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आंबेडकर अनुयायी सारे शहर से झंडी, बैनर हटाने पर अड़े, पुलिस की मौजदूगी में प्रतिमा के पास से हटाए

शहर के शॉपिंग सेंटर में आंबेडकर प्रतिमा के आस-पास लगी भगवा झंडियां हटाने का विवाद गुरुवार को भी नपा और पुलिस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 13, 2018, 05:45 AM IST

शहर के शॉपिंग सेंटर में आंबेडकर प्रतिमा के आस-पास लगी भगवा झंडियां हटाने का विवाद गुरुवार को भी नपा और पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण दिनभर चला। आंबेडकर अनुयायियों ने इसका विरोध करते हुए रैली निकालकर एडीओपी पंकज दीक्षित को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन पर असहयोग करने का आरोप भी लगाया। जब विवाद बढ़ा तो हिंदू संगठनों की मौजूदगी में प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में अंबेडकर प्रतिमा के पास से भगवा झंडियां हटाईं। पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली सामने आई।

शहर में राम नवमी के जुलूस के लिए लगाए भगवा झंडे-झंडियां, बैनर, पोस्टर अभी तक नहीं हटे हैं। शॉपिंग सेंटर में डॉ. बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के पास भी भगवा झंडे-बैनर लगे हैं। इसको हटाने को लेकर ही दो दिनों से विवाद चल रहा है। शुक्रवार को आंबेडकर अनुयायी रैली निकालेंगे और शनिवार को अंबेडकर जयंती मनाई जाएगी। नियमानुसार प्रतिमा के आस-पास के हिस्से से पहले ही प्रशासन को उक्त भगवा झंडियां निकलवा देनी चाहिए थी। यहां आंबेडकर अनुयायी नीली झंडियां लगाएंगे। ऐन वक्त पर टीआई ने नगर पालिका को इन्हें निकलवाने के लिए पत्र लिखा। फिर नपा ने हिंदू संगठन के लोगों को पत्र जारी कर इन्हें निकालने का आग्रह किया। यानी सब कुछ आनन-फानन में हुआ। इससे विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। गुरुवार को हिंदू संगठनों के लोगों और पुलिस की मौजूदगी में नपा की स्काई लिफ्ट से भगवा झंडियां निकाली।

सहायक कलेक्टर ने ली बैठक बोले, समन्वय से करें काम

झंडियों को लेकर चले आ रहे विवाद के बीच जिला प्रशासन की ओर से सहायक कलेक्टर सिद्धार्थ जैन सारनी पहुंचे। नगर पालिका में एसडीएम श्रावण भंडारी, तहसीलदार अजय शर्मा, एसडीओपी पंकज दीक्षित, टीआई महेंद्र सिंह चौहान, नपा प्रभारी अधिकारी केके भावसार के साथ उन्होंने आंबेडकर अनुयायी राकेश महाले, प्रभु मसतकर, राहुल पाटि और हिंदू संगठन के सुनील भारद्वाज की बैठक ली और समन्वय बनाने को कहा। दोनों पक्ष इसके लिए राजी भी हुए।

झंडे, बैनर, पोस्टर हटाने जैसे छोटे से मामले को लेकर विवाद करना ठीक नहीं है। ऐसे मामले में इन्हें हटाने के सारे अधिकार नगर पालिका सीएमओ के पास हैं। उन्हें इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इसके निर्देश भी दिए हैं। सभी को मिलकर आपसी सामंजस्य से त्योहार और पर्व मनाने चाहिए। श्रावण कुमार भंडारी, एसडीएम, शाहपुर

एसडीओपी कार्यालय में आंबेडकर अनुयायी सुरक्षा की मांग के लिए ज्ञापन सौंपते हुए।

आंबेडकर अनुयायियों बोले- जयंती मनाने में हमें असामाजिक तत्वों का खतरा, प्रशासन दे सुरक्षा

गुरुवार को आंबेडकर अनुयायियों ने सुजाता महिला मंडल शोभापुर कॉलोनी साथ एसडीओपी कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा नपा क्षेत्र में जयंती को लेकर पताका, बैनर और फ्लैक्स लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं। मगर, उन्हें किसी से सहयोग नहीं मिल रहा है। संविधान में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी सहयोग नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जयंती समारोह में बाधा पहुंचाने की आशंका भी जताई। उन्होंने जयंती कार्यक्रम में पुलिस, प्रशासन से सुरक्षा भी मांगी। सुजाता महिला मंडल शोभापुर की अध्यक्ष कमला पाटिल, कोषाध्यक्ष निर्मला आठनेरे, कमला खातरकर, संगीता कापसे, लक्ष्मी चंदेलकर, भावना कापसे, सुषमा मेश्राम, घनश्याम आठनेरे, प्रभु मस्तकर, राकेश महाले, रविंद्र बरवड़े, राजू पाटिल, दीपक समेत अन्य लोग मौजूद थे।

एक सप्ताह से प्रतिमा स्थल की झंडियां हटाने की मांग की जा रही थी, प्रशासन ने देरी की। किसी का कोई विरोध नहीं न कोई विवाद है। बस प्रतिमा स्थल को सजाने के लिए खाली करने की मांग की थी। प्रशासन के साथ बैठक में सामंजस्य से त्योहार मनाने पर विचार हुआ है। हम सभी साथ हैं। राकेश महाले, अंबेडकर अनुयायी, सारनी

जरूरी स्थानों से झंडी निकालने में प्रशासन की पूरी मदद की है। शहर में रहने वाले सभी एक साथ हैं। विवाद की कोई बात नहीं है। मिलकर आंबेडकर जयंती मनाएंगे। वैचारिक मतभेद अलग बात हैं, लेकिन हम सभी एक हैं। सुनील भारद्वाज, प्रखंड संयोजक, बजरंग दल

क्या हैं प्रावधान... जाने कितना लगता है जुर्माना

मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत मप्र नगर पालिका प्रदर्शन अधिनियम 1988 की धारा 129 के विभिन्न खंडों में इस तरह के प्रदर्शन पर अनुमति जरूरी है। इसके अलावा संपत्ति विरूपण अधिनियम की अन्य धाराओं में भी ये गैर कानूनी है। ऐसे मामले में 500 रुपए तक के जुर्माने और जब्ती की कार्रवाई होती है। मगर, ऐसे कोई मामले में अभी तक कोई कार्रवाई ही नहीं हुई है।

शांति समिति की बैठक केवल खाना पूर्ति

शनिवार को ही इस सारे मुद्दे को लेकर पुलिस थाना सारनी में शांति समिति की बैठक हुई थी। मगर, बैठक पूरी तरह से एकतरफा रही। केवल अधिकारियों ने ही अपनी बात रखी, लोगों के सुझाव लिए ही नहीं। यदि शांति समिति की बैठक में ही बैनर, पोस्टर, झंडियां लगाने की बात को लेकर कोई निर्णय हो जाता तो विवाद की स्थिति नहीं बनती।

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