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कर्म करो और फल की चिंता मत करो: गुलाब महाराज

यादव समाज के आराध्य संत सिंगाजी महाराज की कथाओं से समाहित परचरी पुराण का आयोजन पाटाखेड़ा में किया। इसमें यादव समाज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 25, 2018, 07:50 AM IST

कर्म करो और फल की चिंता मत करो: गुलाब महाराज
यादव समाज के आराध्य संत सिंगाजी महाराज की कथाओं से समाहित परचरी पुराण का आयोजन पाटाखेड़ा में किया। इसमें यादव समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। भादू यादव ने इसका आयोजन किया था। इसमें संत सिंगाजी महाराज के जन्मोत्सव की कथा और उनके द्वारा लोक हित में किए गए कार्यों का वर्णन किया।

पाटाखेड़ा में परचरी पुराण 20 अप्रैल से शुरू हुआ था। पांच दिनों तक कथाओं और उपदेशों का दौर चला। हरदा से आए गुलाब महाराज ने बताया भगवान गोपाल कृष्ण से लेकर संत सिंगाजी महाराज तक सभी ने सेवाभावी कार्य करना सिखाया। यादव समाज सेवाभावी कार्यों के लिए जाना भी जाता है। इसलिए उन्हें इसे बरकरार रखना चाहिए। कर्म करो और फल की चिंता मत करो के आधार पर जीवन जीना चाहिए। कथा के दौरान पालने में बच्चे को झुलाकर संतश्री का जन्मोत्सव मनाया। दोपहर बाद हवन, पूजन और भंडारे के साथ कथा का समापन किया। कथा में काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

अायोजन

परचरी पुराण में मनाया संत सिंगाजी महाराज का जन्मोत्सव, भंडारे के साथ हुआ समापन

परचरी पुराण में संत सिंगाजी महाराज के जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई। उपस्थित लोग।

जाति से नहीं विचारों से महान बनता है मनुष्य: असंगदेव

मुलताई| जात-पात, ऊंच-नीच कुछ नहीं होता है। मनुष्य जाति से नहीं अपने नेक विचारों से महान बनता है। जिस मनुष्य का आचरण अच्छा नहीं होता वह कभी भी महान नहीं बन सकता है। अच्छे विचार ही हमें आगे बढ़ाते हैं। यह बात मंगलवार को भगतसिंह वार्ड में स्थित आनंद पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित सत्संग में राष्ट्रीय संत असंगदेव महाराज ने कही। उन्होंने कहा शराब पीने, भ्रष्ट लोगों के साथ रहने से आचरण बिगड़ता है। इसलिए हमेशा अच्छे लोगों की संगत करना चाहिए। उन्होंने कहा जिस घर में विवाद होते हैं वह घर नर्क बन जाता है। घर को स्वर्ग बनाने के लिए दान, मधुरवाणी, देवी-देवता का पूजन, साधु-संत की सेवा करना चाहिए। सत्संग से आचरण शुद्ध होता है। उन्होंने कहा सच्चाई के मार्ग पर चलकर ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति हमें दूसरों का आदर करना सीखाती है। हमें अपनी संस्कृति को कभी भूलाना नहीं चाहिए। संस्कृति ही हमारी पहचान है। उन्होंने कबीर गाथा पर भी प्रकाश डाला। आनंदराव वागद्रे, अनिल मानकर, प्रमोद बावने, राम वागद्रे, मंगल वागद्रे ने बताया सत्संग सुनने नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में शिष्य सत्संग सुनने पहुंचे थे।

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