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उर्दू स्कूल की जमीन पर काटे 23 प्लाॅट, घर बने तो खिड़की व शौचालय बंद, 25 बच्चे ही बचे

एक वर्ष पहले
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सरकारी जमीन दिखते ही उस पर कब्जा और बाद में बड़ी कीमत लेकर प्लाॅट काटने का कारोबार इन दिनों शहर में तेजी से फलने फूलने लगा है। ऐसे ही एक मामले में महूपुरा स्थित उर्दू स्कूल की जमीन पर प्लाॅट काट दिए तो अब जमीन खरीदने वालों ने यहां पक्का निर्माण कर स्कूल की खिड़की से लेकर शौचालय तक बंद कर दिए। मामले में स्कूल प्रबंधन सहित क्षेत्र के लोगों ने कई बार शिकायत की। बावजूद इसके कार्रवाई के नाम पर महज पटवारी ने पंचनामा बनाकर इतिश्री कर ली।

शिकायतकर्ता जावेद एहमद ने बताया कि शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 181 के 75 बाॅय 45 यानी 3375 स्क्वेयर फीट भूमि पर स्कूल बना था। इसके आसपास खेल मैदान सहित खुली जगह पड़ी थी, लेकिन बीते सालों में दबंगों द्वारा प्लाॅट काटना शुरू कर दिया। करीब 23 से अधिक प्लाॅट की काॅलोनी काटने के बाद जब लोगों ने मकान निर्माण शुरू किया तो स्कूल भवन के दोनों ओर मकानों की दीवारों से खिड़की बंद हो गई। स्कूल में अब न तो ताजी हवा जाती है, और न ही प्रकाश। ऐसे ही बंद कमरों में शिक्षिकाएं बच्चों को दड़बे जैसे कमरों में पढ़ाने को मजबूर है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार पहले बच्चों की संख्या 45 से ज्यादा थी, पर स्कूल में बच्चों को घुटन महसूस होने पर यहां 25 बच्चे ही शेष रह गए।

अतिक्रमण हटवाएंगे : डीईओ यू.यू. भिड़े के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि स्कूल स्टाफ ने विभाग में शिकायत की होगी तो इसे तुरंत संज्ञान में लेने के साथ इसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। हमने पूर्व में भी सुनेरा के शासकीय स्कूल से अतिक्रमण हटवाया था।

आबादी क्षेत्र इसलिए सीमांकन नहीं किया जा सकता

रहवासी जावेद की शिकायत के बाद पटवारी आत्माराम धानुक ने एक माह पहले स्कूल पहुंचकर पंचनामा बनाया था। उनके इस पंचनामे में तर्क दिया गया कि आबादी क्षेत्र होने के कारण सीमांकन नहीं किया जा सकता। मामले में एक बार फिर से जांच की जाएगी। इधर, स्कूल प्रभारी यास्मीन अख्तर ने बताया कि स्कूल भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पूर्व में कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया था। इसके अलावा लिखित आवेदन भी दिया है। शिक्षिका यास्मीन अख्तर ने बताया अतिक्रमण एवं ताजी हवा नहीं आने से बच्चों की संख्या पर असर होकर अब महज 25 बच्चे ही शेष रह गए हैं।

स्वास्थ्य पर हो रहा असर

अतिक्रमण का असर वहां पढ़ने वाले बच्चों पर भी पड़ने लगा है। स्कूल भवन के दोनों ओर पक्के निर्माण होने से बच्चों के लिए न खेल मैदान है, और न ही कक्षाओं में ताजी हवा और प्रकाश मिल पा रहा है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने से बच्चों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया।

निजी भूमि का सर्वे नंबर दिखाकर काट दिए प्लाॅट-रहवासी दाउद शाह ने बताया कि निजी भूमि सर्वे नंबर 202 दर्शाते हुए शासकीय भूमि सर्वे नं. 181 पर प्लाॅट काट कर बेच दिए। ये प्लाॅट फरजाना बी पति समद खां एवं संतोष देवी पति प्रभुलाल जाटव द्वारा काटे थे। लोगों को मौका दिखाकर भूखंडों की रजिस्ट्री भी कर दी। अब यहां पक्के निर्माण कर दिए गए।

स्कूल की दीवार से सटाकर बना लिए गए हैं मकान
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