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खुशहाली और समृद्धि... यह तस्वीर इसलिए खास क्योंकिपहली बार बंजर बल्डियों पर फसलें लहलहा रही हैं
किसान फसल पकने का उत्सव मनाते, इसलिए होलिका में उंबियां सेंकते हैं
शाजापुर | होली के रंगभरे उत्साह के साथ इस बार देखें जिले की खुशहाली और समृद्धि दर्शाती तस्वीर। हरे-भरे दिखाई दे रहे इलाके के बीच कुछ सूखा हिस्सा और उसके बीच लहलहाती फसलंे। इतिहास में इस साल ऐसा पहली बार हुआ है कि बंजर पहाड़ियों की पथरीली जमीन में भी रबी की फसलें लहलहा रही हैं। यह सब संभव हुआ है इस साल हुई ज्यादा बारिश से। किसानों ने इस साल बल्डी की खाली व बंजर पड़ी रहने वाली जमीन की हंकाई कर गेहूं-चने से लेकर आलू-प्याज और लहसुन तक की बुआई कर दी। तस्वीर में दिख रहे क्षेत्र में दोनों तरफ के हिस्सों में बल्ड़ी पर फसलें दिखाई दे रही है। पहले यह जगह बंजर थी।
पवन चक्की से बनने लगी बिजली
जिले में 2015 से पवन चक्की से बिजली उत्पादन का काम बड़े स्तर पर शुरू हुआ। बेरछा से शाजापुर व मोमन बड़ोदिया और शाजापुर से मक्सी व कानड़ के बीच की सभी खाली पहाड़ियों पर पवन चक्की लगा दी गई। 2015 से इनसे बिजली बनना भी शुरू हो गई। पवन चक्की से जिले में 250 मेगावॉट बिजली बनने लगी और शाजापुर जिला बिजली उत्पादक जिले में शामिल हो गया।
शाजापुर| लाहोरी बल्ड़े से ऐसे स्पष्ट दिखाई दे रही बल्ड़ी पर रबी फसलंे।
100
100
400
500
4000
7000
8000
12600
60000
गन्ना
अलसी
सरसों
मटर
लहसुन
आलू
संतरा
प्याज
चना
गेहूं
1.76 लाख**
ये फसलें भी (फसल रकबा हेक्टेयर मंे)
यह रिकाॅर्ड भी टूटा
ज्यादा बारिश के कारण इस साल रबी फसल के रकबे ने भी अब तक के रिकाॅर्ड तोड़ दिए। इससे पहले अब तक रबी फसल का रकबा सबसे ज्यादा 2008 में 2.50 लाख हेक्टेयर था, लेकिन इस साल रबी फसल का रकबा पिछले रिकाॅर्ड तोड़ते हुए 2 लाख 60 हजार 700 हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसमें सबसे ज्यादा गेहूं 1.76 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल से 96 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। दूसरे नंबर पर चना फसल का रकबा 60 हजार हेक्टेयर है। पिछले साल रबी का कुल रकबा 1.80 लाख हेक्टेयर था।