साढ़े पांच साल में बदले 14 डीईओ, प्रभारी को नहीं दिए वित्तीय अधिकार

Shajapur News - भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा जिस आगर जिले को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदर्श जिला बनाना...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:45 AM IST
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भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा

जिस आगर जिले को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदर्श जिला बनाना चाहते थे, उस जिले में शिक्षा व्यवस्था के क्या हाल होंगे। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला बने आगर को मात्र पांच साल सात माह ही हुए है, लेकिन इतनी छोटी सी अवधि में 13 डीईओ बदल चुके है। 14वंे डीईओ के रूप में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के एपीसी ओमप्रकाश सिंह तोमर ने गत दिनों चार्ज लिया है, लेकिन उन्हें भी डीडीए पाॅवर अब तक नहीं मिला है। इसके चलते आगर विकासखंड के 730 शिक्षकों को और कर्मचारियों को आधा मार्च बीत जाने के बाद भी वेतन नहीं मिला है।

दूसरी बार दिया तोमर को चार्ज : 16 अगस्त 2013 को आगर जिला बनाया गया था। उस समय ज्यादातर विभागों का कामकाज शाजापुर से ही संचालित होता था, तब शाजापुर के तात्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी थाॅमस भूरिया आगर का भी चार्ज देखते थे। ड्राइंग पावर भी आगर को मई 2016 में मिले। भूरिया के बाद अशोक गोयल, किरण देशमुख को चार्ज दिया गया। रतलाम से आए आनंद सिंह वास्केल कुछ दिनों रहने के बाद निलंबित कर दिए गए। इसी बीच सखाराम अचाले, रमा नहाटे के पास प्रभार रहा। हाईकोर्ट से स्टे लेकर आए वास्केल ने फिर आकर चार्ज ले लिया। वास्केल के बाद उत्कृष्ट के प्राचार्य केपी नायक को चार्ज सौंपा गया, लेकिन व्यवस्था संभलती नहीं कलेक्टर ने एपीसी तोमर को प्रभार दे दिया। तोमर के बाद राजगढ़ से आए एसके मिश्रा ने चार्ज लिया। कुछ माह रहने के बाद वे भी चले गए। तब केके अग्रवाल को प्रभारी डीईओ बनाया गया, लेकिन अग्रवाल की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षकों ने प्रभारी मंत्री से शिकायत कर दी। इसके बाद उन्हें हटाकर कलेक्टर अजय गुप्ता ने डिप्टी कलेक्टर कल्याणी पांडे को चार्ज दिया था। प्रशासनिक स्तर पर टीकमगढ़ के बीएस बरकड़े का आगर ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन वे अब तक ज्वाइन नहीं हुए। ऐसे में पुनः एपीसी तोमर को इस पद का प्रभार सौंपा गया है।

आगर-मालवा. नरवल रोड पर बना नया डीईओ कार्यालय।

भास्कर संवाददाता | आगर-मालवा

जिस आगर जिले को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदर्श जिला बनाना चाहते थे, उस जिले में शिक्षा व्यवस्था के क्या हाल होंगे। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला बने आगर को मात्र पांच साल सात माह ही हुए है, लेकिन इतनी छोटी सी अवधि में 13 डीईओ बदल चुके है। 14वंे डीईओ के रूप में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के एपीसी ओमप्रकाश सिंह तोमर ने गत दिनों चार्ज लिया है, लेकिन उन्हें भी डीडीए पाॅवर अब तक नहीं मिला है। इसके चलते आगर विकासखंड के 730 शिक्षकों को और कर्मचारियों को आधा मार्च बीत जाने के बाद भी वेतन नहीं मिला है।

