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राख प्रभावित गांवों में प्लांट करा रहा विकास इकाइयों से बेहतर उत्पादन के साथ हो रहे काम

सतपुड़ा पावर हाउस के राख डेम के लिए अपनी जमीनें दाव पर लगाने वाले ग्रामीणों को 5 साल बाद इसके सुखद परिणाम मिलने लगे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 30, 2018, 06:20 AM IST

राख प्रभावित गांवों में प्लांट करा रहा विकास इकाइयों से बेहतर उत्पादन के साथ हो रहे काम
सतपुड़ा पावर हाउस के राख डेम के लिए अपनी जमीनें दाव पर लगाने वाले ग्रामीणों को 5 साल बाद इसके सुखद परिणाम मिलने लगे हैं। राख प्रभावित गांवों में अब विकास शुरू हो गया। पावर हाउस की दो बड़ी इकाइयों से सतत उत्पादन के कारण कंपनी ने इसके लाभांश से गांवों का विकास शुरू किया है। खकराढाना की पुलिया जैसी मुख्य समस्या इस साल खत्म हो जाएगी। कंपनी ने यहां आरसीसी पुलिया का निर्माण किया है। गांव में पक्की सड़कें और पीने के लिए पूरा पानी है।

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने 2010 में नई इकाई नंबर 10 और 11 के राख बांध निर्माण के लिए ग्राम धसेड़ की 130 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहीत की थी। कंपनी की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत गांवों में विकास कार्य किए जाने हैं। शुरुआत में इकाइयों से कंपनी को फायदा नहीं मिला तो काम रुक गए थे, लेकिन लाभांश के कुछ हिस्से से धीरे-धीरे विकास शुरू हुआ। चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया, एडीशनल चीफ इंजीनियर एसके पेंडोर और अन्य अधिकारियों की पहल पर यहां गांव में कामों की शुरुआत की। पहले गांव में सोशल रिस्पांसबिलिटी पॉलीसी के तहत कंपनी ने धसेड़ में 600 मीटर आरसीसी सड़क, प्राइमरी स्कूल के पास के नाले पर पुलिया निर्माण और नलकूपों का खनन किया। मगर, अब इसमें तेजी आई है। गांव का एक हिस्सा बारिश के दिनों में पूरी तरह से कटा रहता था। इस खकराढाना को मेन रोड से जोड़ने के लिए 25 लाख रुपए से अधिक की पुलिया बनाई जा रही है। जो आधी बन गई है। इसके अलावा यहां माता मैया मंदिर के पास 8 लाख रुपए से अधिक की 300 मीटर सड़क बनाने का काम अंतिम चरणों में है।

इधर, शोभापुर गांव तक डब्ल्यूसीएल पानी पहुंचाने की कवायद में

वेस्टर्न काेल फील्ड्स की शोभापुर खदान के करीब बसे शोभापुर गांव में पानी की कमी से लोग परेशान हैं। डब्ल्यूसीएल के सीजीएम उदय ए. कावले ने इसे लेकर पहल की है। यहां नदी से पानी लाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया यहां भी सीएसआर फंड से काम कराए जाते हैं। तत्कालीन तौर पर पानी की व्यवस्था जरूरी है। क्षेत्र में रहने वाले सुनील सरियाम ने बताया पहली बार अधिकारियों ने गांव आकर सौगात दी है। यानी जल्द पानी पहुंच जाएगा।

सारनी। खकराढाना के बड़े नाले पर पुलिया के लिए कंपनी ने आरसीसी कॉलम बनाना शुरू।

रिसाइकिलिंग पानी से हो रही खेतों की सिंचाई

पुराने और नए राख बांध से यहां के कई लोग परेशान हैं। विपरीत स्थिति में वे यहां जीवन यापन कर रहे हैं। पहले तो यहां खेती के लिए पानी नहीं था, लेकिन रिसाइकल किए हुए पानी से यहां फसलें सींची जा रही है। राख वाले पानी से खेतों को नुकसान हो रहा था, लेकिन कंपनी ने सुधार कर साफ पानी खेतों तक पाइपों से पहुंचाने के इंतजाम किए हैं। अब गांव के लोगों ने घोघरी गांव के प्राइमरी स्कूल से लेकर चौकी मुख्य मार्ग होते हुए स्टेट हाईवे तक पक्की सड़क की मांग रखी है। इसके प्रस्ताव जबलपुर गए हैं। बरेलाढाना में आरसीसी सड़क प्रस्तावित है।

ग्रामीणों ने अपनी जमीन देकर बिजली उत्पादन में सहयोग दिया है। इसलिए गांव में विकास कार्य कराना कंपनी की जिम्मेदारी है। इकाई के लाभांश से यहां विकास कार्य तेज किए हैं। ग्रामीणों की ओर से आने वाली मांगों पर तत्काल कार्रवाई होती है। यहां के ग्रामीणों को पूरी सुविधाएं प्रदान करना मुख्य उद्देश्य है। शैलेंद्र कुमार वागद्रे, ईई, प्रभारी एश डेम सारनी

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