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कोरोना का खौफ15 साल में पहली बार ऐसा हुआ

एक वर्ष पहले
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पिछले 15 सालों से शहर में निकाली जाने वाली सामूहिक गेर (फाग यात्रा) इस साल आयोजकों को निरस्त करना पड़ी। गुलाल उड़ाने के लिए इस बार खास तौर पर बुक की गई मशीन को ऐन वक्त पर इंकार करना पड़ा। इंदौर से मंगवाई गई 200 कट्टी गुलाल शहर के चौराहों पर भिजवा दिया। इतना ही नहीं झांकियों से लेकर पात्रों को तैयार करने का काम भी ऐन वक्त पर रोकना पड़ा। ऐसा पहली बार हुआ है कि शहर में रंग पंचमी की फाग यात्रा नहीं निकली हो।

हर साल की तरह इस बार भी रंग पंचमी पर दोपहर 2 बजे से आजाद चौक से फाग यात्रा निकाली जाना थी। इसके लिए होली उत्सव समिति ने सारी तैयारियां कर ली। समिति संयोजक प्रदीपसिंह दीखित ने विशेष तौर पर इस बार सूखे रंगों से होली उत्सव बनाने के लिए इंदौर से मशीन बुलवाने का आर्डर किया। इसके लिए 45 हजार रुपए का किराया भी तय कर दिया। लेकिन मशीन के इंदौर पहुंचने से पहले ही सुबह 9 बजे कोतवाली पुलिस ने आयोजक समिति के सदस्यों को थाने पर बुलाया। यहां एएसपी आरएस प्रजापति, एसडीओपी एके उपाध्याय, एसडीएम उमराव सिंह मरावी, तहसीलदार सत्येंद्र बैरवा व टीआई कोतवाली टीआई अजीत तिवारी ने आयोजकों को विश्वभर में फैल रहे कोरोना वायरस के फैलने और इससे बचाव के लिए जारी की गई एडवाईजरी से अवगत कराते हुए फाग यात्रा नहीं निकालने की समझाईश दी। बीमारी के खतरे को देखते हुए आयोजकों ने फाग यात्रा निरस्त कर दी।

पांच दिनी उत्सव के दौरान रंग पंचमी पर अंतिम दिन आजाद चौक में शहरभर के अखाड़ा पहलवानों को सम्मानित करने का कार्यक्रम भी इस साल नहीं हो सका। यानी समिति ने सुबह से लेकर रात तक के सारे इवेंट ही निरस्त कर दिए।

इधर, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए कलेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने जिले की आम जनता की सुविधा, सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जिले में धारा 144 लागू कर दी है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर चार या चार से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर सीधे प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ये खास : 50 साल से पांच दिवसीय उत्सव मनाने की परंपरा


श्रीकृष्ण व्यायामशाला द्वारा संचालित चंद्रशेखर आजाद होली उत्सव समिति के संस्थापक पुरुषोत्तम चंद्रवंशी ने बताया कि शहर में होली से लेकर रंग पंचमी तक उत्सव मनाने की परंपरा पहले से ही चल रही थी। इस दौरान मार्केट के बंद रहने से शाम ढलते ही आजाद चौक में सन्नाटा हो जाता। इसी को लेकर 1970 में युवाओं ने मिलकर यहां रात को भी मनोरंजन व कलाकारों को अवसर करने के लिए कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई, तभी से चौक में पांच दिनी उत्सव की परंपरा चल रही है। इस बीच 2004-05 में रंगपंचमी पर सामूहिक फाग यात्रा की नई शुरुआत की। इसके बाद हर साल इसका स्वरूप बढ़ता गया। पहली बार इस साल कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए इस यात्रा को निरस्त करने की नौबत आई है।

अफसरों से चर्चा के बाद धरी रही गई तैयारी


शनिवार को निकलने वाली फाग यात्रा की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के बाद आयोजकों ने फाग यात्रा की सारी तैयारियां रुकवा दी। समिति पदाधिकारियों द्वारा इंदौर से बुलवाई गुलाल उड़ाने वाली मशीन के मालिक से चर्चा कर मशीन को नहीं भेजने की बात कही। इधर, झांकी बनाने का काम भी श्रीकृष्ण व्यायामशाला के पास शुरू हो गया था। युवाओं को राम लक्ष्मण आदि की ड्रेस दिखाते हुए उनका शृंगार भी शुरू करने की तैयारी चल रही थी। यहां की व्यवस्था संभालने वाले संजय सोनी ने बताया कि रामवीर को श्रीकृष्ण, जयेश को बलराम, विवेक को सुदामा सहित अन्य को ग्वाल टोली के लिए चुना लिया था, लेकिन इनके वस्त्रों को सजाने से पहले ही समेटना पड़े।

गुलाल उड़ाने इंदौर से मंगवाई थी मशीन, कलाकारों के सजने से पहले ही निरस्त करना पड़ी फाग यात्रा

गुलाल की कट्टियां भी चौराहों पर पहुंचाई

होली उत्सव समिति के संयोजक प्रदीप सिंह दीखित ने बताया कि फाग यात्रा के लिए इंदौर से बुलवाई 200 कट्टियां भी कार्यक्रम निरस्त हो जाने के बाद अनुपयोगी हो गई। हालांकि बाद में इन्हें आयोजकों ने शहर के चौराहों पर भिजवा दिया, ताकि वहां के युवा होली उत्सव के दौरान इसका इस्तेमाल कर लेंं।

सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना दी

दीखित ने बताया फाग यात्रा निरस्त करने के बाद लोगों को जानकारी देने के लिए समिति सदस्यों ने सोशल मीडिया से इसकी जानकारी शहरवासियों तक पहुंचाने का प्रयास किया। हालांकि इसके बाद भी कई लोग यात्रा में शामिल होने के लिए चौक तक पहुंचे। निरस्त होने की सूचना मिलने के बाद वे लौट गए।

श्रीकृष्ण व्यायामशाला में राम-लक्ष्मण सहित अन्य पात्रों के शृंगार का काम बीच में ही रोकना पड़ा।
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