डेढ़ करोड़ रुपए से बनी है बिल्डिंग छात्राओं की संख्या के मान से नाकाफी

Shajapur News - डेढ़ करोड़ से बनकर तैयार शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की नई बिल्डिंग छात्राओं की संख्या के...

Nov 22, 2019, 09:26 AM IST
Shajapur News - mp news building worth rs 15 crore is not enough to count the number of girl students
डेढ़ करोड़ से बनकर तैयार शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की नई बिल्डिंग छात्राओं की संख्या के सामान छोटी पड़ गई। ग्राउंड फ्लोर प्लस फर्स्ट फ्लोर पर बने 13 में से 11 कमरों में 857 छात्राओं को बैठाना प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ। कमरों में ज्यादा से ज्यादा छात्राओं को बैठाने के लिए फर्नीचर तक हटवा दिए। बावजूद 12वीं की छात्राओं को गलियारे में बैठाकर पढ़ाई करवाना पड़ रही है। प्रैक्टिकल कराने के लिए तो अब भी उन्हें हर दिन नई बिल्डिंग से 200 मीटर दूर पुरानी बिल्डिंग में ले जाना पड़ता है।

नई बिल्डिंग बालवीर हनुमान के पास पिछले साल ही बनकर तैयार हुई है। इसी सत्र से से छात्राओं को भी नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। यहां कुल 13 कमरे हैं। इनमें से 11 कमरों में कक्षाएं लगती हैं। एक में प्राचार्य व एक कक्ष में पुराना सामान रखा है। इधर, 9 से 12वीं तक यहां कुल 857 छात्राएं पढ़ती हैं। इन्हें यदि 11 कमरों में बराबर बांटें तो प्रत्येक कमरे में 66 छात्राओं को बैठना पड़ेगा, लेकिन यहां स्थिति इससे उलट है। कई कक्ष में 70 से ज्यादा छात्राओं को बैठना पढ़ता है।



बावजूद कमरों की संख्या कम पड़ी तो 12वीं की छात्राओं को गलियारे में बैठाकर वहीं बोर्ड रखकर पढ़ाई कराना पड़ रही है। कुछ छात्राओं को इस नए भवन के पास पुराने आयुर्वेदिक अस्पताल के जर्जर कक्ष में बैठाकर जैसे-तैसे क्लास संचालित की जा रही है। इन सब के बावजूद प्रैक्टिकल लैब के लिए यहां कमरा ही नहीं बचा। ऐसे में छात्राओं को प्रैक्टिकल करने के लिए 200 मीटर दूर अपने पुराने स्कूल में ही जाना पड़ता है।

शहर के एकमात्र हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं को बैठने की जगह नहीं, गलियारे में बैठकर करना पड़ती है पढ़ाई

कमरे 11 और छात्राओं की संख्या 857 : जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना पड़ती है

कक्ष छोटा होने से कक्षा 12वीं छात्राओं को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना पड़ती है।

इसलिए परेशानी : 2016 में मंजूरी मिली पर जगह नहीं

बिल्डिंग के लिए 2016 में ही स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन पास में कहीं जगह नहीं मिल पाने से एक साल तक मामला पेंडिंग रहा। बाद में पुराने अस्पताल वाली जगह जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग के हैंडओवर कर दिया। निर्माण के दौरान भी कमरों की कमी की बात सामने आई थी, लेकिन नई राशि स्वीकृत कराने की लंबी प्रक्रिया में पहले से स्वीकृत डेढ़ करोड़ रुपए की राशि के लैप्स होने का डर था। ऐसे में ताबड़तोड़ तत्कालीन अफसरों ने निर्माण शुरू करा दिया।

समाधान : बिल्डिंग के ऊपर निर्माण करा दिया जाए

उक्त बिल्डिंग के ऊपर भी एक फ्लोर निर्माण कराने की जरूरत है। ऊपर होने वाले निर्माण में लागत भी कम आएगी और छात्राओं की बैठक व्यवस्था से लेकर लैब तक की सारी समस्याएं खत्म हो जाएगी।

छात्राओं की संख्या

कक्षा छात्राएं

9वीं 295

10वीं 149

11वीं 235

12वीं 178

कुल 857

प्रैक्टिल के लिए दो कक्षा की छात्राएं पुराने भवन जाती हैं

महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल की 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं में से से किसी ना किसी दो कक्षाओं का रोज प्रैक्टिकल होता है। इसके लिए उनको 200 मीटर दूर पुराने भवन में जाना पड़ता है। छात्राओं को सुरक्षित दूसरी बिल्डिंग तक ले जाने के लिए कतार के आगे व पीछे शिक्षकों को भी तैनात रहना पड़ता है।

कुर्सी लगाने पर इतनी छात्राएं भी बैठाना मुश्किल

कुल 857 लड़कियों के लिए 11 कमरों में बैठाने के लिए प्रबंधन को हर दिन मशक्कत करना पड़ती है। औसतन 65 से 70 बच्चों को प्रत्येक कक्ष में बैठाकर पढ़ाने के लिए यहां फर्नीचर भी नहीं लगाया जा सकता। यदि फर्नीचर लगा दिया जाए तो कक्ष में इससे भी कम छात्राएं बैठ सकेगी। ऐसे में ज्यादातर कमरों में यहां कुर्सी ही नहीं लगा सके।

6 कमरे और बन जाए तो समस्या खत्म हो जाएगी


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