समस्या: फोरलेन हाइवे पर आवारा जानवरों के झुंड, रात में अचानक वाहन के सामने आने से हो रहे बड़े हादसे

Shajapur News - भास्कर संवाददाता | शुजालपुर शुजालपुर-कालापीपल तहसील में करीब डेढ़ लाख मवेशियों की तादात में से अब तक सिर्फ 5 हजार...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 09:25 AM IST
Shujalpur News - mp news problem herds of stray animals on forelane highway big accidents due to sudden arrival of vehicle at night
भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

शुजालपुर-कालापीपल तहसील में करीब डेढ़ लाख मवेशियों की तादात में से अब तक सिर्फ 5 हजार मवेशियों की टैगिंग मालिकों ने कराकर पशु विभाग को इन्द्राज कराया है, इसलिए सड़क पर बैठे पशुओं के मालिकों की पहचान में ये टैगिंग सिस्टम भी बेकाम साबित हो रहा है। नतीजतन हादसों के बाद भी दोषी मवेशी मालिक बैखोफ घूम रहे है और प्रशासन इसके बाद भी सभी मवेशियों की टैगिंग कराने की ओर गंभीर नहीं है।

अनुभाग मुख्यालय शुजालपुर की सीमा से दो फोरलेन सारंगपुर-शुजालपुर और पचोर-आष्टा नेशनल हाईवे गुजरे हैं। दोनों ही फोरलेन पर आवारा गोवंश झुंड के रूप में बैठा रहता है। बरसात व आसपास की जगह गीली होने से अब गाय, बछड़े और सांडों की फोरलेन सड़क ही पनाहगाह बनी हुई है। वाहन लेकर चलने वाले लोग दिन में तो बचकर निकल जाते हैं। लेकिन रात के अंधेरे में अक्सर हादसे हो रहे हैं। जिसमें लोगों की जान जा रहीं हैं व लोग घायल भी हो रहे है। इस समस्या पर न तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कोई ध्यान दे रहा है व नगर पालिका ने भी आवारा गोवंश की समस्या का समाधान को लेकर कुछ भी नहीं किया है। जिससे लोगों की जान को खतरा बना हुआ है।

पशु चिकित्सा विभाग से डॉ प्रशांत महाणिक के अनुसार पशुओं की टैगिंग फ्री में होती है। यदि प्रशासन चाहे तो पशुपालन विभाग की मदद से आवारा व पालतू सभी पशुओं को कांजी हाउस में निरुद्ध कर उनके मालिकों के आने पर पशुपालकों की पहचान की जानकारी के दस्तावेज लेकर टैगिंग कराकर इस समस्या से लोगों को निजात दिला सकता है। टैगिंग होने से सड़क पर मवेशी मिलते ही साफ्टवेयर पर मवेशी के कान पर लगी टैगिंग के नंबर डालते ही पशु मालिक का नाम आएगा व कार्यवाही के लिए प्रशासन जिम्मेदारी तय कर सकेगा। इससे लोग कार्यवाही के भय से मवेशी बांधकर रखेंगे।

शुजालपुर में फोरलेन सड़क पर खड़े मवेशी। इनसे हादसे की आशंका बनी रहती है।

रेडियम पट्टी भी सभी पशुओं के सींगों में नहीं

हादसे ना हों इसलिए अभियान के रूप में कुछ समाजसेवी रिफ्लेक्टर और रेडियम पट्टी भी पशुओं के सींगों में लगा रहे हैं। लेकिन ये अभियान भी भी समिति समय तक चलने से सभी मवेशियों के सींग में ये नहीं लगा है। हालांकि इससे समस्या कम जरूर हुई है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। बीते एक माह में पुलिस रिकॉर्ड अनुसार सात हादसे हुए जिसमंे दस से अधिक लोग घायल हुए है। सर्वाधिक घटना अकोदिया-शुजालपुर के बीच हो रही है व 90 फीसदी मामले पुलिस तक भी नहीं आते क्योंकि घटना आवारा मवेशी की वजह से होने के बाद घायल सीधा उपचार कराकर व्यवस्था को कोसता चुप रह जाता है।

भास्कर सुझाव : डेढ़ लाख पशुओं में यूनिक आईडी टैगिंग हो

पूरे प्रदेश में गाय-भैंस जैसे पालतू पशुओं की पशुपालन विभाग ने टैगिंग कराई है। शुजालपुर-कालापीपल तहसील में करीब डेढ़ लाख मवेशियों की तादात में से अब तक सिर्फ 5 हजार मवेशियों की टेगिंग विभाग कर चुका है। गोवंश के कानों में 12 अंकों की यूनिक आईडी जनरेट कर उनके कान में टैगिंग कराई जाए। सड़क पर बैठे पशुओं की टैगिंग से उसके मालिक का पता लगाकर ऐसे पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई हो तो समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

यूआईडी टैगिंग का सुझाव अच्छा है, इस पर काम करेंगे


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