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20 साल में 1 अप्रैल को कभी 37 डिग्री के पार नहीं गया पारा, इस साल 39.6 डिग्री

कम बारिश के कारण बने हालातों से इस साल गर्मी भी समय से पहले ही आ गई है। यही वजह है कि अप्रैल महीने की शुरुआत में ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:40 AM IST

20 साल में 1 अप्रैल को कभी 37 डिग्री के पार नहीं गया पारा, इस साल 39.6 डिग्री
कम बारिश के कारण बने हालातों से इस साल गर्मी भी समय से पहले ही आ गई है। यही वजह है कि अप्रैल महीने की शुरुआत में ही सूर्य तेज तप रहा है। यही वजह है कि जो पारा अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में 40 डिग्री तक पहुंचता था, उतना पारा इस बार अप्रैल महीने के पहले दिन ही पहुंच गया। 20 साल के मौसम विभाग के रिकार्ड में ऐसा कभी नहीं हुआ कि सीहोर का तापमान 38 डिग्री के पास गया हो। रविवार को अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। पिछले साल की अपेक्षा इस साल दिन के तापमान में सीधे 10 डिग्री का अंतर है। मौसम विभाग का मानना है कि गुजरात और राजस्थान की ओर से गर्म हवाएं आ रही हैं। इसलिए तापमान में भी अचानक बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले साल 1 अप्रैल को अधिकतम तापमान 29.5 और न्यूनतम तापमान 20.2 डिग्री रिकार्ड किया गया था। हर साल 20 अप्रैल के बाद तापमान 39 डिग्री को छूता है और अप्रैल महीने के आखिरी दिनों तक 40 डिग्री तक पहुंचता है।

पिछले साल की अपेक्षा इस साल दिन के तापमान में सीधे 10 डिग्री का अंतर

39.10

38.10

31 मार्च

(नोट : तापमान डिग्री सेल्सियस में, स्त्रोत : मौसम विभाग)

इस साल सबसे कम बारिश

पिछले कुछ सालों से लगातार बारिश कम होती जा रही है। पिछले साल मात्र 86 सेमी औसत बारिश रिकार्ड हुई थी। जबकि जिले की सामान्य औसत बारिश 121.1 सेमी मानी गई है। कम बारिश के कारण क्षेत्रभर के जल स्त्रोत सूख चुके हैं। इस कारण भी वातावरण में गर्मी बढ़ी है। इस साल फरवरी में फसलें भी कट गई।

गर्म हवा का असर

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की फ्रिक्वेंसी कम होने से ऐसी स्थिति बन रही है। गुजरात और राजस्थान की ओर से गर्म हवाएं प्रदेश में आ रही हैं। -डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर, मौसम विशेषज्ञ

36.50

36.50

29 मार्च

30 मार्च

एक सप्ताह में तापमान ऐसे बढ़ा

35.50

28 मार्च

35.00

26 मार्च

27 मार्च

अप्रैल के पहले दिन ही रविवार को दोपहर में सड़कें लगभग सूनी रहीं।

34.00

25 मार्च

गर्मी का यह असर

सेहत : लगातार बढ़ती गर्मी के कारण मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

पानी : गर्मी के कारण कुएं सूख चुके हैं और 80 फीसदी हैंडपंप भी दम तोड़ चुके हैं।

महंगाई : गर्मी के असर से साग-सब्जियों की पैदावार कम हो रही है इस महंगाई का असर है।

गर्मी बढ़ने की ये हैं वजह

पेड़-पौधों की अंधाधुन कटाई के कारण ग्लोबल वार्मिंग के असर के कारण।

जितनी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं उसके अनुपात में पेड़ लगाए नहीं जा रहे हैं।

लगातार बारिश कम होने के कारण वातावरण गर्म हो रहा है।

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