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नरवाई जलाने की बजाय जैविक खाद बनाएं किसान

एक वर्ष पहले
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सीहोर | कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि गेहूं की फसल काटने के बाद बचे हुए अवशेष (नरवाई) को नहीं जलाए। नरवाई को जलाने की बजह उससे जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट खाद बना सकते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी। कृषि विभाग के उपसंचालक एसएस राजपूत ने बताया कि नरवाई जलाने से खेतों में अग्नि दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है। वहीं मिट्टी की उर्वरकता पर भी विपरीत असर पड़ता है। इसके साथ ही धुएं से कार्बन डाईऑक्साइड से तापक्रम बढ़ता है। वायु प्रदूषण भी होता है। मिट्टी की उर्वरा परत लगभग 6 इंच की ऊपरी सतह पर ही होती है। इसमें खेती के लिए लाभदायक जीवाणु व्याप्त रहते हैं। नरवाई जलाने से यह नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को नुकसान होता है। नरवाई जलाने की बजाए यदि फसल अवशेषों और डट्ठलों को एकत्रित कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप, वर्मी कंपोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाए तो यह बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद बना सकते हैं।
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