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ट्रेन से टकराकर घायल हुई विक्षिप्त महिला अस्पताल में मरीजों के लिए बनी समस्या

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:56 AM IST

Shajapur News - भास्कर संवाददाता | शुजालपुर चार दिन पहले शुजालपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेन से टकराकर घायल हुई महिला को...

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भास्कर संवाददाता | शुजालपुर

चार दिन पहले शुजालपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेन से टकराकर घायल हुई महिला को रेलवे पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया और शुजालपुर सिविल अस्पताल से उसे भोपाल रेफर किया था। भोपाल के हमीदिया अस्पताल ने शुजालपुर वापस भेज दिया गया। अब सिविल अस्पताल में उपचाररत यह विक्षिप्त महिला अन्य मरीजों व स्टॉफ के लिए समस्या बन गई है।

जानकारी के मुताबिक 13 मार्च को शुजालपुर रेलवे स्टेशन पर सुबह यात्री ट्रेन से टकराकर अज्ञात 40 वर्षीय महिला घायल हो गई थी। रेलवे पुलिस ने 108 एम्बुलेंस के माध्यम से शुजालपुर सिविल अस्पताल पहुंचाया था। यहां प्राथमिक उपचार देने के बाद महिला को मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की स्थिति में देखते हुए ड्यूटी डॉक्टर राम सलोने मिश्रा ने उसे भोपाल रेफर किया था ताकि मानसिक रोग विशेषज्ञों की देखरेख में उसका उपचार हो सके। भोपाल की हमीदिया अस्पताल प्रबंधन ने महिला मरीज को भर्ती करने से इनकार करते हुए वापस भेज दिया। एम्बुलेंस से वापस शुजालपुर आई महिला को स्थानीय सिविल अस्पताल में भर्ती कर लिया और अब नियमित उसका उपचार भी किया जा रहा है।

लेकिन अस्वस्थ मानसिक स्थिति के कारण अस्पताल का स्टाफ, वार्ड में उपचाररत अन्य महिलाएं व भर्ती मरीज से भयभीत हैं। उनका कहना है कि महिला के व्यवहार से सभी घबराते हैं।

एसडीओपी ने कहा कानूनी प्रक्रिया से दिलाएंगे उपचार

इस मामले में जानकारी देने पर शुजालपुर अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विजय शंकर द्विवेदी ने बताया कि मामला संज्ञान आया है। जानकारी लेकर पहले महिला की मनोचिकित्सा विशेषज्ञों से काउंसलिंग कराई जाएगी और उसके बाद आवश्यक होने पर मानसिक रोग विशेषज्ञ से उपचार दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। तत्काल कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता है।

अस्पताल परिसर में घूमती रहती है घायल महिला

शरीर पर कई जगह हुए घाव पर बंधी पट्टी लेकर ही यह महिला पूरे अस्पताल परिसर में दिन भर कचरा बीनते हुए कई बार इस तरह की हरकतें भी करती है। उसे देखकर मरीजों-स्टाफ भयभीत हो जाते है। अस्पताल में भी इस अज्ञात महिला के नाम से भर्ती किया गया है व नाम पूछने पर ये महिला बार-बार अपना नाम बदल कर बताती है। परिजनों व घर के पते के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दे पा रही। ड्यूटी नर्स ने बताया कि शनिवार को यह महिला शाम को सिर पर लोहे का स्टूल उठाकर घूमने लगी और दिनभर कचरा बीनने के अलावा बेड छोड़कर परिसर में घूमती रहती है। आसपास के मरीजों में भर्ती भवानी बाई ने बताया कि घायल महिला को वार्ड में भर्ती मरीज ही समझा-बुझाकर खाना खिलाते है और उससे जब भी परिवार की जानकारी मांगते हैं तो वह अपना नाम व जानकारी बदल-बदल कर बताती है। इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सक डॉ रामसलौने मिश्रा ने बताया कि उक्त महिला को मानवता के आधार पर अस्पताल में भर्ती रखकर उपचार किया जा रहा है तथा यह चिंता का विषय है कि स्वस्थ होने के बाद इस महिला को जब डिस्चार्ज किया जाएगा तो वह कहां जाएगी और उसका मानसिक उपचार किस तरह हो सकेगा।

आप जाने कैसे मिलता है ऐसे रोगियों को उपचार

अपना नाम पता बताने में असमर्थ अज्ञात या बिना परिजनों के रहने वाले निराश्रित मानसिक रोगियों को उपचार दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत स्थानीय पुलिस थाना स्टाफ नागरिकों से पंचनामा बनवाकर संबंधित मानसिक रोगी को स्थानीय सिविल अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद प्राइवेट इस्तगासा बनाकर जिला न्यायालय में न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत कर मानसिक रोग विशेषज्ञ से परीक्षण कराने व परीक्षण में मानसिक उपचार की आवश्यकता होने पर शासकीय मानसिक चिकित्सालय में बिना अटेंडर के शासकीय व्यय पर भर्ती कर नियमित उपचार देने के आदेश न्यायालय द्वारा दिए जाते हैं। इसके उपरांत न्यायालय के आदेश के पालन में मानसिक रोग चिकित्सालय रोगी को भर्ती कर उपचार देता है तथा रोगी के ठीक होने पर उसे या तो परिजनों को सौंप दिया जाता है या निराश्रित के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं की शरण में भेजा जाता है।

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