आठ साल से बी श्रेणी में दर्ज मंडी की आय कम होने से नहीं मिल पा रही ए ग्रेड

Shajapur News - आठ साल से बी श्रेणी में शुमार शाजापुर की कृषि मंडी की आय नहीं बढ़ पाने के कारण ए श्रेणी नहीं मिल पा रही है। हर तीन साल...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 04:40 AM IST
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आठ साल से बी श्रेणी में शुमार शाजापुर की कृषि मंडी की आय नहीं बढ़ पाने के कारण ए श्रेणी नहीं मिल पा रही है। हर तीन साल में होने वाली ग्रेडिंग पर इस वर्ष की कम आय का असर भी दिखेगा। मंडी सूत्रों के अनुसार मंडी की आय बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई फसलों और टैक्स में हुई कटौती के कारण यह स्थिति बन रही है। अब 2019-20 में होने वाली ग्रेडिंग को लेकर मंडी प्रबंधन इस बार पहले से तैयारियां में जुट गया है।

मंडी सूत्रों के अनुसार 2006 में मंडी सी श्रेणी की थी। लगातार प्रयास करते हुए मंडी की आय बढ़ाई गई तो 2011 में बी ग्रेड मिल गई, लेकिन इसके बाद 8 साल बीत गए, न तो मंडी की आय बढ़ी और न ग्रेड। ऐसे में सुविधा बढ़ाने के लिए बजट भी कम ही मिलता है। दो वर्षों में मंडी में हुए निर्माण कार्यों और फल सब्जी मंडी में का अलग शेड बनने से प्रबंधन उम्मीद जता रहा है कि 2019-20 में होने वाली ग्रेडिंग तक आय बढ़ने लगेगी। इसके लिए अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी गई है।

किसी साल कितनी आवक







मंडी ए ग्रेड होने से किसानों को मिलेगा लाभ

बी से ए ग्रेड में पहुंचने से विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों के साथ किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। शासन मंडी विकास के लिए अनुदान राशि में बढ़ोतरी करेगा। किसानों की सुविधाओं के लिए मंडी बोर्ड लाखों रुपए खर्च करता है। हाल ही में मंडी में करोड़ों रुपए से मंडी गेट, ऑफिस मरम्मत, शेड निर्माण, डीलक्स शौचालय निर्माण, सीसीटीवी कैमरा के अतिरिक्त अन्य विकास कार्य चल रहे हैं।

मंडी की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं

मंडी सचिव डीसी राजपूत के मुताबिक आय को बढाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस वर्ष भी उम्मीद थी कि ग्रेडिंग प्रणाली की शर्तों के अनुरूप आय होगी। टैक्सों में कटौती, प्राकृतिक आपदा का असर है।

इसलिए कम हुई आय

बीते वर्ष प्राकृतिक आपदा के साथ अप्रैल-मई में चना मसूर आदि फसलों की खरीदी में 86 लाख रुपए की आय प्रभावित हुई। वहीं इसके बाद भावांतर योजना में प्याज की खरीदी में मंडी को दो प्रतिशत टैक्स के स्थान पर एक प्रतिशत ही मिला। इससे 14 लाख रुपए की आय कम हो गई। वहीं 6 अक्टूबर 2018 से 2 प्रतिशत मंडी टैक्स को घटाकर डेढ़ प्रतिशत कर दिया गया। इसी के चलते आवक सामान्य होने के बाद भी आय कम रही।

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