शाजापुर

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55 पंचायतों से 55 बसें अधिग्रहित पंचक्रोशी यात्री परेशान

परेशान होकर कहा इतनी गर्मी में अब घर कैसे पहुंचे, कई लोग पैदल ही रवाना हुए भास्कर संवाददाता | सुसनेर शाजापुर...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:45 AM IST
परेशान होकर कहा इतनी गर्मी में अब घर कैसे पहुंचे, कई लोग पैदल ही रवाना हुए

भास्कर संवाददाता | सुसनेर

शाजापुर में सोमवार को हुए सीएम के कार्यक्रम को लेकर परिवहन विभाग के द्वारा सुसनेर ब्लॉक की 55 ग्राम पंचायतों के लिए 55 प्राइवेट बसें अधिग्रहित की गई। ये सारी बसें सोमवार को शाजापुर जाने के कारण सुसनेर के नए बस स्टैंड पर यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए बसों की सुविधा नहीं मिल सकी। जिन्हें बस मिली भी, तो वह यात्रियों से भरी थी। यात्री इतनी गर्मी में सफर करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने इंतजार किया, किंतु काफी देर बाद बसें मिली। कुछ ग्रामों की ओर जाने वाली नाम मात्र की बसें भी शाजापुर चले जाने के कारण उन गांव के लोगों को पैदल ही अपने गांव जाना पड़ा। सोमवार को मुख्यमंत्री का दौरा, तो शाजापुर जिले में था, किंतु परेशानी आगर-मालवा जिले के साथ ही सुसनेर व आसपास क्षेत्र के ग्रामीणों व यात्रियों को भी हुई।

आगर-मालवा जिले से कुल 230 बसें अधिगृहित की गई थीं। उज्जैन में 84 महादेव की परिक्रमा करके पंचक्रोेशी यात्रा से लौटे यात्री भी सोमवार को परेशान होते नजर आए। बसों का टोटा रहने के कारण सोमवार सुबह से लेकर शाम तक बस स्टैंड व इंदौर-कोटा राजमार्ग पर डाक बंगले तिराहे पर पंचक्राेशी यात्री घर जाने के लिए परेशान होते दिखे। बस स्टैंड पर इंतजार कर रहे यात्री एस.के. शर्मा, हरिसिंह, रामलाल, नारायणसिंह आदि यात्रियों ने बताया वे जीरापुर जाने के लिए दो घंटे से बसों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बस नहीं मिली। न ही अन्य साधन। शादी-विवाह में भी कई लोग रस्मों के लिए तय समय पर नहीं पहुंच सके।

शाजापुर गई अधिकांश बसों में सवारियां कम रहीं

जो 55 बसें परिवहन विभाग द्वारा अधिग्रहित करके शाजापुर भेजी गई थीं, उनमें से अधिकांश बसों में नाममात्र के ही लोग बैठे दिखे। जानकारी के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए एक-एक बस एक-एक गांव को केंद्र बिंदु बनाकर गांवों में रविवार रात ही खड़ी करा दी गई थी। इनमें से अधिकांश बसों में किसान व ग्रामीण सीएम के कार्यक्रम में नहीं गए। ग्राम मोड़ी, परसुलिया, कजलास और अंतरालिया के किसान रमेश रातड़िया, रमेश पाटीदार, देवीलाल, सिद्धनाथ, प्रभुलाल आदि के अनुसार उनके गांवों में बसें तो आई थीं, किंतु उनमें से 10 के लगभग भी लोग नहीं गए। किसी बस में दो लोग ही सफर पर रहे।

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