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भीड़ के लिए आशा, उषा कार्यकर्ताओं को बुलाया, फिर बोले- ये भी तो किसान हैं

भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा पुरानी कृषि उपज मंडी में सोमवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:45 AM IST
भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा

पुरानी कृषि उपज मंडी में सोमवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जिलास्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें शाजापुर में हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी एलईडी के माध्यम से किया गया। पिछले किसान सम्मेलनों में किसानों की संख्या कम होने से विभाग की हुई किरकिरी को ध्यान में रखकर अधिकारियों ने जुगत लगाई। अन्य कार्यक्रमों को जोड़कर महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, आशा, उषा कार्यकर्ता व राज्य डे ग्रामीण अाजीविका मिशन से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बुला लिया। इससे महिलाओं की संख्या किसानों की अपेक्षा दोगुनी हो गई। कार्यक्रम में आई महिलाओं को भोजन के पैकेट करीब दोपहर 2 बजे मिल गए, लेकिन पैकेट खत्म होने के कारण किसानों को भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा ।

शाजापुर के लिए बसों से किसानों को अधिकारियों ने भेजा। अधिकारी 12 हजार किसानों के जिले से शाजापुर पहुंचने का दावा कर रहे हैं। वहीं हकीकत यह थी कि कलेक्टोरेट के सामने से शाजापुर के लिए रवाना हुई बसों में 9, 13 व 16 किसान नजर आए।

जिलास्तरीय किसान सम्मेलन में मंच के सामने महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, आशा, उषा व आशा सहयोगी तथा स्व-सहायता समूह की महिलाओं के अलावा ग्रामीण महिलाओं को बैठाया गया था। जबकि मंच के बांई व दांई ओर किसान बैठे। जब भास्कर ने इन महिलाओं से चर्चा की, तो महिलाओं ने बताया सुपरवाइजर ने फोन किया था। कुछ महिलाओं ने बताया ग्राम पंचायत के सचिव व रोजगार सहायक ने कार्यक्रम में आने को बोला था। सुबह 10 बजे से ये महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर आना शुरू हो गई थीं। कुछ ग्रामीण महिलाओं के बच्चे भूख से परेशान दिखे। कुछ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया आंगनवाड़ी केंद्र हमने बंद रखा है, क्योंकि आगर के कार्यक्रम में आना था। वॉट्सएप पर इसी दिन एक बैठक संबंधी मैसेज भी वायरल किए जाने से कई कार्यकर्ताएं वहां पहुंचीं और देखा कि लाइव प्रसारण पहले होना है, तो परेशान हुईं। इस संबंध में जब उप संचालक कृषि आर.पी. कनेरिया से बात की गई, तो उन्होंने कहा महिलाएं भी किसान होती हैं। जबकि जिपं सीईओ राजेश शुक्ल का कहना था आयुष्मान भारत योजना का परिचय कराने के लिए आशा, उषा कार्यकर्ताओं को बुलाया था। महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारी दीपक बड़ोले ने कहा हमारे विभाग की कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को राष्ट्रीय पोषण मिशन की जानकारी देने बुलाया गया है। इधर विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी निशी सिंह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के प्रसारण के बाद जब योजना की जानकारी दे रही थी, तब तक उनके विभाग की अधिकांश सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका कार्यक्रम स्थल से जा चुकी थीं। कार्यक्रम स्थल पर दो बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी। जबकि मंच पर मौजूद कलेक्टर अजय गुप्ता, जिपं सीईओ शुक्ल, किसान संघ के डूंगर सिंह, एडीएम एन.एस. राजावत, सांसद प्रतिनिधि विनय मालानी, जिपं सदस्य भेरूसिंह आर्य, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष दिनेश परमार, एसडीएम महेंद्रसिंह कवचे, जनपद सीईओ गोविंदसिंह राजावत के लिए मंच पर छोटी एलईडी लगाई गई थी। मंचासीन अतिथियों ने उसी से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम देखा।

जिला स्तरीय किसान सम्मेलन के दौरान इस तरह लेना पड़े भोजन के पैकेट।

किसी बस में 9 तो किसी में 14 किसान ही आए नजर

सुबह शाजापुर जाने वाले किसानों के लिए जो बस रवाना की गई, उन बसों में किसानों की संख्या देखने के लिए भास्कर टीम ने बैजनाथ महादेव व कलेक्टोरेट के सामने बस रुकवाई, तो एक में 9, 14 व 16 किसान ही दिखे। जब किसानों से पूछा कि कहा जा रहे हो, तो उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह के प्रचार में जा रहे हैं। इसके उलट जिपं सीईओ शुक्ल व तहसीलदार मुकेश सोनी का कहना था कि जिले से 12 हजार किसान शाजापुर पहुंचे थे। आपने जो बस देखी होगी वह आगर जनपद की नहीं होगी।

दोपहर 3 बजे तक इंतजार के बाद भोजन के लिए हुई छीना-झपटी।

लोडिंग वाहन से लाया गया महिलाओं को किसान सम्मेलन में।

भोजन पैकेट पड़े कम

सम्मेलन में आए लोगों के मान से भोजन के पैकेट कम पड़ गए। स्थिति यह हुई कि महिलाओं को पहले भोजन के पैकेट वितरित किए गए, लेकिन पानी की बॉटल लेने के लिए महिलाओं में छीना-छपटी होने लगी। कार्यक्रम में आए किसानों को भोजन के लिए एक घंटा और इंतजार करना पड़ा। इन्हें करीब दोपहर 3 बजे भोजन मिला, लेकिन वह भी सम्मान से नसीब नहीं हुआ। कई किसानों को भोजन पैकेट के लिए छीना-झपटी करना पड़ी। इधर किसान भूख से व्याकुल हो रहे थे। कुछ अधिकारी जिस पंडाल में खाना बन रहा था, वहां बड़े आराम से खाना खा रहे थे।