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शिक्षक के स्थानांतरण से नाराज बच्चों ने स्कूल में जड़ा ताला

Sehore News - कहा- यदि शिक्षक की वापसी नहीं हुई तो छोड़ देंगे स्कूल जाना अभी तक शिक्षकों के द्वारा पढ़ाने के दौरान की जाने...

Feb 15, 2020, 08:35 AM IST
Nasrullaganj News - mp news angry children locked in school due to transfer of teacher

कहा- यदि शिक्षक की वापसी नहीं हुई तो छोड़ देंगे स्कूल जाना

अभी तक शिक्षकों के द्वारा पढ़ाने के दौरान की जाने वाली लापरवाही के चलते उन्हें संस्था से हटाने को लेकर बच्चों एवं ग्रामीणों द्वारा ज्ञापन दिया जाता था, लेकिन एक शिक्षक का स्थानांतरण उसके मूल स्थान पर कर दिया गया तो यह बात ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों को नागबार गुजरी और उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से शिक्षक का स्थानांतरण रोकने की मांग की। वहीं इस मामले को यदि शीघ्र ही संज्ञान नहीं लिया जाता है तो तत्काल बच्चों सहित धरने पर बैठने की चेतावनी भी प्रशासन को दी गई

नाहर खेड़ा में पदस्थ रहे शिक्षक सूरज सिंह पंवार के द्वारा बच्चों एवं पालकों के बीच अपनी शिक्षा की शैली एवं मेहनत के बल पर एसी पेठ बनाई कि उनका मूल पद पर स्थानांतरण होने के बाद ग्रामीण एवं स्कूली बच्चे उनके पक्ष में सड़क पर आने को तैयार है। जानकारी के अनुसार 6 वर्षों से क्षेत्र की प्राथमिक शाला नाहर खेड़ा में शिक्षक सूरज सिंह पंवार पदस्थ थे। पिछले दिनों उनका अटैचमेंट यहां से समाप्त कर हाथी घाट में मूल पदस्थापना पर उनका स्थानांतरण कर दिया गया। शिक्षक ने अपना स्थानांतरण होने पर संबंधित संस्था में जाकर जॉइनिंग ले ली। जब यह बात ग्रामीणों एवं बच्चों को पता लगी तो वह स्थानांतरण रुकवाने के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे।

स्थानांतरण नहीं रुका तो हम नहीं जाएंगे स्कूल : तहसील कार्यालय में मौजूद अधिकारियों को चर्चा के दौरान बच्चों ने कहा कि झूठी शिकायत के आधार पर हमारे शिक्षक का स्थानांतरण कर दिया गया है जो पूरी तरह गलत है। इसलिए तत्काल इस स्थानांतरण को रोककर वापस हमारे शिक्षक को शाला में पहुंचाया जाए। इसके बाद भी यदि अधिकारी नहीं सुनते हैं तो हम स्कूल जाना ही छोड़ देंगे। नाहर खेड़ा के प्राथमिक माध्यमिक शाला में पदस्थ अफरोज खान, सनिया खान, सुनील मीणा, सतीश धुर्वे ने बताया कि हमारे शिक्षक सूरज सिंह पंवार के द्वारा वर्ष 2014 में हमारी संस्था को ज्वाइन किया गया था। उस समय गांव का कोई भी बच्चा सरकारी स्कूल में जाने को तैयार नहीं था। तब उन्होंने हमारे पालकों के बीच आकर कहा था कि आप अपने बच्चों को स्कूल भेजो उन्हें यदि अच्छा लगे तो पढ़ाना नहीं तो आपके लिए निजी शिक्षण संस्थाओं के द्वार खुले हुए हैं। शिक्षक की मेहनत के बल पर ही वर्ष 2017-18 में संस्था ने स्वच्छता रैंकिंग में 96 अंक प्राप्त किए थे। वहीं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी 4 बच्चों का चयन हुआ था।

नहीं तो बैठेंगे धरने पर : ग्रामीणों एवं बच्चों के द्वारा ज्ञापन के माध्यम से स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि उनके शिक्षक की वापसी संस्था में नहीं की जाती है तो वह पूरे परिवार के साथ धरने पर बैठेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

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