं देता है तो प्लाॅट बेचकर शासन करेगा वसूली

शासन शहरी क्षेत्र की हर अवैध कॉलोनी काे प्रबंधन में लेने की कार्रवाई कर रहा है। सारनी के सभी अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनी नियमितिकरण होने के बाद कॉलोनाइजर की शेष भूमि शासन हित में जब्त कर ली जाएगी। यदि वह अपना लाइसेंस, कॉलोनी की विकास अनुज्ञा अपर कलेक्टर एवं विहित प्राधिकारी के समक्ष नहीं देता है या कॉलोनी शुल्क नहीं देता है तो जब्त जमीन को बेचकर यह वसूल की जाएगी। उसे विकास शुल्क, पर्यवेक्षण शुल्क, आश्रय शुल्क देना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर उसके खिलाफ मप्र नगर पालिका अधिनियम 1961 के अधीन बने मप्र नगर पालिका कॉलोनाइजर एक्ट 15 (क) और (ग) के तहत दंडात्मक कार्रवाई तक के प्रावधान हैं।

अवैध काॅलोनीवासियों को कैसे देना होगा विकास शुल्क

यदि कॉलोनी के प्लाटों की संख्या में से 70 फीसदी हिस्से में निर्माण हो चुका है तो यहां 20 फीसदी ही विकास शुल्क देना होगा। यानी सर्वे के बाद शासन तय करता है संबंधित कॉलोनी पर 30 लाख विकास शुल्क बनता है तो इसका 20 फीसदी 6 लाख होगा। कॉलोनी में रहने वाले प्रत्येक लोगों की संख्या के आधार पर इसे वसूल किया जाएगा। यदि कॉलोनी में 50 लोग रहते हैं तो प्रत्येक से हिस्से में 12 हजार रुपए विकास शुल्क होगा। शेष 80 फीसदी राशि निकाय देगा। इसी तरह 70 फीसदी से कम हिस्से में निर्माण वाली कॉलोनी के लिए 50 फीसदी विकास शुल्क का नियम है।

कॉलोनाइजरों को नोटिस दिए हैं

कॉलोनियों को प्रबंधन में उनका सर्वे किया है। अधिकतर कॉलोनियों में सुविधाएं नहीं हैं। यहां के निर्माणों का प्रतिशत तय किया जा रहा है। इसी आधार पर विकास शुल्क तय होगा। नगर पालिका ने सभी कॉलोनाजरों को जरूरी कागजातों की पूर्ति के लिए नोटिस दिया है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें जुर्माना भरना होगा। पवन कुमार राय, सीएमओ, नगर पालिका सारनी

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