एक दमकल के भरोसे क्षेत्र के 100 गांव
गर्मी की दस्तक के साथ ही क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं भी होने लगी हैं। ऐसे मे तहसील क्षेत्र के 100 गांव एक दमकल के भरोसे हैं। ऐसे में एक से अधिक जगह पर आगजनी की घटनाएं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जावर तहसील को एक ओर दमकल की आवश्यकता है। इसकी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों की सुविधा तो है, लेकिन यहां पर ट्रैक्टर नहीं होने से शोपीस ही खड़े हुए हैं। ऐसे में आष्टा व सीहोर की दमकलों की सहायता लेना पड़ती है।
तहसील क्षेत्र होने के साथ ही 101 गांवों के लगे होने के बाद भी दमकल जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभाव बना हुआ है। इसके लिए नगर परिषद प्रस्ताव शासन को भेजता है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। यहां पर एक ही दमकल है। जिसे नगर परिषद द्वारा संचालित किया जा रहा है। तहसील क्षेत्र में कई गांव वन जंगल से भी लगे हुए हैं। तहसील क्षेत्र में दमकल की कमी के कारण क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं होने पर कई बार आष्टा, सीहोर से भी फायर ब्रिगेड बुलाकर सहारा लेना पड़ता है। हालांकि दूरी अधिक होने के कारण दोनों जगह की दमकल देरी से पहुंचती हैं। जब तक आग से सब खाक हो चुका होता है।
आगजनी की होने लगी शुरुआत: इस समय गेहूं की फसल सूखकर तैयार खड़ी हुई है। जिसमें आग का अधिक खतरा रहता है। पिछले दिनों तहसील के गांव अमरपुरा में किसान विश्राम सिंह के खलिहान में आग लगने से 15 गाड़ी गेहूं की फसल जल गई थी। हालांकि आग लगने की सूचना के बाद आष्टा, जावर से भी फायर बिग्रेड आग बुझाने पहुंची थी।
टैंकर हैं पर ट्रैक्टर का अभाव: इस समय नगर सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में फसल पककर तैयार हो चुकी है तो कहीं कटाई का कार्य भी चल रहा है। ऐसे में कहीं आगजनी की घटना घट जाती है तो पंचायतों के पास सांसद, विधायक निधि से टैंकर तो मिले हैं लेकिन उन्हें ले जाने के लिए ट्रैक्टर नहीं हंै। इस कारण आगजनी से किसानों का काफी नुकसान हो जाता है। इस संबंध में बमूलिया के सरपंच कृपाल सिंह ने बताया कि क्षेत्र की सभी पंचायतों में सांसद , विधायक निधि से टैंकर तो मिले हैं, लेकिन ट्रैक्टर नहीं होने की स्थिति में ग्रामीणों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
नगर परिषद सीएमओ सैयद मकसूद अली का कहना है कि अभी नगर परिषद के पास एक दमकल है ओर क्षेत्र काफी बड़ा है। ऐसी स्थिति में एक और फायर बिग्रेड की आवश्यकता को देखते हुए परिषद से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।