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देहदान की अंतिम इच्छा नहीं हुई पूरी, शुजालपुर से पहुंचकर पोते ने मेडिकल कॉलेज से लिया शव, रतलाम में अंतिम संस्कार

Shajapur News - भास्कर संवाददाता | शुजालपुर/रतलाम/नीमच नीमच के शिक्षक नगर में अपनी बेटियों के साथ पांच साल से रह रहे चंदूलाल...

Jan 18, 2020, 09:30 AM IST
Shujalpur News - mp news dehdaan39s last wish was not fulfilled grandson taken from medical college after reaching shujalpur funeral in ratlam
भास्कर संवाददाता | शुजालपुर/रतलाम/नीमच

नीमच के शिक्षक नगर में अपनी बेटियों के साथ पांच साल से रह रहे चंदूलाल हंसारी (95) ने 12 जनवरी को ह्दयाघात के बाद अंतिम सांस ली। बेटियों ने अगले ही दिन पिता की इच्छानुरूप रतलाम मेडिकल कॉलेज को देहदान कर दी। शुजालपुर निवासी पोते को जब चौथे दिन देहदान का पता चला तो वह नीमच में बुआ कुसुमलता कंडाला से मिला व अंतिम संस्कार की इच्छा जाहिर की।

शुक्रवार को बेटा श्यामलाल व पोता आशीष हंसारी रतलाम मेडिकल कॉलेज आए और देह वापस मांगी। बेटी और दामाद की स्वीकृति के बाद मेडिकल कॉलेज ने देह लौटा दी। इस तरह दादा की अंतिम इच्छा पर पोते द्वारा दाह संस्कार की इच्छा भारी पड़ी। शुक्रवार दोपहर चंदूलाल हंसारी का जवाहर नगर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया।

रतलाम मेडिकल कॉलेज में दान की गई देह लौटाने का यहा पहला मामला है। रतलाम का मेडिकल कॉलेज देहदान के मामले में प्रदेश के नए खुले मेडिकल कॉलेजों में अव्वल है। 2018 में यहां मेडिकल कॉलेज खुला था।

नीमच में बेटियों ने की थी देहदान
बेटी ने कहा पिता की इच्छा के खिलाफ रतलाम में अंतिम संस्कार किया वह गलत है

1. शिक्षक कॉलोनी स्थित निवास पर चंदूलाल हंसारी की बेटियां अपने पिता की तस्वीर लिए। बाएं से शशिबाई, कुसुमलता कंडारा अौर दाएं सीमाबाई। 2. मेडिकल कॉलेज में देह मिलने का इंतजार करत पोता आशीष। (नीले जैकेट व टोपी में) व अन्य परिजन। 3. जवाहर नगर पहुंची चंदूलाल हंसारी की अंतिमयात्रा।



2015 से पिताजी हमारे साथ, चार साल पहले भरा था घोषणा-पत्र

बेटी कुसुमलता कंडाला ने बताया कि हम चारों बहन और एक भाई है। माता श्रवणीबाई हंसारी का 11 दिसंबर 2015 को निधन हो चुका है। पिताजी 2015 से हमारे साथ रहने आ गए थे। 22 अगस्त-2016 को गायत्री मंदिर में महर्षि दधीचि देहदान/अंगदान यज्ञ संस्थान नीमच को देहदान करने के लिए घाेषणा-पत्र भरा था। 13 जनवरी-2020 संस्थान के अध्यक्ष डॉ. हरनारायण गुप्त की उपस्थिति में गोमाबाई नेत्रालय नीमच को नेत्रदान किया। फिर रतलाम में देहदान किया।

बुआ-भतीजे के आरोप-प्रत्यारोप

रतलाम मेडिकल कॉलेज से चार दिन बाद पोता पिता के साथ वापस लाया देह

मैं इकलौता पोता हूं, दादा की निधन होन की सूचना तक नहीं दी गई हमें

पोते आशीष हंसारी (40) ने बताया दादा नीमच में रहते थे। मौत की हमें किसी ने सूचना नहीं दी। 13 जनवरी को सुबह 10 बजे किसी अन्य परिचित ने फोन पर बताया। हम शुजालपुर से नीमच के लिए निकले, लेकिन जावरा में गाड़ी की क्लच प्लेट खराब हो गई। हम पहुंचे तब तक देह रतलाम के कॉलेज को दी जा चुकी थी। हम रतलाम आए, कॉलेज प्रबंधन के हाथ-पैर जोड़े, आधार कार्ड से पुष्टि करवाई। कागजी कार्रवाई के बाद देह ली। आशीष शुजालपुर में नगर पालिका में ड्राइवर है।

स्वैच्छिक दान लिया था


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