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किसानों को नहीं मिल रहा यूरिया, 1 हफ्ते बाद बगैर खाद डाले ही करने लगे सिंचाई

Sehore News - भास्कर संवाददाता| नसरुल्लागंज क्षेत्र के किसान प्रशासन के आश्वासन के एक सप्ताह बाद भी यूरिया नहीं मिल रहा है।...

Dec 04, 2019, 09:47 AM IST
भास्कर संवाददाता| नसरुल्लागंज

क्षेत्र के किसान प्रशासन के आश्वासन के एक सप्ताह बाद भी यूरिया नहीं मिल रहा है। जिससे की चिंतित नजर आ रहे हैं। इससे पहले खरीफ फसल में किसानों को बारिश अधिक होने के कारण काफी नुकसान हुआ था। किसानों ने यूरिया की कमी के चलते पहले ही एक सप्ताह सिंचाई के लिए देरी कर ली है, लेकिन यूरिया की किल्लत दूर नहीं होती दिख रही है। इसलिए किसान मजबूरी में बिना यूरिया के ही सिंचाई कर रहे हैं। जिससे सिंचाई में ज्यादा विलंब न हो। अब किसान के सामने संकट इस बात का है कि किसान ने खेतों में सिंचाई तो शुरू कर दी है परंतु जो खाद इस समय फसलों को मिलना था वह फसलों में नहीं पहुंचने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। ऐसे में अब किसान को आगामी समय में फसल के उत्पादन को लेकर होने वाली समस्या को दूर करना होगा जिससे वह समय पर अच्छा उत्पादन ले सकें।

बारिश से खराब हुई थी खरीफ की फसल : किसानों को जब भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है तो वह शासन प्रशासन की ओर आशा भरी निगाहों से देखते हैं। इस बार भी किसानों को खरीफ और रबी फसल का सीजन दोनों में उत्पादन लेने में मशक्कत का सामना करना पड़ा है। खरीफ सीजन में अधिक बारिश से सोयाबीन फसल प्रभावित हुई। ऐसे में अब किसानों की सारी उम्मीद रबी फसल पर आ टिकी थी। किसानों ने रबी फसल की तैयारी में जुटकर पलेवा के बाद बोवनी भी कर दी और पहले सिंचाई का समय आ गया लेकिन यूरिया खाद नहीं मिलने से एक बार फिर किसान शासन प्रशासन की और टकटकी लगाए बैठा है।

इंतजार के बाद बिना खाद के शुरू की सिंचाई

प्रशासन ने जब किसानों को यूरिया उपलब्ध नहीं करा पाया तो किसानों ने गेहूं फसल में सिंचाई का कार्य बिना खाद डाले ही शुरू कर दिया है। जिससे खाद की कमी से जो भी असर पड़े वह ठीक है, लेकिन पानी की कमी से उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े। क्योंकि किसान पहले ही प्रशासन के आश्वासन के चलते पहली सिंचाई में एक सप्ताह लेट हो चुके हैं और इसका सीधा असर कटाई के समय देखने को मिलेगा।

रबी सीजन में 500 मीट्रिक टन की है आवश्यकता

रबी सीजन के पहले पर्याप्त खाद का भंडारण होने की बात कहने वाले प्रशासन को खेती में लगने वाले खाद की जमीनी हकीकत पता ही नहीं थी और इसी का कारण रहा कि किसान को कितना खाद लगेगा इसकी डिमांड सही तरीके से नहीं भेजी गई। अब अंतिम समय में शासन से 500 मैट्रिक टन यूरिया खाद की डिमांड की जा रही है जो इस समय शासन के बूते की बात नहीं है।

अतिवृष्टि के कारण खरीफ फसल में किसानों को हुआ था काफी नुकसान

क्षेत्र के किसान यूरिया खाद नहीं मिलने के कारण परेशान हो रहे हैं।

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