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अन्नदाता की परेशानी महीनों की मेहनत से तैयार की फसलें...पूरी चौपट कर गए जानवर, शिकायत के तीन बाद भी देखने तक नहीं पहुंचे अफसर

शहर से समीपस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के किसान इन दिनों एक अलग ही परेशानी का सामना कर रहे हैं। किसानों ने लगातार तीन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:35 AM IST

शहर से समीपस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के किसान इन दिनों एक अलग ही परेशानी का सामना कर रहे हैं। किसानों ने लगातार तीन महीने की कड़ी मेहनत से खेतों में इस उम्मीद से फसलें उगाई थी कि उन्हें अच्छा फल मिलेगा। लेकिन रातभर में ही रोजड़े (नीलगाय) और जंगली सूअर खेतों में घुसकर फसलें तबाह कर गए। करीब एक महीने से ऐसा हो रहा है फिर भी न तो जिम्मेदार वन विभाग को परवाह है, न जिला प्रशासन के जिम्मेदारों को। पीड़ित 50 से ज्यादा किसान बीते मंगलवार को कलेक्टोरेट में जन सुनवाई में अधिकारियों को इस संबंध में शिकायती आवेदन दे चुके हैं। लेकिन तीन-चार दिन बाद भी कोई खेतों तक निरीक्षण करने भी नहीं गया। वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मुआवजे की बात पर एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ते दिखे।

दुपाड़ा रोड पर साढ़े चार बीघा की मसूर व धनिया खा गए

पीड़ित किसान बोले- जानवर भागे, न निरीक्षण हुआ

आवेदन के जरिए गिरवर, पतौली, दुपाड़ा रोड क्षेत्र के किसान नारायणसिंह, अमरसिंह, प्रभु, लक्ष्मीनारायण, भेरूलाल, मोतीलाल, मगनसिंह, इकबाल मंसूरी, उदयसिंह सहित कई किसानों सहित सर्व समाज कल्याण समिति अध्यक्ष रोडमल ने प्रशासन को शिकायत कर जानवरों को जंगल में छुड़वाने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर किसान कल्याण कोष से हर्जाना दिलवाने की।

50 से ज्यादा किसानों के खेत में घुसी नीलगाय व जंगली सूअर; चट कर गए अमेरिकन चने, मैथी और मसूर

एडीएफओ बोले- मुआवजा देने की जिम्मेदारी राजस्व की

जिले के उप वनमंडलाधिकारी राकेश लहरी इस मामले में बोले ऐसी कोई शिकायत हमें नहीं मिली है। शासन ने ऐसे नुकसान को भी प्राकृतिक आपदा माना है, इसलिए पीड़ित किसान विधिवत प्रक्रिया करें। मुआवजा राजस्व विभाग से मिलेगा। सुरक्षा की दृष्टि से खेत में पुतला खड़ा करें, पन्नियां लगाएं, रात को बम-पटाखे फोड़ें। एक साथ रोजड़े पकड़ने मंदसौर में पहले ट्रायल हुआ था। जिलों में इसके क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर निर्णय होना है। जिला जंगलविहीन है।

एसडीएम ने कहा- सर्वे में साथ मुआवजे की जानकारी गलत

शाजापुर एसडीएम यू.एस. मरावी से चर्चा की तो पहले उन्होंने आश्चर्य जताया कि क्या इस क्षेत्र में जंगली जानवर ऐसा करते हैं। सर्वे-मुआवजे की बात की तो बोले ऐसे मामलों में रेवेन्यू और वन विभाग मिलकर सर्वे कर लेते हैं। राजस्व विभाग द्वारा मुआवजा देने की बात गलत है। इसके लिए ऊपर से राशि स्थानांतरित होगी।

भास्कर ने खंगाले तीन केस

नारायण सिंह का खेत दुपाड़ा रोड से थोड़ी आगे है। वे बोले अक्टूबर में साढ़े चार बीघा में मसूर, आधा बीघा में धनिया बोया था। इस पर करीब 20 हजार रुपए खर्च हुआ। जंगली जानवर रात में खेत में घुसे और मसूर के बीज खाकर फसल बर्बाद कर गए। धनिया भी खा लिया। हमने प्रशासन को कार्रवाई के लिए आवेदन दिया, लेकिन तीन दिन बाद भी कोई निरीक्षण करने तक नहीं आया।

गिरवर क्षेत्र स्थित खेत की स्थिति बताते हुए हरिसिंह बोले 10 बीघा में महंगी कीमत के अमेरिकन चने बोए थे। रोजड़े, जंगली सूअर रात को घुसते रहे और चार बीघा के चने चट कर गए। उन्हें भगाने जाते तो वे उल्टा हम पर हमला करने लगते। प्रशासन को शिकायत की है पर कोई फायदा नहीं हुआ। हजारों का नुकसान हुआ, वह अलग।

गिरवर-पतौली क्षेत्र में बलराम सिंह का खेत है। इन्होंने भी जंगली जानवरों से फसल खराब होने की शिकायत की है। बलराम सिंह के अनुसार 5 बीघा में मैथी, मूली व मटर फसल करीब 10 हजार रु. खर्च कर लगाई थी। जंगली जानवर रातोंरात खेत में से खोदकर इन्हें खा गए। अब बाजार में क्या बेचें, यही सोचकर चिंतित हैं।

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