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50 साल में बदला स्वरूप : आजाद चौक में रहता था उल्लास, इसीलिए पांच दिनी उत्सव की बनी परंपरा

एक वर्ष पहले
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पांच दिनों के होली उत्सव ने प्रदेश में शहर की अलग ही पहचान बना दी है। इस साल इस परंपरा के 50 वर्ष पूरे हो गए। इन वर्षों में छोटे स्वरूप में होने वाले आयोजन भव्य हुए तो कुछ सिमट गए। 30 साल पहले चंद्रशेखर आजाद होली उत्सव समिति के अध्यक्ष रहे रामू सर्राफ के अनुसार पहले शहर के हर गली मोहल्ले से गेर निकलकर आजाद चौक पहुंचती थी, पूरा दिन यहीं हुल्लड़ मचता था। इसी के चलते पांच दिनों तक चलने वाली होली की परंपरा शुरू हुई।

चंद्रशेखर आजाद होली उत्सव समिति की शुरुआत 1970 के लगभग हुई थी। पहले सभी मुख्य चौराहों पर रंगों के कड़ाव रखे जाते थे, लेकिन अब कड़ाव रखने की परंपरा बंद कर दी गई। इनके स्थान पर पानी के टैंकर रखे जाने लगे हैं। इसके अलावा पांच दिनों तक होने वाले आयोजन को लेकर खर्च भी अधिक होने लगा।

होली उत्सव में अब तक यह तीन बदलाव हुए

{पहले : अलग अलग मोहल्लों से आती थी गेर

सार्वजनिक होली उत्सव समिति के आयोजन की शुरुआत के बाद से ही लोगों द्वारा होली धूमधाम से मनाया जाने लगा। पहले अलग अलग मोहल्लों से हुरियारों की टोलियां गेर के रूप में निकलकर आजाद चौक पहुंचती थी। इसके बाद यहीं धूम मची रहती।

अब : सिर्फ फाग यात्रा

गेर की परंपरा विलुप्त होती गई। अब रंगपंचमी पर फाग यात्रा निकाली जाती है। युवाओं की टोली शामिल होकर करीब 4 किमी लंबी यात्रा के दौरान खुशियां मनाते हैं।

{पहले : कव्वाली और कठपुतली का खेल

पांच दिनों तक दिन में रंग गुलाल तो शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग जमता था। प्रवक्ता मनीष सोनी के अनुसार पहले कव्वाली, कठपुतली का खेल, जादू और कवि सम्मेलन का आयोजन करते थे।

अब : रिकाॅर्ड एक्शन

होली उत्सव के दौरान होने वाले कठपुतली और जादू के खेल तो 10 साल में गायब ही हो गए। इनके स्थान पर अब सिर्फ रिकार्ड एक्शन के साथ कवि सम्मेलन के आयोजन ही होने लगे।

{पहले : केसुड़ी के फूलों को उबालकर बनाते थे रंग

होली उत्सव को लेकर पूर्व में दो दिन पहले से प्राकृतिक रंग तैयार करना शुरू कर दिए जाते थे। उत्सव समिति द्वारा शहर के चौक बाजार, सोमवारिया बाजार और नई सड़क क्षेत्र में कड़ाव रख केसुड़ी के रंग उबाले जाते थे।

अब : 150 क्विंटल गुलाल

आजाद चौक में होली खेलने के लिए अब समय भी तय कर दिया गया। अब यहां टैंकरों से रंग उड़ाया जाता है। खास तौर पर फागयात्रा में 150 क्विंटल से ज्यादा गुलाल से पूरा शहर रंगीन होगा।
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