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शहर का मुद्दा जिला मूल्यांकन समिति की बैठक हुई, भास्कर ने उठाया था मुद्दा

पुराने शहर से बाहर बसने वाली कॉलोनियों में मनमानी गाइड लाइन तय कर रखी है। 21 मई तक लगा सकते हैं आपत्ति भास्कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:25 AM IST

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जिला मूल्यांकन समिति की बैठक हुई, भास्कर ने उठाया था मुद्दा
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    पुराने शहर से बाहर बसने वाली कॉलोनियों में मनमानी गाइड लाइन तय कर रखी है।

    21 मई तक लगा सकते हैं आपत्ति

    भास्कर संवाददाता | शाजापुर

    जमीन व प्लॉट की गाइड लाइन इस बार िजले में बिलकुल नहीं बढ़ेंगी। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में मनमाने तरीके से वास्तविक कीमत से कई गुना ज्यादा गाइड लाइन तय कर रखी है, वह भी अब कम होगी। इसके लिए जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति ने प्रस्ताव पारित कर दिया है। रेट कम करने के अधिकार जिला स्तरीय समिति को नहीं होने पर समिति ने इसका प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजने का निर्णय लिया है। भास्कर ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

    गाइड लाइन तय करने के लिए गुरुवार को कलेक्टोरेट में करीब डेढ़ घंटे बैठक चली। इसमें समिति सदस्यों ने स्पष्ट कह दिया कि पहले गाइड लाइन संबंधी सारी अनियमितताओं को दूर करना पड़ेगा। इसके बाद ही गाइड लाइन सही तरीके से तय हो सकेगी। बैठक में यह निर्णय भी पारित हो गया कि इस बार जिले में कहीं भी गाइड लाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। पुरानी अनियमितताओं को ठीक करने के लिए भी चर्चा हुई। समिति सदस्य व विधायक अरुण भीमावद ने बताया कई इलाकों में जमीन की वास्तविक कीमत से कई गुना ज्यादा गाइड लाइन है, जिसे कम करने की जरूरत है। लेकिन जिला स्तरीय समिति को गाइड लाइन कम करने के अधिकार नहीं है। इस पर समिति ने चिह्नित क्षेत्रों की सूची के साथ उक्त प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति भोपाल भेजने का निर्णय लिया है। अब वहां से स्वीकृति मिलते ही नए सिरे से उक्त क्षेत्रों को सर्व कराकर नए सिरे से गाइड लाइन तय होगी।

    इस साल नहीं बढ़ेंगी गाइड लाइन में जमीन की कीमतें, जिन क्षेत्रों में पहले से ही बढ़ाकर वसूल रहे थे, उसे भी कम करने की तैयारी

    गाइड लाइन ने बड़े शहरों को भी पीछे छोड़ दिया

    रजिस्ट्री के नाम पर जिले में पदस्थ पूर्व अफसरों ने सारी हदों को पार कर दिया। टारगेट पूरा करने के चक्कर में अफसरों ने ऐसी गाइड लाइन बनाई कि बड़े नगर देवास, उज्जैन और इंदौर तक को पीछे छोड़ दिया। बड़े शहरों के पूर्ण विकसित क्षेत्रों से भी देखा जाए तो शाजापुर की गाइड लाइन दोगुना है। जिला मुख्यालय के अलावा मक्सी को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल कर वहां की गाइड लाइन भी आसमान पर पहुंचा दी। वहां प्लॉट की कीमत से ज्यादा लोगों को स्टाम्प शुल्क चुकाने की नौबत आ गई। इस कारण मध्यम वर्ग के लोग प्लॉट तक नहीं खरीद पा रहे हैं।

    आमजन से भी सुझाव मांगे, आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं

    जिला मूल्यांकन समिति द्वारा गाइड लाइन दरों को अनुमोदित के बाद प्रशासन ने अब आमजन को गाइड लाइन दरों के संबंध में सुझाव मांगे हैं। रजिस्ट्रार कार्यालय में अपने क्षेत्र की गाइड लाइन का अवलोकन कर आमजन आपत्ति या सुझाव 21 मई की शाम 4 बजे तक पेश कर सकते हैं।

    भास्कर मुद्दा उठाया तो भोपाल तक पहुंची आवाज

    जिले की बिगड़ी गाइड लाइन को लेकर भास्कर ने प्रमुखता से उठाया। शहर की कॉलोनियों के वास्तविक बाजार मूल्यों और गाइड लाइन को देखने के बाद जो चौंकाने वाले अंतर सामने आए। उनको लेकर 21 फरवरी को भास्कर ने 80 हजार का प्लॉट, रजिस्ट्री पड़ रही 60 हजार रुपए में नतीजा, 11 महीने में एक भी रजिस्ट्री नहीं...क्योंकि सारे सौदे एग्रीमेंट पर ही कर लिए शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद शाजापुर जैसे छोटे शहर की एकमात्र वैध कॉलोनी में एक हजार स्क्वेयर फीट प्लॉट पर आने वाले रजिस्ट्री खर्च का देवास, उज्जैन और इंदौर जैसे महानगरों की सामान्य क्षेत्र की कॉलोनियों से तुलना की तो अफसरों की हकीकत सामने आ गई। मामले को लेकर 11 मार्च के अंक में भास्कर ने जमीन की कीमत आसमान में...इंदौर-उज्जैन की पॉश कॉलोनी में रजिस्ट्री कराना सस्ता, शाजापुर में 40 हजार रुपए ज्यादा महंगा शीर्षक से खबर प्रकाशित की। अफसरों की इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आते ही मार्च में विधानसभा सत्र के दौरान विधायक भीमावद ने प्रश्न लगा दिया।

    भास्कर ने उठाया था मुद्दा।

    जहां की गाइड लाइन ज्यादा, उसे भी कम कराएंगे, प्रस्ताव भी तैयार है

    जिन क्षेत्रों में कीमत से कई गुना ज्यादा गाइड लाइन है, उसे कम कराने के लिए प्रस्ताव बनाया है। प्रस्ताव जल्द ही भोपाल राज्य स्तरीय समिति को भेजा जाएगा। उक्त क्षेत्रों में नए सिरे से सर्वे कराकर वास्तविक कीमत के आधार पर गाइड लाइन तैयार कराने के बाद ही व्यवस्थित काम होगा। वैसे तो अन्य क्षेत्रों की गाइड लाइन भी इतनी हैं कि अगले तीन-चार साल तक बढ़ाने की जरूरत नहीं है। इस साल की गाइड लाइन में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की है। - अरुण भीमावद, विधायक व सदस्य जिला मूल्यांकन समिति

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