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बुद्ध, महावीर के धर्म के रास्ते अलग, लेकिन मकसद एक ही था सिर्फ परम आनंद, आज के युवाओं को इसे समझने की जरूरत

Shajapur News - दो राजकुमारों ने धर्म में आडंबर को देख जैन और बौद्ध धर्म की शुरूआत की। दोनों धर्म अलग अलग होने के बाद भी मकसद एक ही...

Oct 12, 2019, 09:15 AM IST
दो राजकुमारों ने धर्म में आडंबर को देख जैन और बौद्ध धर्म की शुरूआत की। दोनों धर्म अलग अलग होने के बाद भी मकसद एक ही था, सिर्फ शांति। आज 21वीं सदी के परिवेश में युवाओं को इसे समझने की जरूरत है।

यह बात शुक्रवार को दुपाड़ा रोड स्थित प्राच्य विद्यापीठ में 3 दिनी (आईएसबीएस) इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज संस्था के 19वें अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन के पहले दिन उभरकर सामने आई। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त विद्वान डॉ. सागर मल जैन की उपस्थिति में पहले दिन यहां आए देशभर के 100 से ज्यादा विद्वानों ने अपना परिचय दिया। आयोजकों ने तीन दिनी अधिवेशन की रूपरेखा बताई। इसके बाद प्रोफेसर एसआर भट्‌ट, अरविंद्र पी जामखेड़कर ने दोनों धर्मों की व्याख्या की। उन्होंने कहा, दोनों ही धर्म में विश्व प्रकृति के नियमों से चलना बताया। वहीं दोनों धर्म में असमानता सामने आने के बाद भी मकसद सिर्फ परम आनंद का ही है। जैन धर्म अहिंसा को लेकर ज्यादा संवेदनशील : जैन और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध ईसा पूर्व छटी शताब्दी पहले क्षत्रिय कुल में जन्मे थे। सम्मेलन आए विशेषज्ञों ने अपने-अपने विचारों के दौरान बताया धर्म में दोनों ने ही आडंबरवाद के साथ यज्ञों में दी जाने वाली पशु बली के विरोध में थे। दोनों ने शांति और अहिंसा का पक्ष लिया। इसमें जैन धर्म अहिंसा को लेकर अत्यधिक संवेदनशीलता जबकि जीवन को लेकर बुध का दृष्टिकोण व्यवहारिकता पर आधारित था। यही कारण है कि बौद्ध धर्म विश्व में फैला।

मानव जीवन का संपूर्ण बनाने पर बौद्ध धर्म का जोर : गौतम बुद्ध ने धर्म में आडंबर को देखते हुए मानव जीवन के संपूर्ण बनाने पर जोर दिया। समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने पंचशील का सिद्धांत दिया। जिससे अहिंसा जिसके अनुसार किसी भी जीवित प्राणी को कष्ट पहुंचाना अथवा मारना वर्जित किया गया था। किसी दूसरे की वस्तु को न तो छीने, न ही उसे देखकर संबंधित से ईर्ष्या करें।

आज शोधपत्र सबमिट होंगे : शनिवार को शोधार्थी अपने शोध पत्र को सबमिट करेंगे। वे इसका महत्ता बताएंगे।

अधिवेशन में मौजूद देशभर से आए विद्वानों ने चर्चा की।

डॉ. जैन का सम्मान किया गया।

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