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ठंड में झुलसी फसल का सर्वे कराकर मुआवजे देने का भरोसा देने वाले अफसरों ने अब कहा- इतना नुकसान ही नहीं हुआ, क्या सर्वे कराएं

2 वर्ष पहले
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जनवरी-फरवरी का नुकसान अब सामने आया
भास्कर संवाददाता | शाजापुर

जनवरी व फरवरी दोनों माह के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की ठंड ने जिले की आलू, टमाटर, धनिया, मसूर और चना फसल को झुलसा दिया। इन फसलों में हुआ नुकसान अब सामने आने लगा है। 40 क्विंटल प्रति बीघा होने वाले आलू का उत्पादन इस बार 20 क्विंटल भी नहीं रहा। धनिया और मसूर तो 100 प्रतिशत खराब हो गई। चना फसल में भी 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके बाद भी जिले के किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा। नुकसान के आंकड़ा सामने न आए, इसलिए यहां के अधिकारियों ने नुकसान का सर्वे कराने से ही इंकार कर दिया है।

ज्ञात रहे इस साल पहले 27 से 29 जनवरी तक जिले में कड़ाके की ठंड पड़ी। इससे उस समय फूल व फल बन रहे फसलें झुलस गई। जो फसल देरी से बोई थी और फूल नहीं आए थे। उन्हें बाद में फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में आई ठंड ने खराब कर दिया। खासकर आलू, टमाटर, मसूर और चना फसल को ज्यादा नुकसान हुआ। खराब हुई फसल लिए किसान कलेक्टोरेट पहुंचे और सर्वे कराकर नुकसान की भरपाई कराने की मांग की।

अधिकारियों ने किसानों को फसल में हुए नुकसान का सर्वे कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा की फसल के पकते समय क्राप कटिंग के माध्यम से नुकसान का आंकलन किया जाएगा। लेकिन अब अधिकारी अपनी बात से ही मुकर गए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कह दिया कि नेत्रांकन के आधार पर इतना नुकसान ही नहीं हुआ कि सर्वे करने की जरूरत पडे़। जिले में सिर्फ 17 प्रतिशत ही नुकसान आंका गया है। जो सर्वे कराकर मुआवजा वितरित करने की पात्रता में नहीं आता।

फसलें झुलसी... आलू का आकार छोटा, चना पूरी तरह खराब

पलसावद के राधेश्याम गुर्जर ने बताया आलू में फल बनना ही शुरू हुआ था और ठंड ने झुलसा दिया। फिर फल बड़े नहीं हो सके। साईज आधी रह गई। बेसरापुर के दिलीपसिंह ने बताया चने में दाने बनने ही लगे थे और ठंड ने झुलसा दिया। इससे छोटे दाने वहीं सुख गए। 10 बीघा की फसल पूरी तरह खराब हो गई।

किसानों में संशय... फसल बीमा का फायदा मिलेगा या नहीं

ठंड में खराब हुई फसल की भरपाई कराने के लिए अधिकारियों ने नुकसान होने के बाद भी फसल बीमा करवाया था। किसानों को प्रोत्साहित करते हुए हजारों किसानों ने बीमा कराया। अब इन्हें बीमा योजना का लाभ मिलेगा या नहीं। इसको लेकर भी संशय की स्थिति बनी है।

अधिकारियों ने पूरे जिले का औसत नुकसान आंका
ठंड के कारण पूरे जिले में एक साथ नुकसान नहीं होता है। हवा के रूख के हिसाब से कहीं कम तो कहीं ज्यादा नुकसान होता है। इधर, जिले के अधिकारियों ने भी नेत्रांकन के आधार पर नुकसान का जो सर्वे निकाला। वह 17 प्रतिशत ही रहा। क्योंकि कई इलाकों में ठंड का असर कम रहा था। उन क्षेत्रों में नुकसान भी नहीं हुआ। यदि तहसील ईकाई के मान से नुकसान का आंकलन किया जाता तो किसानों को हुए नुकसान की हकीकत सामने आ जाती।

31 मार्च के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
ठंड में हुए नुकसान संबंधी डेटा ऑन लाईन निकालने के लिए स्थानीय विभाग के अधिकारियों को डिमांड भेजना पड़ेगी। मांग मिलने के बाद कंपनी कार्यालय से भी भोपाल स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट के माध्यम से ठंड के कारण हुए नुकसान संबंधी आंकड़े सामने आएंगे। तभी बीमा क्लेम संबंधी प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। वैसे ये सारी प्रक्रियाएं 31 मार्च के बाद से ही शुरू होगी। यदि नुकसान सामने आएगा तो क्लेम की राशि सीधे किसानों के खाते में जमा करा दी जाएगी। - आरएस सिकरवार, उद्यानिकी फसल बीमा कंपनी के अधिकारी

जिले में सर्वे की जरूरत नहीं
नेत्रांकन के आधार पर जिले में औसतन 17 प्रतिशत नुकसान हुआ है। नियमानुसार 25 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने पर ही सर्वे किया जा सकता है। ज्यादा नुकसान नहीं होने से सर्वे की जरूरत ही नहीं पड़ी। - एचएस नामदेव, प्रभारी अधीक्षक भू-अभिलेख शाजापुर

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