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साधु संतों की सेवा मनुष्य भव से तार देगी: आदर्शरत्न
तत्वरुचि श्रीजी का हुआ नगर आगमन
धर्म के बीज पल्लवित 54 साल पहले आचार्य नवर| सागरजी महाराज ने यहां पर किए थे। लोग उस समय जैन संत आदि को इतना नहीं जानते थे। आष्टा का नाम संसारी नाम भावना धाड़ीवाल जो कि अब तत्व रुचि साध्वी हैं उन्होंने किया है। न केवल नाम गौरवान्वित किया अपितु नगर को गौरवशाली भी बनाया है। धर्म की भावना को खूब प्रज्वलित करना जैन वाने को जहां भी देखें उनकी वंदना करें। प्रभु का भेष से हर व्यक्ति अर्थात किसी भी पंथ दिगंबर, श्वेतांबर मुनि व साध्वी गण दिखे तो उन्हें प्रणाम अवश्य करें। प्रभु ने पंच परमेष्ठी का नाम दिया है।
यह बातें नगर प्रवेश के पश्चात अक्षत महाराज ने डॉक्टर प्रकाश कोचर के निवास पर आशीष वचन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य लेकर चलें भाव को निर्मल रखें। सभी साधु संतों की सेवा करें यह सेवा आपको मनुष्य भव से तार देगी। अपने जीवन को धर्म के पथ पर लेकर चले। वहीं गणिवर्य आदर्श र| सागर महाराज ने अपने आशीष वचन में कहा कि हमारे गुरु नवर| सागर महाराज ने बहुत कुछ ज्ञान दिया है तथा धर्म के पथ पर चलने की प्रेरणा दी है। आप सभी धर्म के पथ पर चलकर अपने इस मनुष्य जीवन को सार्थक करें। इस नगर की बेटी जो आज हमारे साथ तत्व रुचि के रूप में है उसने सबसे पहले दीक्षा ली थी और अब नगर की दूसरी बेटी कमल संगीता सुराणा की बिटिया चंचल सुराणा 19 मार्च को दीक्षा के पथ पर अग्रसर होकर श्वेतांबर जैन साध्वी बनने जा रही हंै। दीक्षा दिलाने के लिए जहां आचार्य भगवंत जितर| सागर सूरीश्वर जी महाराज अपने संघ के साथ पधार चुके हैं। वहीं हम आज आए हैं। गणिवर्य आदर्शर| सागरजी महाराज, साध्वी तत्वरुचि श्रीजी, पदमलता श्रीजी, अमितप्रज्ञा श्रीजी, पूर्णलता श्रीजी आदि ठाणा 9 को समाज जनों ने पार्वती नदी के पुल से अगवानी कर नगर के प्रमुख मार्गों से जुलूस के रूप में सुभाष नगर पानी की टंकी के समीप डॉ. प्रकाश कोचर के निवास पर पहुंचे। इन सभी साधु-साध्वी भगवंतों की अगवानी श्वेतांबर जैन श्रीसंघ सहित नगरवासियों ने की। विदित रहे कि 2 वर्ष पहले तत्वरुचि श्रीजी जोकि नगर की बेटी है और उन्होंने दीक्षा लेकर संयम के पथ पर अग्रसर हुई थीं। वह भी नगर में दीक्षा के पश्चात पहली बार पधारी हैं।