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पॉलीटेक्निक काॅलेज के ठेकेदार को पीआईयू के अधिकारी पहुंचा रहे लाखों का फायदा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | आगर मालवा

लोक निर्माण विभाग पीआईयू संभाग आगर के अधिकारियों द्वारा पॉलीटेक्निक काॅलेज बिल्डिंग बनाने वाले ठेकेदार को पूरक शेड्यूल ऑफ आइटम स्वीकृत करके लाखों रुपए का फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया है। अधिकारी इस मामले में आरटीआई लगाकर जानकारी लेने वाले एक्टिविस्ट को भी भ्रामक व ऐसी जानकारी दे रहे हैं, जिनमें से आधी से ज्यादा किसी काम की नहीं है।

पूरक शेड्यूल में बदलाव

जानकारी के अनुसार उज्जैन रोड पर आरटीओ कार्यालय के पास 23 करोड़ की लागत से बन रहे पॉलीटेक्निक काॅलेज बिल्डिंग में निविदा शेड्यूल में सेटरिंग आइटम (कांक्रीट ढलाई के पूर्व बांधी जाने वाली सामग्री) जिसकी दर 227 रुपए प्रतिवर्ग मीटर एवं आइटम क्र 5.9.3 दर 264 रुपए प्रतिवर्ग मीटर है। परंतु उच्च अधिकारियों ने संभागीय परियोजना यंत्री को फोन पर निर्देश दिए कि 5.9.5 की जगह 5.9.21 जिसकी दर 343 रुपए प्रतिवर्ग मीटर है एवं 5.9.3 की जगह 5.9.20 जिसकी दर 381 रुपए प्रतिवर्ग मीटर है, उसे पूरक शेड्यूल में बदलकर भेजा जाए। सूत्र बताते है कि अधिकारियों ने पूरक शेड्यूल में बदलाव करके इसे भोपाल भेज दिया और वह स्वीकृत भी हो गया।

पूर्व अधिकारी ने कहा था शासन हित में लें निर्णय

मामले का एक और पहलू यह है कि तत्कालीन संभागीय परियोजना यंत्री आलोक श्रीवास्तव ने 2 अगस्त 2018 को मामले में अतिरिक्त परियोजना संचालक भोपाल को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि उक्त समय में बदलाव करने से निविदा शेड्यूल में प्रदर्शित आइटम रुपए 47 लाख 94 हजार 885 अधिभार शासन पर आएगा तथा ठेकेदार को इतनी ही राशि का अधिक भुगतान करना पड़ेगा। श्रीवास्तव ने पत्र में यह भी लिखा था कि उचित समझे, तो पूरक शेड्यूल ऑफ आइटम के ऊपर शासन हित में निर्णय लें। कुछ समय बाद श्रीवास्तव का स्थानांतरण आगर से हो गया। उनके स्थान पर आए अधिकारी डीएस यादव ने बदले पूरक शेड्यूल ऑफ आइटम के हिसाब से ही ठेकेदार के बिलों का भुगतान करना शुरू कर दिया है। ठेकेदार को जब पूरा भुगतान होगा तब तक आशंका है कि शासन को 47 लाख से अधिक का चूना लग जाएगा।

उज्जैन रोड पर आरटीओ कार्यालय के पास बन रहा पॉलीटेक्निक काॅलेज।

नए कलेक्टोरेट बिल्डिंग का नक्शा थमाया- सूचना अधिकार (आरटीआई) एक्टीविस्ट अशोक परिहार ने पीआईयू से कॅालेज बिल्डिंग के संबंध में तीन बिंदुओं की जानकारी मांगी थी। पहले, तो अधिकारियों ने टालमटोल की। परिहार द्वारा चालान से 1558 राशि जमा करने के बाद उन्हें भ्रमित करने के लिए 779 पेज थमा दिए। इसमें न केवल जानकारी अधूरी है बल्कि भ्रमित करने वाली भी है। दिलचस्प बात यह है कि परिहार को विभाग ने जो जानकारी दी है उसमें पॉलीटेक्निक कॅालेज बिल्डिंग की बजाए सारंगपुर रोड पर बन रहे नई कलेक्टोरेट बिल्डिंग का नक्शा है।

थमा दिए इनकम टैक्स के कागज
परिहार ने निर्माण करने वाले ठेकेदार को किए गए भुगतान के बिल वाउचर की छाया प्रति मांगी थी। इसके एवज में विभाग ने कुछ ही कागज दिए है। अधिकतर कागज ठेकेदार एमपी बाबरिया द्वारा 2012-13 से 2016-17 तक में जमा किए गए इनकम टैक्स रिटर्न की रसीद तथा पॉलीटेक्निक व इंजीनियरिंग कॅालेज द्वारा दिए गए 10 से अधिक डिप्लोमा व डिग्रियां की फोटो कापी है। इतना ही नहीं पंचायत विभाग द्वारका गुजरात द्वारा ठेकेदार को जारी किए गए वर्क आर्डर की फोटो कापी संलग्न कर दी गई है। जबकि ठेकेदार आगर मप्र में काम कर रहा है।

लोनिवि मंत्री वर्मा से मामले में जांच का कहा है
शेड्यूल में परिवर्तन करके ठेकेदार को ज्यादा भुगतान करने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस के प्रदेश सचिव गुड्डूलाला ने लोकनिर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लाला का कहना है मामला इसलिए भी शंकास्पद है क्योंकि उच्च अधिकारी फोन पर निर्देश दे रहे हैं और आगर में बैठे अधिकारी उसका पालन कर चूना लगा रहे हैं।

अधिकारी बोले- शेड्यूल स्वीकृति के लिए गया होगा
इस संबंध में जब संभागीय परियोजना यंत्री यादव से बात की गई, तो वे अंजान बनते नजर आए। कहने लगे जो शेड्यूल बना होगा वह स्वीकृति के लिए गया होगा। स्वीकृति शायद हुई या नहीं देखना पड़ेगा। पूरा मामला समझ में नहीं आ रहा है। श्रीवास्तव जी का क्या मैटर था। कोई अतिरिक्त भार शासन पर नहीं आ रहा है। ठेकेदार को जो बिल भुगतान किए गए है वह नई दरों से किए गए है। इससे स्पष्ट होता है कि ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान होने लगा है।

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