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नया भवन, मशीनें आने के बाद अब बिजली, पानी के अभाव में शुरू नहीं हो पा रही मृदा प्रयोगशाला

एक वर्ष पहले
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कृषि उपज मंडी परिसर में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला भवन बन चुका है उसमें मशीनें लग चुकी है, लेकिन उसको शुरू नहीं किया जा रहा है। जबकि छह महीने पहले कृषि मंत्री सचिन यादव भी उसका अवलोकन करके जा चुके हैं उसके बाद भी उसमें सुचारू रूप से कामकाज शुरू नहीं हो सका है। वहीं स्टाफ की व्यवस्था भी की गई है, लेकिन अब बिजली व पानी का इंतजाम नहीं होने से उसे शुरू नहीं किया जा रहा है। जबकि उसे डेढ़ साल पहले चालू हो जाना चाहिए।

नगर में मिट्टी परीक्षण प्रयोग शाला नहीं होने से किसानों को अभी भी अपने खेतों की मिट्टी की सेहत जानने के लिए सीहोर में लैब के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यदि यह सुविधा नगर की नवनिर्मित प्रयोगशाला में मिलना शुरू होती तो आसपास के 365 गांवों के किसानों को इसका लाभ मिल सकता था। जबकि अप्रैल 2018 में आधुनिक प्रयोग शाला तथा तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था के साथ प्रयोगशाला का शुभारंभ होना था। इसके बावजूद डेढ़ साल बाद भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। जबकि लैब का नया भवन तैयार खड़ा है तथा उसमें मिटटी परीक्षण की तकनीकी यंत्र भी लग चुके हैं। वहीं उसके संचालन के लिए स्टाफ भी आ चुका है। उसके बाद भी लैब को चालू नहीं किया गया है। जिससे किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। नगर की कृषि उपज मंडी में प्रयोगशाला के लिए भवन हैंडओवर भी हो चुका है। अब आवश्यकता है तो उसे बस चालू होने की। क्षेत्र के किसानों को मिट्टी परीक्षण के लिए सीहोर के कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। तब कहीं जाकर उसकी रिपोर्ट मिलती है। इस वजह से किसानों को आर्थिक व समय की बर्बादी करनी पड़ती है।

कृषि मंत्री ने किया था अवलोकन

कृषि मंत्री सचिन यादव ने सितंबर 2019 को उक्त नवीन प्रयोगशाला का अवलोकन किया था। जिसमें उन्होंने आधुनिक मशीनों के बारे में जानकारी ली थी। किसानों ने समझा था कि कृषि मंत्री के आने से अब प्रयोगशाला कुछ दिनों में शुरू हो जाएगी।

प्रयोगशाला खुलती है, लेकिन काम नहीं

नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में दो कृषि कर्मचारियों का स्टाफ प्रयोग शाला को खोलता जरूर है, लेकिन वहां पर मिट्टी परीक्षण जैसे कार्य नहीं होते। जो नमूने आते भी हैं तो उन्हें सीहोर ही भेजने होते हैं।

अब प्रयोगशाला चालू होने में बिजली-पानी की समस्या

यहां पर अभी तक बिजली की व्यवस्था नहीं है। इस कारण मशीनों चलने का सवाल ही नहीं उठता। दूसरी मुख्य आवश्यकता पानी का इंतजाम भी नहीं है। क्योंकि इसकी मोटर खराब पड़ी है।

बिजली का काम होना है

बीएस मेवाड़ा, एसएडीओ, कृषि विभाग।

कृषि मंत्री के अवलोकन के बाद भी शुरू नहीं हो सकी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला

यह होने थे काम

उक्त प्रयोग शाला में किसानों के आवेदन पर कृषि विशेषज्ञ गांव में जाकर मृदा के नमूने एकत्रित करेंगे तथा उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजेंगे। वे निर्धारित स्थान से ही मिट्टी के नमूने लें, इसके लिए जीपीएस डिवाइस का सहारा लिया जाएगा।

मृदा में मौजूद तत्वों का होगा परीक्षण

कृषि विभाग की प्रयोगशाला में मृदा में में मुख्य तत्व पोटाश, सूक्ष्म तत्व जिंक, कॉपर, मैगनीज एवं आयरन की क्षारीयता, मृदा की अम्लता तथा विद्युत चालकता जानने की सुविधा है।
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