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2071 साल पहले आज ही के दिन आगरिया भील ने बसाया था आगर, फिर चार साल बाद आबाद हुआ था शहर

2 वर्ष पहले
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45 हजार की आबादी वाला नगर आगर आज ही के दिन ( विक्रम संवत 4 की फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी) को आगरिया भील नामक व्यक्ति ने बसाया था। अभी विक्रम संवत 2075 चल रहा है। इस हिसाब से 2071 साल पहले आगर अस्तित्व में आया। 4 साल बाद लोगों की बसाहट हुई। पेयजल के लिए र|सागर (रातोडिया) बनाया गया। इसके 110 साल बाद मोती सागर (बड़े तालाब) का निर्माण कराया गया था।

आगरिया भील ने बस्ती बसाने के कारण ही शहर का नाम आगर पड़ गया। ऐसा इतिहास के जानकार बताते हैं। जानकारी के अनुसार विक्रम संवत 4 की फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी को आगरिया ने पहले सती की स्थापना कराई थी। जिस स्थान पर सती की स्थापना की गई, वह स्थान रातोडिया तालाब से ऊपर की और घाटी पर आज भी मौजूद है। सुरक्षा के लिए कुछ लोगों को यहां छोड़ा गया था, लेकिन समाज के अन्य लोगों को लाने में 4 वर्ष का समय लगा। कितने लोग उस समय रहते थे इसका तो कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन 4 साल बाद रहने लगे। इसके प्रमाण मौजूद है।

ड्रोन से लिया शहर का फोटो।

इतिहास लिखने वाले भी प्रमाण से सहमत, मालवा इतिहास का भी है उल्लेख

आगर का इतिहास प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पं. गणेश दत्त शर्मा इंद्र द्वारा लिखा गया था। स्व. इंद्र ने 1906 में तैयार ग्वालियर गजेटियर आधार मान कर 10वीं शताब्दी में बस्ती बसाने का उल्लेख किया है। आगर मालवा का सांस्कृतिक इतिहास लिखने वाले युवा कमल कुमार जैन इन्होंने काफी प्रमाण कर किए थे। काफी गहन अध्ययन किया था। पं. इंद्र के तर्क से सहमत नहीं हैं। जैन ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि इस समय तक आगर काफी समृद्ध हो चुका था। शिल्प कला भी चरमोत्कर्ष तथा यह काल आगर का स्वर्णिम काल था। परमार कालीन अवशेष भी यहां मिलते हंै। जैन ने कहा कि चारण भाट द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर राजस्थान के कई शहरों के लोग स्थापना की वर्षगांठ मनाते है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि आगर में 2250 साल पुराने बसाहट के अवशेष मिलते है। लेकिन कई बार युद्ध व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी बसाहट खत्म हो जाती है। यह भी सम्भव है कि आगरिया ने बस्ती की फिर से बसाहट इस तिथि को की हो।

प्रेमनारायण शर्मा का स्थापना को लेकर यह भी कहना है कि विक्रम विश्व विद्यालय की लाइब्रेरी ने मालवा का इतिहास नामक पुस्तक उर्दू में लिखी हुई है। इस पुस्तक में भी आगरिया भील द्वारा आगर को बसाने का उल्लेख मिलता है। शर्मा का यह भी कहना है कि मालवा का इतिहास 1600 ई. में लिखा गया था। शहर की स्थापना के बाद पहले रातोडिया तालाब की स्थापना हुई। उसके 110 साल बाद बड़े तालाब का निर्माण हुआ था।

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चारण आज भी करते है उल्लेख

बैजनाथ महादेव प्रबंध समिति के अशासकीय सदस्य प्रेमनारायण शर्मा (गुरू) ने बताया कि करीब 10 वर्ष पूर्व जमीदारपुरा से मैं गुजर रहा था। उसी दौरान मुझे एक व्यक्ति के गाने की आवाज सुनाई दी। पास गया तो वह व्यक्ति अपने हाथ से बनाए वाद्य यंत्र को बजा भी रहा था। जब मैंने उसका गाया गीत सुना तो उससे आगरिया भील द्वारा बस्ती बसाने के प्रमाण मांगे। उस राम भील नामक व्यक्ति ने उसके पास मौजूद हस्तलिखित पोथी (पुस्तक) निकालकर मुझे बताया। पोथी काफी पुरानी थी। जब मैंने उससे प्रमाण लेना चाहा तो उसने इसकी फोटोकाॅपी कराकर मुझे दी थी। इसमें आगर, कानड, बीजानगरी आदि आस पास के गांव में युद्ध कर बसाए जाने का उल्लेख है। आगर की बसाहट पहले शहर में ही थी। पूरा शहर पहाड़ी पर बसा है। चारों और नीचे खाई है। शहर बसाने वाले लोग सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखते थे।

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