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खुद के पैसे से घायल गोवंश का गोसेवक करते हैं इलाज
जिलेभर में आवारा मवेशियों का सड़कों पर जमावड़ा रहता है। बीच सड़क पर बैठे रहने से येे अक्सर हादसे का भी शिकार होते हैं। इन्हीं के उपचार का जिम्मा जिले के 425 गो-सेवकों ने लिया जो हर माह पैसा जुटाकर घायल पशुओं का उपचार करते हैं। इसके बाद इन पशुओं को जिले की 19 गो-शालाओं में भेज दिया जाता है। विश्व हिंदू परिषद बजरंगदल के बैनर तले जिलेभर में 425 गो-सेवक काम का रहे हैं। इनका सेवाभाव गोवंश के लिए इतना ही हर महीने स्वयं के खर्च से कटौती कर पशुओं के उपचार के लिए राशि एकत्रित करते हैं। इसके बाद जिलेभर में घायल पशुओं का उपचार करते हैं।
3 साल से ज्यादा समय से कर रहे सेवा : जिला गोरक्षा प्रमुख जीतेंद्र नरोलिया ने बताया कि पिछले तीन साल से ज्यादा समय से सड़क हादसों में घायल पशुओं की सेवा करते आ रहे हैं। घायल गोवंश के उपचार के लिए हर महीने राशि एकत्रित कर रहे हैं। इसके अलावा जनसहयोग के लिए जिले के 32 प्रतिष्ठानों पर दानपात्र रखे हैं। यहां से जो राशि प्राप्त होती है। उस राशि का उपयोग संबंधित क्षेत्र के गोवंश पर ही खर्च की जाती है। साथ ही क्षेत्र के आवारा मवेशियों के बीमार, पीड़ित और घायल गोवंश का उपचार किया जा रहा है।
सड़कों पर जमावड़ा हुआ कम : पिछले करीब 8 महीनों में कई सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें सबसे अधिक सड़क हादसे सड़कों पर विचरण कर रहे आवारा मवेशियों के जमावड़े के कारण होते हैं। बारिश के दिनों में सबसे अधिक आवारा मवेशी सड़कों पर बैठे रहते थे। इस बीच कई पशु दुर्घटना का शिकार हुए हैं। गो-सेवकों ने बीमार, पीड़ित और दुर्घटना में घायल पशुओं का उपचार कर उन्हें गो शालाअों में छोड़ा है। जीतेंद्र नरोलिया ने बताया कि प्रतिदिन औसत 5 से 8 गोवंश का उपचार कर रहे हैं। इन गोसेवकों में डॉक्टर भी शामिल हैं।
हादसों में घायल औ बीमार गोवंश के इलाज करते हैं गाेसेवक।
पानी के लिए रखे जलपात्र
जिलेभर में गोवंश के पीने के पानी के लिए 30 बड़े और 95 छोटे जलपात्र प्रमुख स्थानों पर रखे गए हैं। रात के समय पशु दुर्घटना का शिकार न हो ऐसे करीब 2200 से अधिक पशुओं के सींग पर रेडियम लगाए गए हैं। गो-पालकों को कम से कम एक गोवंश रखने की अपील की गई है।