शरद पूर्णिमा पर महिलाएं सिर पर ज्योत उठाए निकलेंगी, होगा गरबा का विसर्जन

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Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:15 AM IST
DENDLA News - mp news on sharad purnima women will lift the flame on their head there will be immersion of garba
गांव की सुख-समृद्धि की कामना के लिए 100 साल के पहले से चल रही है परंपरा

डॉ. अर्चना मेहता | देंदला/रंथभंवर

शारदीय नवरात्रि के बाद गांव में अखंड ज्योत के साथ शुरू होने वाले गरबा विसर्जन को लेकर देंदला में खास परंपरा है। 5 दिन तक मां अंबे मंदिर के समीप अखंड ज्योत स्थापित कर जहां हर दिन रात के समय ग्रामीण भजन-कीर्तन करते हैं, वहीं अंतिम दिन शरद पूर्णिमा पर रविवार काे गरबा विर्सजन से पहले गांव की सभी महिलाएं ज्योत उठाए पूरे गांव में निकलती हैं। प्रत्येक घर से आने वाली इन सभी महिलाओं के सिर पर छेद वाली मटकी होती है। अंदर अखंड ज्योत के रूप में दीपक चलता है।

शरद पूर्णिमा पर रविवार काे ऐसे ही ज्योत को सिर पर उठाए ग्रामीण महिलाएं सामूहिक रूप से गांव के मुख्य मार्गों से निकलेंगी, जो गांव के बीच बने मां अंबे मंदिर पर पहुंचेगी। यहां माता की मां अन्नपूर्णा के रूप में पूजा की जाएगी। इसके बाद ग्रामीण महिला-पुरुष गांव के समीप से निकले खाल (जलस्राेत) पर पहुंचेंगे और महाआरती के साथ गरबे का विसर्जन करेंगे।

नवमी के बाद एकादशी से पूर्णिमा तक होने वाले गरबों को लेकर गांव में उत्साह है। नई फसल के आ जाने पर इस दिन मां अंबे की अन्नपूर्णा देवी के रूप में पूजा की जाती है। गांव के 80 वर्षीय बाबूलाल पटेल ने बताया मैं भी बचपन से शरद पूर्णिमा पर ऐसे आयोजन को देखते आ रहा हूं।

पूर्वजों ने गांव में सुख-समृद्धि की कामना को लेकर यह पहल शुरू की थी। इसमें पहले 10 से 12 महिलाएं कलश में ज्योत उठाकर चल समारोह में शामिल होती रही। मां अंबे का चबूतरा था, जहां अब बड़ा मंदिर बन गया। महिलाओं की संख्या अब 50 से ज्यादा हो गईं, जो ज्योत उठाकर निकलती हैं।

पांच दिन तक नहीं करते हैं दूध का उपयोग

रविवार काे गांव में अन्न की देवी अन्नपूर्णा की पूजा हाेगी। मान्यता है जो ग्रामीण पूजा करेंेगे, उनके यहां दशहरे की रात से दूध का उपयोग बंद रहता है। 5 दिन के दूध की छाछ बनाकर उसकी पूजा की जाती है। साथ ही गाय की पूजा होती है, फिर दूध उपयोग में लाया जाता है। गाय की पूजा के साथ गाय के दूध से बनी चीजों का भोग अन्नपूर्णा माता को चढ़ाया जाता है।

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