दूसरी बार दिया तोमर को चार्ज : 16 अगस्त 2013 को आगर जिला बनाया गया था। उस समय ज्यादातर विभागों का कामकाज शाजापुर से ही संचालित होता था, तब शाजापुर के तात्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी थाॅमस भूरिया आगर का भी चार्ज देखते थे। ड्राइंग पावर भी आगर को मई 2016 में मिले। भूरिया के बाद अशोक गोयल, किरण देशमुख को चार्ज दिया गया। रतलाम से आए आनंद सिंह वास्केल कुछ दिनों रहने के बाद निलंबित कर दिए गए। इसी बीच सखाराम अचाले, रमा नहाटे के पास प्रभार रहा। हाईकोर्ट से स्टे लेकर आए वास्केल ने फिर आकर चार्ज ले लिया। वास्केल के बाद उत्कृष्ट के प्राचार्य केपी नायक को चार्ज सौंपा गया, लेकिन व्यवस्था संभलती नहीं कलेक्टर ने एपीसी तोमर को प्रभार दे दिया। तोमर के बाद राजगढ़ से आए एसके मिश्रा ने चार्ज लिया। कुछ माह रहने के बाद वे भी चले गए। तब केके अग्रवाल को प्रभारी डीईओ बनाया गया, लेकिन अग्रवाल की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षकों ने प्रभारी मंत्री से शिकायत कर दी। इसके बाद उन्हें हटाकर कलेक्टर अजय गुप्ता ने डिप्टी कलेक्टर कल्याणी पांडे को चार्ज दिया था। प्रशासनिक स्तर पर टीकमगढ़ के बीएस बरकड़े का आगर ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन वे अब तक ज्वाइन नहीं हुए। ऐसे में पुनः एपीसी तोमर को इस पद का प्रभार सौंपा गया है।

180 नियमित व 550 अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को नहीं मिला वेतन

वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए तोमर को प्रभार तो दे दिया गया है, लेकिन अभी उन्हें डीडीए लाॅग-इन पासवर्ड नहीं मिले हैं। इस कारण 180 नियमित तथा 550 अध्यापक संवर्ग के लोगों को वेतन नहीं मिला है। बता दें पहले विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों को वेतन निकालने के लिए डीडीए पाॅवर उत्कृष्ट के प्राचार्य केपी नायक के पास था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह पाॅवर भी डीईओ को दे दिया गया था। इस कारण विकासखंड के सभी शिक्षकों को वेतन डीईओ की लाॅग-इन आईडी के माध्यम से ही निकलता है। वेतन न मिलने से कई शिक्षक परेशान हो रहे हैं। क्योंकि जल्द ही होली आदि त्योहार आने वाले है। अधिकांश शिक्षकों ने किसी कार्य के लिए बैंक से लोन ले रखा है। जिनकी किस्त समय पर जमा न होने से सिविल खराब होने का डर शिक्षकों को सताता है। क्योंकि एक बार यदि सिविल खराब हो गई, तो बैंक से दूसरी बार लोन नहीं मिल पाएगा। यह भी जानकारी लगी है कि कई संकुल केंद्रों से अभी तक जिला कार्यालय को गणना पत्रक भी प्राप्त नहीं हुए है। यदि स्थाई अधिकारी होता, तो ऐसी लेटलतीफी नहीं होती।

दो बाबूओं के सहारे चल

रहा डीईओ कार्यालय

जिला शिक्षा अधिकारियों का आना-जाना लगा हुआ है। वहीं कार्यालय केवल 2 बाबूओं के सहारे चल रहा है। जबकि यहां 8 पद स्वीकृत है। इनमें से कार्यालय में 3 बाबू ही कार्य कर रहे थे। 1 बाबू को कलेक्टोरेट में नायब नाजिर बना दिया गया है। कार्यालय में 2 बाबू अन्य जगह से बुलाकर अटैच कर रखे है। जिनसे व्यवस्था चल रही है, लेकिन जिला बनने के इतने समय बाद भी एमआईएस की सुविधा नहीं है। स्थाई जिला शिक्षा अधिकारी न होने से जिले की शिक्षा व्यवस्था में कसावट लाने वाले अधिकारी बदलते रहते है। इसी बीच जिले में नवोदय और पाॅलीटेक्निक कॉलेज चालू हो चुके है। डाइट व केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति हो चुकी है। शिक्षा का स्तर, तो बढ़ रहा है, लेकिन उसमें सुधार के लिए सुपरविजन करने वाले अधिकारी की कमी जिले में लगातार बनी हुुई है।

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