पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Ashta News Mp News Followed Like A Death Hunter In Time Do Religion Meditation Penance

मृत्यु शिकारी की तरह पीछे पड़ी है समय रहते धर्म, ध्यान, तपस्या करें

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

मृत्यु शिकारी की तरह पीछा कर रही है। हम समय रहते धर्म, ध्यान, तपस्या कर लें। कितना भी बड़ा वैभव वाला व्यक्ति हो लेकिन वह अमर नहीं हो सकता। चाहे सिकंदर को देख लो या लंकापति रावण या फिर दुर्याेधन को। सिकंदर जैसे व्यक्ति ने सारी दुनिया को जीत लिया था। अपार धन-संपदा थी, लेकिन उसका अंत समय भी किसी से छुपा हुआ नहीं है।

ये बातें आचार्य जितर|सागर सूरीश्वर महाराज ने नगर प्रवेश के बाद श्री महावीर श्वेतांबर जैन मंदिर गंज के उपाश्रय में आशीर्वचन के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति यह मान रहा है कि मैं अमर हूं, लेकिन मौत एक न एक दिन आना है। चौराहे पर खड़ा होकर कहता है कि बेचारा चला गया। अर्थी निकलने पर कि कोई व्यक्ति चला गया। वह यह नहीं सोचता है कि मुझे भी एक दिन इसी प्रकार जाना है। मौत का कोई भरोसा नहीं है। हिंदुस्तान का दुर्भाग्य कि आदमी सब कुछ समझता और जानता है लेकिन अमल नहीं करता है। जो वन में गए वह बन गए। चाहे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को देख लो या भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर तक को। उन्होंने वन में कठिन तपस्या की तो आज जीवन मरण से उन्हें मुक्ति मिल गई।

आचार्यश्री महाराज ने आगे कहा कि आप लोग शहद की मक्खी की तरह इस जिंदगी से चिपके हुए हैं। व्यक्ति का जीवन वनों से बनता है, महलों में रंग और राग रहता है। इसलिए तुम जैसे बेईमान दुनिया में नहीं। तुम बनिए हैं मैं तुम्हारा गुरु हूं। लोगों के पास जीवन का लक्ष्य नहीं है। मोक्ष सभी जाना चाहते हैं लेकिन मोक्ष मार्ग पर चलना नहीं चाहते। आचार्य जितर|सागर सूरीश्वर महाराज ने कहा कि इस कलयुग में वृद्धावस्था में बच्चे अपने माता-पिता को घर में रखना नहीं चाहते, जीवन के उन्नत लक्ष्य बनाना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि धर्म, आराधना करने से मोक्ष नहीं, आज तक धर्म आराधना से मोक्ष नहीं मिला है और आगे भी नहीं मिलेगा, बल्कि पापों के त्याग से मोक्ष मिलेगा। घर पर रहकर धर्म आराधना पर एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या घर गृहस्थी में रहकर मोक्ष की प्राप्ति नहीं की जा सकती है। आचार्य जितर|सागर सूरीश्वर महाराज ने कहा कि आष्टा से मेरा नाता जुड़ा है और इस नाते को आप बनाए रखें।

गाजे-बाजे के साथ हुआ नगर प्रवेश : आचार्य भगवंत जितर|सागर सूरीश्वर महाराज का नगर प्रवेश का जुलूस श्री नेमिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर किला से शुरु हुआ जो नगर के प्रमुख मार्गाें से होता हुआ कन्नौद रोड दादाबाड़ी पर पहुंचा। जगह-जगह श्रावक-श्राविकाओं ने ग्वली कर आचार्यश्री की आराधना की। इस अवसर पर समाज की विभिन्न महिला मंडल की महिलाएं अपने अपने मंडल के गणवेश में आकर्षण का केंद्र थी, वही दीक्षार्थी बहन चंचल सुराणा समाज की महिलाओं के साथ आचार्यश्री के इस नगर प्रवेश के जुलूस में नृत्य करते हुए चल रही थी।

खबरें और भी हैं...