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लोक अदालत बिगड़े रिश्तों की उलझी दो कहानियां न्यायालय ने सुलझाईं

Shajapur News - महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की दो अलग-अलग कहानियां लोक अदालत में शनिवार को सामने आई। एक मामले में 4 बच्चों को जन्म...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:51 AM IST
Shajapur News - lok adalat39s two stories complaining of impaired relationships were settled by the court
महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की दो अलग-अलग कहानियां लोक अदालत में शनिवार को सामने आई। एक मामले में 4 बच्चों को जन्म देने और पांचवीं बार चार माह के गर्भ के बाद भी दहेज के लिए अपमानित होना पड़ा, तो दूसरे मामले में संतान नहीं होने की वजह से आए दिन मारपीट सहन करनी पड़ी। इन दोनों ही मामलों में पति-प|ी के रिश्तों को सुधारने के लिए न्यायाधीशों ने सेतु की भूमिका निभाई। पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा दिलाने के साथ पतियों को भी समझाइश देकर टूटते रिश्तों को जोड़कर एक साथ रहने के लिए राजी कर लिया।

चार बच्चों के बाद दहेज की वजह से पति-प|ी में आई दरार भरी, अब एक छत के नीचे रहेंगे, शादी के 15 साल बाद पति और दोनों प|ियां साथ रहने को राजी

15 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे राजूबाई और ओमप्रकाश समझाइश के बाद एकसाथ रहने के लिए हुए राजी।

कानूनी लड़ाई के बीच जन्मा बच्चा

दोनों ही मामले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मंजू सिंह की अदालत में सामने आए। पहले मामले में शाजापुर की सोफिया बी और उसके पति अकील निवासी उज्जैन के बीच शादी के कुछ अर्से बाद से ही छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद शुरू हो गए। इस दौरान चार बच्चों का जन्म हो गया। सोफिया की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट आसिफ कमाली ने बताया कि 4 माह के गर्भ की स्थिति में सोफिया न्यायालय की शरण में पहुंची थी। कानूनी लड़ाई के दौरान ही मायके में बच्चे का जन्म हुआ। पति-प|ी के बीच उत्पन्न हुए शिकवे-शिकायत सुनने के बाद न्यायाधीश मंजू सिंह ने दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए रिश्तों की अहमियत बताई तो वर्षों से अलग-अलग होने के लिए लड़ रहे दंपती एक बार फिर एक ही छत के नीचे रहने के लिए राजी हो गए।

बच्चे नहीं होने से शुरू हुआ था विवाद

दूसरे मामले में समीपस्थ ग्राम मूलीखेड़ा निवासी राजूबाई और उसके पति उज्जैन निवासी ओमप्रकाश के बीच संतान नहीं होने की बात पर आए दिन मारपीट होती रहती थी। संतान की चाह में ओमप्रकाश ने दूसरी शादी कर ली। राजूबाई से अलग होने के लिए 15 साल तक कानूनी लड़ाई जारी रखी लेकिन यहां भी न्यायाधीश मंजू सिंह ने बिखरते परिवार को टूटने से बचा लिया। राजूबाई के वकील संतोष तिवारी ने लोक अदालत के माध्यम से महिलाओं के अधिकार और उनके सम्मान का महत्व बताते हुए पीड़िता को सुरक्षा उपलब्ध कराई। न्यायाधीश की समझाइश पर 15 साल में रिश्तों में आई खटास खत्म हो गई। अब ओमप्रकाश दोनों प|ियों के साथ एक ही छत के नीचे रहने के लिए राजी हो गया।

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