माता-पिता की पूजा से बड़ी नहीं कोई पूजा: व्यास

Sehore News - आज के दौर में हमारी परम्पराओं पर ग्रहण लग गया है। इसलिए हमें कदम-कदम पर ठोकर नसीब हो रही है। आम आदमी को भले ही भगवान...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 04:35 AM IST
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आज के दौर में हमारी परम्पराओं पर ग्रहण लग गया है। इसलिए हमें कदम-कदम पर ठोकर नसीब हो रही है। आम आदमी को भले ही भगवान का पूजन करने का समय मिले या न मिले लेकिन घर में रहकर हर व्यक्ति अपने माता पिता की पूजा कर सकता है।

उक्त विचार शहर के मंडी माता मंदिर स्टेशन रोड स्थित रेलवे कालोनी पर जारी सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य गोविंदम् व्यास द्वारा रविवार को कथा के दौरान यहां पर उपस्थित श्रद्धालुओं से माता-पिता की पूजा कराकर की। आचार्य श्री व्यास ने कहा कि पूजा का अर्थ सम्मान देना है। माता पिता की आज्ञा का पालन करना ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने आज के परिवेश पर बोलते हुए कहा कि आज का समय काफी परिवर्तित हो चुका है। थोड़ी उम्र बढ़ने के बाद बच्चा अपने को पूरी तरह स्वावलंबी समझने लगता है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। जिनके घर माता पिता की पूजा होती है वहां भगवान और लक्ष्मी स्वत: ही निवास करते हैं। रविवार को कथा के छठे दिन आचार्य श्री व्यास ने कहा कि भागवत कथा ऐसा शास्त्र है जिसके प्रत्येक पद से रस की वर्षा होती है। इस शास्त्र को शुकदेव मुनि राजा परीक्षित को सुनाते हैं। राजा परीक्षित इसे सुनकर मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते हैं। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। हमारे अंदर प्रति क्षण रास हो रहा है, सांस चल रही है तो रास भी चल रहा है, यही रास महारास है। इसके द्वारा रस स्वरूप परमात्मा को नचाने के लिए एवं स्वयं नाचने के लिए प्रस्तुत करना पड़ेगा, उसके लिए परीक्षित होना पड़ेगा। इस दौरान कृष्ण-रुक्मिणी की आकर्षक झांकी बनाई गई जिनके दर्शन करने भक्तजन भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर भक्तजन शामिल रहे। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी की आरती उतारी गई।

आज अंतिम दिन महाआरती का आयोजन

इस संबंध में जानकारी देते हुए आयोजन समिति के पदाधिकारी एडवोकेट हरिशंकर सुलोदिया और रवि पांडे ने बताया कि सोमवार को भागवत कथा के अंतिम दिवस महा आरती का आयोजन किया जाएगा।

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