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खदानों के कमर्शियालाइजेशन का इंटक भी कर रही विरोध

कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ कोयला यूनियनें 16 अप्रैल को हड़ताल रखने के मूड में है। इसमें इंटक भी शामिल हो गई है। इंटक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 06:20 AM IST

खदानों के कमर्शियालाइजेशन का इंटक भी कर रही विरोध
कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ कोयला यूनियनें 16 अप्रैल को हड़ताल रखने के मूड में है। इसमें इंटक भी शामिल हो गई है। इंटक ने अलग से हड़ताल का नोटिस दिया है और अब वे इसे लेकर खदानों पर गेट मीटिंगें भी कर रहे हैं। डब्ल्यूसीएल की सारनी और शोभापुर खदान की दोनों पालियों में गेट मीटिंग हुईं। अन्य खदानों में आने वाले दिनों में भी मीटिंगें होंगी।

केंद्रीय महामंत्री एसक्यू जमा के हवाले से क्षेत्रीय अध्यक्ष आरके चिब ने बताया सरकार ने सभी कोयला क्षेत्र में व्यावसायिक खनन की अनुमति का निर्णय निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने और कोयला श्रमिकों के अधिकारों का हनन करने वाला है। इंटक ने 21 मार्च को ही सीआईएल में व्यावसायिक खनन का विरोध किया था। सरकार नहीं मानती है तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी संभव है। इंटक ने भी कोल मंत्रालय और प्रबंधन को 16 अप्रैल को एक दिवसीय हड़ताल का नोटिस दिया है।

क्षेत्रीय अध्यक्ष मो. आशिक खान और सुरेश पुरोहित के अनुसार निजी कंपनियां असुरक्षित उत्खनन कर मजदूरों का शोषण कर गुलामों की तरह कार्य कराएंगी। महामंत्री दामोदर मिश्रा ने कहा इंटक हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। खदानों पर हो रही गेट मीटिंग में इंटक के पदाधिकारी धनराज देशमुख, यासीन खान, भीमचंद सोलंकी, महेंद्र यादव, गोकुल गोहे, सुमित अग्रवाल, र|स्वरूप, खेमचंद जावरे, अशोक सेलकारी, ललित शर्मा आदि उपस्थित थे

सारनी। डब्ल्यूसीएल की सारनी माइन में गेट मीटिंग काे संबोधित करते इंटक पदाधिकारी।

निजीकरण पर उतारू है सरकार

आरके चीब ने कहा 1972 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था। निजीकरण का विरोध करने से बनी वर्तमान सरकार खुद निजीकरण पर उतारू है।आशिक खान, सुरेश पुरोहित ने कहा निजी कंपनियां असुरक्षित उत्खनन कर मजदूरों का शोषण कर गुलामों की तरह कार्य कराएगी। महामंत्री दामोदर मिश्रा ने कहा सरकार की कुटिल चालों में फंसकर प्रबंघन ने इंटक को सदस्यता से बाहर रखा था। अब वह अवरोध खत्म हो गया है। कामगार और श्रमिकों के हित की रक्षा के लिए संगठन पुन: ताकत से खड़ा है।

वेरीफिकेशन के लिए तैयार हो रही, रसीदें की जमा

प्रवक्ता जीसी चौरे ने बताया पाथाखेड़ा क्षेत्र में श्रमिक संगठनों का पुनः सदस्यता सत्यापन 13 अप्रैल से 21 अप्रैल तक होना है। पूर्व में इंटक और एचएमएस को छोड़कर एटक और बीएमएस का सत्यापन हो चुका था। उच्चतम न्यायालय के निर्णय और आदेश के बाद पूर्व में हुए सत्यापन को निरस्त करते हुए प्रबंधन फिर सदस्यता सत्यापन की तैयारी में जुटा है। पहले से दो संघों की रसीद जमा थी अब इंटक और एचएमएस की रसीदें भी जमा कराई गई हैं।

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Web Title: खदानों के कमर्शियालाइजेशन का इंटक भी कर रही विरोध
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