इस साल में अधिमास, दो आश्विन के कारण 13 माह

Shajapur News - यह साल अधिमास वाला होगा। यानी इसमें 12 की बजाए 13 महीने होंगे। इसकी वजह विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत 25 मार्च से होगी।...

Feb 15, 2020, 09:31 AM IST

यह साल अधिमास वाला होगा। यानी इसमें 12 की बजाए 13 महीने होंगे। इसकी वजह विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत 25 मार्च से होगी। इसमें अश्विन अर्थात क्वार के 2 महीने होंगे। आश्विन माह 3 दिसंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। इसकी अवधि करीब दो माह रहेगी।

इन 2 माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिमास रहेगा। इस बार पितृ मोक्ष अमावस्या के अगले दिन नहीं बल्कि पूरे 1 माह बाद जितने भी त्योहार आएंगे वह 10 या इससे कुछ अधिक विलंब से आएंगे। दीपावली नए साल में 14 नवंबर को होगी जो 2019 में 27 अक्टूबर को थी यह संयोग हर 3 साल में एक बार बनता है। इससे पहले यह 2108 में था। तब दो भाद्रपद माह हुए थे।

इसलिए होता है अधिमास

सौर मास 365 दिन का। जबकि चंद्र मास 354 दिन का होता है। इसमें हर साल 11 दिन का अंतर आता है जो 3 साल में बढ़कर 1 माह से अधिक हो जाता है। यह 32 माह 16 दिन के अंतराल से हर तीसरे साल में होता है। 2018 में भाद्रपद में था तो अब आश्विन में हो रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है।

3 सितंबर से आश्विन

पं. चौबे ने बताया पंचांग गणना के अनुसार 3 सितंबर कृष्णपक्ष एकम से अश्विन माह से शुरू हो गए, जो 31 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में 18 सितंबर को अधिमास के रूप में प्रथम आश्विन की शुरुआत होगी। अधिमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस मास को शुद्ध मास की गणनाओं में नहीं गिना जाता है। इसलिए अधिमास की संज्ञा दी गई।

सर्व पितृ अमावस्या
17 सितंबर को


जटाशंकर पर्यटन क्षेत्र के आचार्य पंण्जितेन्द्र चौबे ने बताया नए साल में अभी मास में दो तिथियां कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तथा शुक्ल पक्ष की तृतीया कक्षाएं 18 अक्टूबर को है। इस कारण 17 सितंबर को श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र आरंभ होगी। श्राद्ध पक्ष की सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन नवरात्र शुरू हो जाते हैं लेकिन नए साल में अमावस्या व नवरात्रि के मध्य पूरे एक माह का
अंतर होगा।

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