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2 मेडीसिन विशेषज्ञों में से 1 ने ली वीआरएस, स्त्री रोग की एक डॉक्टर, बच्चों के 6 में से सिर्फ 2 ही विशेषज्ञ

ट्रामा सेंटर के भवन में चल रहे जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज औसतन 1000 से 1200 मरीज इलाज कराने आते हैं। मरीजों की इतनी बड़ी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:20 AM IST

2 मेडीसिन विशेषज्ञों में से 1 ने ली वीआरएस, स्त्री रोग की एक डॉक्टर, बच्चों के 6 में से सिर्फ 2 ही विशेषज्ञ
ट्रामा सेंटर के भवन में चल रहे जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज औसतन 1000 से 1200 मरीज इलाज कराने आते हैं। मरीजों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद अस्पताल में आए दिन डॉक्टर कम होते जा रहे हैं। कहने को तो यह जिला मुख्यालय का अस्पताल है लेकिन मेडिकल विशेषज्ञ केवल एक ही बचा है। यही नहीं प्रसूताओं के आपरेशन के लिए भी एक ही सर्जिकल विशेषज्ञ हैं। इसी तरह स्त्री रोग विशेषज्ञ के तीन पदों में से केवल एक ही डॉक्टर हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ के 6 स्वीकृत पदों में से केवल 2 ही डॉक्टर बचे हैं।

प्रथम श्रेणी विशेषज्ञ 22 डॉक्टरों में से 10 ही बचे, 12 पद खाली

जिला अस्पताल में प्रथम श्रेणी विशेषज्ञ के 22 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। शेष 12 पद खाली पड़े हैं। सबसे अधिक मरीज मेडिकल विशेषज्ञ और स्त्री रोग से संबंधित होते हैं और इन्हीं विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। अस्पताल में दो मेडिकल विशेषज्ञ थे जिनमें डॉक्टर आरके वर्मा ही बचे हैं। इसी तरह सर्जिकल विशेषज्ञ के 2 पदों में से एक ही कार्यरत है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 3 पदों में एक डॉक्टर ही मौजूद हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ एसएनसीयू सहित 6 स्वीकृत पदों में से 2 ही हैं। 4 पद खाली हैं।

एक पलंग पर चार महिला मरीजों के होने से जब एक को स्लाइन लगने पर तीन को बैठे रहना पड़ता है

ये हैं बड़ी समस्याएं

कई दिनों से लिफ्ट खराब है। गंभीर मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में काफी कठिनाई हो रही है।

अस्पताल में पानी का संकट बना हुआ है। शौचालयों तक में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।

24 घंटे एक्स-रे और ब्लड बैंक की सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है।

स्टाफ की कमी के चलते पैथालॉजी में भी जांचें समय पर नहीं हो पा रही हैं।

आईसीयू वार्ड में एक कूलर है, एसी है ही नहीं।

एक्स-रे और ब्लड बैंक में लगा मिला ताला

रात की व्यवस्थाएं देखने के लिए अलग-अलग डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। बुधवार रात को डॉ. भरत आर्य को जिला अस्पताल का निरीक्षण करना था। वह रात एक बजे अस्पताल जब पहुंचे तो वहां पर एक्स-रे और ब्लड बैंक में ताला लटका था। मेडिकल वार्ड में मरीजों की शिकायत थी कि हर पलंग पर एक कूलर होना चाहिए। प्रसूती वार्ड के बाहर दो युवक बैठे थे जिनसे जब पूछताछ की तो वे भाग निकले। श्री आर्य ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।

ये 4 विशेषज्ञ डॉक्टर तो हैं ही नहीं

इस समय जिला अस्पताल में नेत्र रोग, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, दंतरोग, टीवी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं ही नहीं। जिला अस्पताल में इन मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. एए कुरैशी ने बताया कि यह बात सही है कि डॉक्टरों की कमी है। इसके लिए विभाग को पत्र लिखा गया है।

अस्पताल में 60 में से 57 पद खाली

श्रेणी स्वीकृत पद कार्यरत खाली

डॉक्टर 13 05 10

तृतीय श्रेणी 37 00 37

चतुर्थ श्रेणी 10 00 10

कुल योग 60 03 57

द्वितीय श्रेणी के भी 21 में से 7 डॉक्टर नहीं

जिला अस्पताल में सेकंड क्लास डॉक्टरों के स्वीकृत पद 21 हैं। इनमें से अभी केवल 14 ही हैं। शेष 7 पद खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है।

युवक की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, कहा- पर्चा नहीं बना तब तक उपचार नहीं किया

जिला अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा गया। परिजनों ने आरोप लगाया की पर्चा नहीं बना तब तक उपचार नहीं किया गया। ग्राम गोकलपुरा निवासी 30 वर्षीय अनीस खां पिता मासूम खां पेड़ काटने में गिरकर घायल हो गया था। उसके परिजन अल्ताफ खा ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर ने पहले पर्चा बनाने के बाद ही उपचार कराने की बात कही। परिजनों को पर्चा बनाने लगभग आधा घंटा बीत गया। जहां युवक की उपचार के अभाव में मौत हो गई।

इस तरह हो सकते हैं सुधार

जिला अस्पताल में बाहर से सर्जन लेडी डॉक्टर को बुलाया जा सकता है। ब्लड बैंक, एक्स-रे विभाग में यदि कर्मचारी कम हैं तो उन्हें भी संविदा या रोकस से रखा जा सकता है जिससे रात के समय मरीजों की जांच हो सके।

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