फसलों के लिए संकट भरे 48 घंटे
जिले की 3.94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी रबी फसल की बोवनी
इस बार मार्च में भी बादलों को डेरा है। इसके अलावा बार-बार अलग-अलग विक्षोभ के सक्रिय होने से कभी तेज धूप तो कभी बादल और हवा में नमी बनी हुई है। इस कारण से कम अवधि की फसलें भी देरी से पकी हैं। अब जब फसलें पककर तैयार हैं और कटाई शुरू हुई है तो मौसम एक बार फिर से करवट बदलने वाला है। दरअसल मौसम विभाग अगले 48 घंटे में तेज हवा के साथ बारिश और ओले गिरने की संभावना जता रहा है।
यदि ऐसा हुआ कि उपज की क्वालिटी बिगड़ जाएगी और प्रति क्विंटल 500 रुपए तक किसानों को नुकसान पहुंचेगा। रविवार की रात तेज ठंड के कारण न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। ऐसे में सोमवार को न्यूनतम तापमान 2 डिग्री लुढ़ककर 12.5 डिग्री दर्ज किया गया, वहीं बादलों के कारण दिन के अधिकतम तापमान में भी 2 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई और पारा 28.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आरएके कॉलेज के डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर ने बताया कि अगले 48 घंटे फसलों पर संकट के बादल मंडराएंगे। करीब 10 से 15 किमी की रफ्तार से हवा चलेंगी।
और इधर... होली आ गई लेकिन पलाश में फूल ही नहीं आए
बसंत ऋतु और फाल्गुन शुरू होते ही पतझड़ के साथ पलाश के पेड़ों पर टेसू फूलने लगते हैं। पूरे पेड़ पर पत्तों की बजाय सिर्फ केसरिया फूल ही नजर आते हैं। होली तक यह फूल पूरी बहार पर होते हैं, लेकिन इस साल पलाश में अब तक फूल नहीं आए। सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में लगे पलाश के पेड़ पूरे हरे भरे हैं और अब तक इनके पत्ते भी नहीं गिरे। मौसम विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग का असर बता रहे हैं। डॉ. तोमर के अनुसार टेसू फूलने के लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री से बढ़कर 34 डिग्री तक पहुंचना चाहिए लेकिन इस बार पारा 31 डिग्री से अधिक नहीं पहुंचा। वहीं हवा में नमी के कारण तेज गर्मी नहीं पड़ने से पेड़ों पर टेसू के फूल दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस साल मार्च के दूसरे सप्ताह में भी मौसम ठंडा बना हुआ है।
किसानों को बरतना होगी सावधानी: मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर के अनुसार फसलों की सिंचाई न करें। जो फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं उन्हें जल्दी से निकालने की कोशिश करें। तेज हवा का दौर रहेगा। ऐसे में फलदार पौधों को टूटने तथा गिरने से बचाने के लिए लकड़ी का सहारा दें।
3 लाख 94 हजार हेक्टेयर का रकबा, 10% ही कटाई
जिले में इस बार 3 लाख 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं-चना और अन्य फसलों की बोवनी हुई थी। इस बार फसलों के अनुकूल मौसम होने से उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है। चांदबड़ के किसान मनोहर मेवाड़ा का कहना है कि करीब 10 साल बाद इस बार फसल अच्छी आई है। पर्याप्त पानी होने के कारण सिंचाई भी समय पर कर सके और फसलों को पाले से नुकसान भी नहीं हुआ। अभी फसल पक चुकी हैं, ऐसे में यदि बारिश होती है तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी।
बदलते मौसम से...सबसे ज्यादा नुकसान शरबती में
ओलावृष्टि या फिर बारिश से फसलों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ता है। बारिश और ओलों से फसल काली पड़ जाती है और दागी हो जाती है। चमक भी प्रभावित होती है। इसलिए उपज के कम दाम मिलते हैं। जब भी ओले गिरते हैं तो फलियां नीचे गिर जाती हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ता है। ओले और बारिश से गेहूं की चमक पर प्रभाव पड़ेगा। सबसे ज्यादा नुकसान शरबती गेहूं को हो सकता है। इसकी कीमत दाने की चमक पर निर्भर करती है।
खेत में खड़ी और कट चुकी, दोनों फसलों को नुकसान
कृषि के जानकार बताते हैं कि इस बार फसलों की बोवनी देरी से हुई है। ऐसे में जो फसलें खेत में खड़ी हैं वे तेज हवाओं के साथ बारिश होने से खेतों में गिर जाएंगी। जिससे उत्पादन पर फर्क पड़ेगा। वहीं जो फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं उनकी चमक प्रभावित हो जाएगी। ऐसे में किसानों को उपज के करीब 500 रुपए तक कम दाम मिल पाएंगे। आने वाले दिनों में हवा की दिशा लगातार बदलेगी। ऐसे में बारिश और ओलों से फसलों को भारी नुकसान होगा।
बादल छाने से दिन का पारा गिरा, तेज हवा के साथ होगी बारिश, ओले गिरने के आसार
अगर बारिश हुई तो गेहूं दागी हो जाएगा, 500 रुपए तक गिर जाएंगे दाम, शरबती की चमक भी फीकी होगी