भावांतर योजना का समय आता देख व्यापारियों ने भी किया प्याज का स्टाक निकालना शुरू, नेफेड प्याज का सीजन भी शुरू

Shajapur News - जिले की सब्जी मंडी में शासन की भावांतर योजना का समय आते देख व्यापारियों ने भी अपने प्याज का स्टाक काे निकालना शुरू...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:20 AM IST
Shajapur News - mp news seeing the time of bhavantar plan the traders also started to take out the stock of onion the beginning of the nafed onion season
जिले की सब्जी मंडी में शासन की भावांतर योजना का समय आते देख व्यापारियों ने भी अपने प्याज का स्टाक काे निकालना शुरू कर दिया है। इसके तहत बाहर बेचने के लिए व्यापारियों के पास भेजना शुरू कर दिया। क्योंकि अभी नेफेड प्याज का सीजन शुरू हो चुका है, जो स्टॉक करने के लिए सबसे उत्तम प्याज माना जाता है। उसे 6 से 8 महीने तक स्टोरेज कर कर रखा जा सकता है। साथ ही शासन की भावांतर योजना के तहत व्यापारी जो माल किसानों से सस्ते दामों में खरीदते हैं, उसे फिर वह सीजन जाने के बाद अधिक दामों में बेचते हैं। किसानों को उनकी उपज का मूल्य व्यापारी से मिलता है। उसके बाद निर्धारित में कमी होने पर उपज का मूल्य शासन की योजना के तहत मिल जाता है। इससे किसानों काे कोई नुकसान नहीं होता और व्यापारी को सीधा फायदा हो जाता है।

जिले का प्याज यूपी के कानपुर, लखनऊ, सीतापुर, बस्ती, गोंडा, अयोध्या आदि शहरों में ज्यादा बिकने जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक, सोलापुर, नागपुर जिले का प्याज और लहसुन दोनों ही फेमस है। दिल्ली में सबसे बेस्ट क्वालिटी का प्याज यहां से जाता है। विदेशों में बांग्लादेश की हिली बॉर्डर, नेपाल की भुजा दंगा और श्रीलंका के शहरों में यहां का प्याज जाता है।

मंडी में प्याज से भरे ट्रक जो व्यापारियों द्वारा बेचने के लिए बाहर भेज रहे हैं।

मुनाफे के लिए ही किसानों से खरीदी की जाती है

जिले के व्यापारी संगठन के अध्यक्ष किरण राजपूत ने बताया व्यापारियों द्वारा मुनाफा कमाने के लिए ही किसानों से उपज खरीदी की जाती है और उसे बाहर बेचा जाता है। भावांतर योजना के तहत व्यापारी भी अलर्ट रहते हैं कि जितनी जल्दी उनका माल बिकेगा, उतनी जल्दी मुनाफा होगा। इसलिए वह भी अपनी तैयारी रखते हैं।

बदलाव... 8 रुपए से ज्यादा भाव मिला तो किसानों को फायदा नहीं

मंडी लेखाकार अशोक जोशी ने बताया पिछली बार योजना के तहत किसानों को प्याज बेचने पर प्रति क्विंटल 400 रुपए शासन की ओर से प्रत्येक किसान को दिए गए थे, लेकिन इस बार योजना में परिवर्तन हुआ है। इसके तहत प्याज के निर्धारित मूल्य 8 रुपए प्रतिकिलो रखा गया है। अगर 8 रुपए से ज्यादा भाव में प्याज का बिकता है तो किसानों को इस योजना का कोई फायदा नहीं होगा और योजना का लाभ नहीं मिलेगा। यदि 8 रुपए से कम में प्याज बिकता है तो उस कमी को शासन द्वारा पूरा किया जाएगा। जैसे किसान का प्याज 6 रुपए किलो बिका तो उसे 2 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से योजना का लाभ मिलेगा।

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