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- Shujalpur News Mp News On The Morning Of Rangpanchami 85 Feet High Flag Made Of Teak Will Be Changed Twenty Feet
रंगपंचमी की सुबह उतारा जाएगा सागौन से बना 85 फीट ऊंचा ध्वज, बीस फीट हिस्सा बदलेंगे
गरीबनाथ धाम में 24 मार्च तक चलेगा 10 दिवसीय मेला
बाबा गरीबनाथ धाम अवंतिपुर बड़ोदिया में रंगपंचमी 14 मार्च को ही सुबह सागौन से बने 13 टन वजनी ध्वज उतारा जाएगा व मरम्मत कर इसी दिन शाम को ध्वज वापस हर वर्ष की तरह खड़ा किया जाएगा। पूर्व में इस ध्वज को मरम्मत के लिए पंचमी से एक दिन पूर्व उतारने का निर्णय हुआ था, इसे बदलते हुए आयोजन समिति ने रंगपंचमी पर ही सभी आयोजन करने का निर्णय लिया है। पंचमी पर यहां स्थित समाधीस्थल पर लगा ध्वज स्तंभ साल में एक बार उतारा जाता है और देशभर से आए श्रद्धालु ध्वज के नीचे 20 फीट गहरे गड्ढ़े में मन्नत के नारियल,अगरबत्ती व पान के पत्ते डालते हैं, जो एक साल बाद भी हूबहू निकलते हैं। इस दिन से 10 दिवसीय मेला भी शुरू होगा। आयोजन समित के महेंद्र सोनी ने बताया कि पंचमी पर सुबह जल्दी ध्वज उतारकर शाम तक वापस स्थापित किया जाना है। मप्र तीर्थ व मेला विकास प्राधिकरण में दर्ज ये मेला रंगपंचमी से शुरू होकर 24 मार्च तक चलेगा। यहां हर साल रंगपंचमी पर हजारों लोगों की भीड़ जमा होती है।
दिनभर होगी सफाई : बाबा गरीब नाथ की समाधि पर स्थापित स्तंभ को साल में एक बार इस दिन उतार दिनभर साफ-सफाई, मरम्मत व शृंगार कर सूर्यास्त के पूर्व वापस खड़ा किया जाता है। स्तंभ रूपी ध्वज को उतारने व चढ़ाने के बीच स्तंभ गाढ़ने हेतु खोदे गए लगभग 16 फीट गहरे आठ फीट चौड़े व 20 फीट लंबे गड्डïे में नारियल, पान सिक्के खड़ा नमक और अगरबत्ती चढ़ाकर लोग मन्नत मानते हैं। किंवदंती है यहां मांगी हर मुराद पूरी होती है, गड्डा 20 हजार नारियलों से लबालब होता है। ध्वज उतारने के बाद जब खुदाई की जाती है तो पिछली रंगपंचमी पर डाले गए हजारों नारियल पान और खड़ा नमक इस गड्डों में वैसे के वैसे ही सुरक्षित निकलते हैं।
नारियल और सूखा लौकी को बरकती मानते
खुदाई में निकलने वाले नारियल व ध्वज स्तंभ की कलंगी पर लगा आलतुम्बी (सुखी गोल लौकी) की पपड़ी को भक्त बरकती मानते हुए इसे पाने के लिए भारी मशक्कत करते है। सागौन के नौ पाटों से यह स्तंभ बना है। इसे सिर्फ 5 फीट जमीन में गाड़ा जाता है और कच्ची जमीन में नारियलों के ऊपर सिर्फ इतना कम गड़ा होने के बाद यह स्तंभ वर्षभर स्थिरता से खड़ा रहता है।
ऐसा रहता है समाधि स्थल का नजारा (फाइल फोटो)।