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जिले सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टरों की कमी ट्रामा सेंटर में नहीं है सर्जन, रेफर हो रहे मरीज

जिला अस्पताल को भले ही ट्रामा सेंटर के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया हो लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर आज भी स्थिति...

Danik Bhaskar

Mar 02, 2018, 05:25 AM IST
जिला अस्पताल को भले ही ट्रामा सेंटर के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया हो लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर आज भी स्थिति ठीक नहीं है। हालत यह है कि दिनोंदिन डॉक्टरों की कमी होती जा रही है। सेवा निवृत्ति के बाद डॉक्टरों की कमी के बाद अब मरीजों को इलाज कराने में काफी कठिनाई हो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का असर यह है कि लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति तब है जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 800 से 1000 लोग अपना इलाज कराने आते हैं।

जिला अस्पताल को नए ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया था। इसी तरह बच्चा वार्ड के लिए भी नया भवन मिल गया। इसके बाद भी सुविधाओं में शासन ने कोई इजाफा नहीं किया। हालांकि जिला अस्पताल प्रबंधन ने कई बार शासन को डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए लिखा लेकिन हुआ कुछ नहीं। सिविल सर्जन डॉ. एए कुरैशी ने बताया कि यह बात सही है कि डॉक्टरों के कई पद रिक्त पड़े हैं। हालांकि शासन को इन खाली पदों को भरने के लिए लिखा है।

कई रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के नहीं होने से मरीजों को परेशानी, बेड भी नहीं बढ़ाए गए

जिला अस्पताल में डाॅक्टरों की कमी के कारण मरीजों हो रही है परेशानी ।

दो मेडिकल स्पेशलिस्ट ही संभाल रहे व्यवस्था, एक बीमार होने से छुट्‌टी पर

जिला अस्पताल व ट्रामा सेंटर के लिए मेडिकल स्पेशलिस्ट का होना बहुत जरूरी होता है। इस समय तीन में से केवल दो ही एमडी डॉक्टर बचे हैं। इनमें एक डॉ. बीके चतुर्वेदी तो दूसरे डॉ. आरके वर्मा हैं। तीसरे डॉक्टर जेआर कनेरिया बीमार हैं जिस कारण वह अवकाश पर हैं।

दो शिशु रोग विशेषज्ञ, एक के अवकाश पर जाते ही दिक्कत

पिछले दिनों शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर सेवानिवृत हो गए। इसके बाद अब यहां पर दो ही डॉक्टर हैं। इनमें से कोई डॉक्टर अवकाश पर जाता है तो मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। बैरागढ़ खुमान के गोपीलाल पाटीदार कहते हैं कि पिछले सप्ताह भतीजे को लाए पर बाद में भोपाल ले जाना पड़ा

नाम ट्रामा सेंटर, गंभीर घायलों के लिए सर्जरी तक की नहीं व्यवस्था

कहने को तो यह ट्रामा सेंटर भी है लेकिन सर्जन की कमी बनी हुई है। जिला अस्पताल में क्लास वन शल्य क्रिया विशेषज्ञ डॉ. एए कुरैशी हैं। श्री कुरैशी इस समय सिविल सर्जन का काम देख रहे हैं। ऐसे में जो दूसरे सर्जन थे वह पिछले कुछ समय से अस्पताल में नहीं आ रहे हैं। चांदबड़ के लोकेंद्र ने बताया कि उसके पिता का हर्निया का आपरेशन होना था लेकिन डॉक्टर नहीं होने से उसे भोपाल जाना पड़ा।

400 बेड करने प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी

जिला अस्पताल में 200 पलंग स्वीकृत हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने 50 पलंग की अतिरिक्त व्यवस्था कर रखी है। पिछले दिनों अस्पताल को 400 बिस्तर का करने एक प्लान भी भेजा है। इसे अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।

कलेक्टर के कहने के बाद भी नहीं की पार्किंग की व्यवस्था

जिला अस्पताल में मरीजों के परिजनों के वाहनों के लिए पार्किंग की जगह नहीं है। पिछले दिनों कलेक्टर तरुण कुमार पिथोड़े ने जब जायजा लिया था तब भी उन्होंने अस्पताल के बाहर खड़े वाहनों को लेकर नाराजगी जताई थी। यहां पर अभी वाहनों को खड़ा कराने की व्यवस्था नहीं है।

नाक-कान और गला रोग के एक ही विशेषज्ञ, वे भी दिन भर सफाई कार्य देखते हैं

जिला अस्पताल में ईएनटी के एक ही डॉ. सुधीर श्रीवास्तव हैं। ये आरएमओ को काम भी देख रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक इन्हें जिला अस्पताल की साफ-सफाई को भी देखना होता है। ऐसे में नाक, कान और गला के मरीजों को परेशान होते हैं।

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