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पहली बार चंदा लेने के लिए अफसरों व नेताओं के घर नहीं पहुंचे समिति के सदस्य, आर्केस्ट्रा के बजाए आज राजस्थानी नृत्य होगा
शाजापुर में पांच दिवसीय होली उत्सव
पांच दिवसीय होली उत्सव में इस साल पहली बार ऐसा हुआ कि चंदे लेने के लिए इस बार समिति सदस्यों ने अफसरों व नेताओं के साथ हाथ नहीं फैलाए। न ही रसीद कट्टे देकर समिति सदस्यों को टारगेट मिला। आयोजकों ने अपने स्तर से ही मुख्य बाजार के व्यापारियों से उनकी स्वेच्छा मुताबिक सहयोग राशि ली और रंगारंग कार्यक्रमों करा दिया। इतना ही नहीं, आर्केस्ट्रा में फूहड़ता दिखाने के बजाए सदस्यों ने इस बार राजस्थानी लोकनृत्य की नई परंपरा डाल ली।
गौरतलब है कि हर साल होली उत्सव समिति सदस्य 8 दिन पहले से आमजनों से सहयोग लेने के लिए चंदे की रसीद काटना शुरू कर देते हैं। सरकारी कार्यालयों से लेकर नेताओं और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचकर आयोजन के लिए सहयोग राशि जुटाते हैं, लेकिन इस साल समिति संयोजक प्रदीप सिंह दीखित ने इस परिपाटी को बदल दिया। उन्होंने आयोजन से आमजनांे को जाेड़ने के उद्देश्य से सिर्फ शहर के आजाद चौक, नई सड़क व सोमवारिया बाजार क्षेत्र के व्यापारियों से उनकी स्वेच्छा के मुताबिक सहयोग राशि जुटाई। इसके बाद समिति के स्तर से पूरा खर्च उठाने का निर्णय ले लिया। आयोजन के तहत
पहले दिन खाटू श्याम की भजन संध्या के बाद गुरुवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।
कवि सम्मेलन : राजनीित ने होली पर ऐसा रंग दिखाया, सिंधिया ने कमलनाथ को सड़क पर ला दिया
पांच दिनी होली उत्सव के चलते गुरुवार देररात स्वॅ. चांदमल जैन स्मृति में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के कवियों ने प्रस्तुति देकर श्रोताओं को गुदगुदाया। इस दौरान प्रदेश में अचानक बिगड़े राजनीतिक समीकरण को लेकर जमकर व्यंग्य प्रस्तुत किए। इस दौरान सूत्रधार मुकेश मोलवा की एक लाइन राजनीति ने होली पर ऐसा रंग लगा दिया, सिंधिया ने कमलनाथ को सड़क पर ला दिया, पर जमकर तालियां गूंजी। देररात 2 बजे तक चले कवि सम्मेलन में शामिल 7 कवियों देर तक समां बांधे रखा।
पारंपरिक वेशभूषा में देंगे प्रस्तुति
आयोजन के दौरान हर साल आजाद चौक में होने वाले आर्केस्ट्रा के दौरान पुलिस को भीड़ कंट्रोल करने में बड़ी परेशानी आती थी। इसको लेकर इस बार दीखित ने आर्केस्ट्रा के कारण बढ़ती फूहड़ता को समाप्त करते हुए शहरवासियों को भारतीय संस्कृति से परिचय कराने के लिए इस बार राजस्थानी लोकनृत्य का कार्यक्रम तय कराया। जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में पहने कलाकार प्रस्तुती देंगे। दीखित ने बताया कि उज्जैन के कलाकार लोक नृत्य की प्रस्तुती देकर भारतीय संस्कृति का परिचय देंगे।
{पुलवामा शहीदाें के लिए : असमय ही आंखों मंे अश्रु गंगा लेकर आ गया। साड़ी का कहा था रे पगले तिरंगा लेकर आ गया। मौत मर गई मानकर चले गए, लौटकर आएंगे ठानकर चले गए। - मुकेश मोलवा, इंदौर
{खंड-खंड होते अखंडता के प्रतिमान देख लिए, हिंदुस्तान में जाने कितने पाकिस्तान देख लिए।
- दीपशिखा रावल, नीमच
{जिंदगी में लाख ऊंची हो भले उड़ान तेरी, परिवार के प्रति तू फर्ज मत भूलता। खुद की जवानी तेरी जिंदगी को दे दी प्यारे, ऐसे बूढ़े पिताजी का कर्ज मत भूलना। - कानू पंडित, नाथद्वारा
{चीन में या आफत आगी, सारी दुनिया भी घबरागी। देखो से भाई चीन की देखो किस्मत फूटी, दवा मिलने न मिल रही, बूटी चीन ने कोरोना खागी। चीन ने कोरोना खागी।
- शैलेंद्रसिंह शैलू, प्रतापगढ़
{ राम है बजरंगी दिल मंे, राम लंका काण्ड है। राम कण कण में समाये, राम ही ब्राह्मण है।
- हिमांशु हिंद, झाबुआ
{मुहब्बत में कोई दूरी, कभी दूरी नहीं होती, तुम्हारे ख्वाब से ये आंख बेनूरी नहीं होती। गमों का वक्त तो पूरा अकेले काट लेती हूं, मगर बांटू तुमसे तो खुशी भी पूरी नहीं होती। - सोनल जैन, सूरत
शाजापुर में होली के पांच दिवसीय रंगोत्सव के तहत गुरुवार को आजाद चौक में कवि सम्मेलन में देशभर के कवियों ने रचना पाठ कर श्रोताओं को देर रात तक गुदगुदाया।