मोक्ष कल्याणक मनाया, अपूर्वमति माताजी ने ब्रह्मचर्य धर्म की बताई महत्ता

Sehore News - मोक्ष कल्याणक मनाया, अपूर्वमति माताजी ने ब्रह्मचर्य धर्म की बताई महत्ता भास्कर संवाददाता | आष्टा पार्श्वनाथ...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:42 AM IST
Ashta News - mp news moksha kalyanak celebrated apoorvamati mataji told the importance of brahmacharya religion
मोक्ष कल्याणक मनाया, अपूर्वमति माताजी ने ब्रह्मचर्य धर्म की बताई महत्ता

भास्कर संवाददाता | आष्टा

पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर की जल यात्रा बैंडबाजे के साथ बरसते पानी में उत्साह पूर्वक निकाली गई। यह जल यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पार्वती नदी के तट के समीप स्थित पांडुक शिला अलीपुर पहुंची। वहां पर पूजा अर्चना,अभिषेक के पश्चात जल यात्रा वापस किला मंदिर पर पहुंची। वहां पर भी आर्यिकाश्री ने आशीर्वचन भी दिए।

आर्यिका अपूर्वमति के ससंघ सानिध्य में गुरुवार को दस लक्षण महापर्व का अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर 12वें तीर्थंकर मूलनायक भगवान का मोक्ष कल्याण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया। इसके तहत श्रीजी को निर्वाण लाडू समर्पित किए गए। अनंत चतुर्दशी पर किला किला मंदिर की जल यात्रा निकाली गई। वहीं श्रावक-श्राविकाओं को धर्म और ज्ञान से लाभांवित किया गया। इस अवसर पर आर्यिका अपूर्वमति माताजी ने कहा कि ब्रह्मचर्य जो हमारी साधना का मूल हैं सभी साधनाओं में ब्रह्मचर्य को सबसे प्रमुख स्थान दिया गया है। एक तरफ ब्रह्मचर्य हैं तो दूसरी तरफ काम। काम ब्रह्मचर्य का विरोधी है। ब्रह्मचर्य को धारण करने का मतलब स्त्री-पुरुषों का एक-दूसरे के संसर्ग से दूर रहना मात्र नहीं है बल्कि शरीर की अशुचिता को समझकर काम से विरत होने का नाम ब्रह्मचर्य हैं। जब तक तुम्हारी दृष्टि इस चमड़ी पर रहेगी तब तक तुम अपने भीतर उस ब्रह्मचर्य की गरिमा को प्रतिष्ठित नहीं कर सकोगे।

ब्रह्मचर्य के तेज को प्रकट नहीं कर सकोगे। उसे जागृत करना हैं तो अपनी दृष्टि देह से ऊपर उठाओ। हमारे शास्त्रों में कहा गया हैं कि यदि तुम्हें ब्रह्मचर्य का ठीक तरीके से आराधन करना हैं तो हर पल शरीर की अशुचिता का चिंतन करो। जिस शरीर के प्रति तुम्हारा आकर्षण है वह शरीर में आकर्षण के लायक कु छ है ही नहीं। जब तक निज और पर के देह के प्रति तुम्हारा आकर्षण हैं तब तक तुम ब्रह्मचर्य को प्राप्त नहीं कर सकते। ब्रह्मचर्य को धारण करना हैं तो देह नहीं देही को पहचानों। भीतर की आत्मा को पहचानो जो शरीर में होकर के भी शरीरातीत है। उसे पहचानने की कोशिश करो।

पुण्य से क्या मिलता है

माताजी ने कहा कि धन आ जाए और शांति चले जाएं तो वह धन किस काम का। शील का पालन करने वाली नारी हमेशा पवित्र हुआ करती है। ऐसे पुरुष भी पवित्र हुआ करते हैं। उत्तम ब्रह्मचर्य हमारे जीवन मे बहुत बड़ा परिवर्तन कर सकता है। अपने जीवन में जब भी वैय्यावृति करने का मौका आए कोई पीछे नहीं हटना। अपनी आत्मा में वास करना उसमें लीन हो जाना यहीं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।

X
Ashta News - mp news moksha kalyanak celebrated apoorvamati mataji told the importance of brahmacharya religion
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना