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तहसील होने के बाद भी नगर को नहीं मिली खेल मैदान की सौगात

Sehore News - भास्कर संवाददाता. आष्टा/जावर शासन हर साल खेल को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रहा है। जबकि तहसील बनने के...

Oct 13, 2019, 06:31 AM IST
भास्कर संवाददाता. आष्टा/जावर

शासन हर साल खेल को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रहा है। जबकि तहसील बनने के बाद भी यहां पर सार्वजनिक खेल मैदान की सौगात नगर के खिलाडिय़ों को नहीं मिल सकी है। इसके अलावा नगर सहित अंचल में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के चलते बच्चे खेलों से वंचित होते जा रहे हैं। कई जगह स्कूल मैदान गड्ढों व कीचड़ में तब्दील हो चुके हैं। इस कारण खिलाडिय़ों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह आष्टा तहसील के कई बड़े गांव अभी तक मैदान विहीन हैं।

नगर में एक भी सार्वजनिक खेल मैदान नहीं है। जो हायर सेकंडरी स्कूल का मैदान है वह उपेक्षा का शिकार हो रहा है। जिसमें लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है, लेकिन जो बचा है उसमें गाजर घास व गड्ढों तथा कीचड़ में तब्दील हो चुका है। मैदान के कुछ हिस्सों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया गया है।

शिक्षा के साथ ही खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार व शिक्षा विभाग हर साल लाखों रुपए खर्च कर स्कूलों को सभी तरह की सुविधा व सामग्री उपलब्ध करवाता है। उसके नुमाइंदे की अनदेखी के चलते छात्रों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। स्कूलों में व्यवस्थित मैदान नहीं होने से बच्चे लंच में अभ्यास नहीं कर पाते हैं। इसी तरह कुछ स्कू ल के मैदान में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण होने से वह सिमटकर संकरे हो गए हैं। इससे छात्रों को ठीक से खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब नगर के खेल मैदानों की यह हालत है तो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या होंगे।

अतिरिक्त कक्ष से संकरा हुआ मैदान: नगर के वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नगर के शासकीय प्राथमिक शाला के खेल मैदान में करीब दस साल पहले अतिरिक्त कक्ष का निर्माण करवाया था। जिसमें आज तक कक्षाएं नहीं लगी हैं ओर वह कंडम हो गए हैं। इस कारण खेल मैदान संकरा हो गया है। मैदान की जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण भी कर रखा है। साथ ही खेल मैदान पर गंदगी भी कर जाते हंै। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी इस मैदान पर प्रेक्टिस भी नहीं कर पाते हैं।

आष्टा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधे-अधूरे पड़े हैं खेल मैदान

नगर में स्कूल के खेल मैदान की बदहाली से खिलाड़यों को हो परेशानी।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हालत खराब

ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय स्कूल के मैदानों के इससे भी बुरे हाल हैं। कई मैदान की जमीन पर अतिक्रमण कर फसल बोई जा रही है तो कहीं गंदगी डाली जा रही है। जिम्मेदार भी निरीक्षण के दौरान इस तरफ ध्यान नहीं देते हंै।

तहसील होने के बाद भी खेल मैदान नहीं

तहसील मुख्यालय पर एक भी सुव्यवस्थित खेल मैदान नहीं होने के कारण नगर की खेल प्रतिभाओं को खेल प्रेक्टिस करने में परेशानी आती है। इसमें कहीं न कहीं स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सबसे ज्यादा नजर आ रही है।

दिए जाएंगे निर्देश


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